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Nana Patekar Death Reason; Cardiac Arrest Broken Heart Syndrome


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19 मिनट पहलेलेखक: अदिति ओझा

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हाल ही में अभिनेता नाना पाटेकर की कार्डिएक अरेस्ट से मौत हो गई। यह एक मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें हार्ट अचानक ब्लड पंप करना बंद कर देता है। इससे ब्रेन और शरीर के दूसरे हिस्सों तक ब्लड और ऑक्सीजन पहुंचना रुक जाता है।

‘वर्ल्ड हार्ट फेडरेशन’ (WHF) के मुताबिक, भारत में हर साल हार्ट डिजीज की वजह से करीब 28 लाख लोगों की मौत होती है। लेकिन हार्ट से जुड़ी हर समस्या हार्ट अटैक या कार्डिएक अरेस्ट नहीं होती।

कुछ स्थितियां ऐसी भी हैं, जिनके बारे में लोग कम जानते हैं। इनमें से एक ‘ब्रोकेन हार्ट सिंड्रोम’ है। नाम सुनकर लगता है कि यह सिंड्रोम दिल टूटने से जुड़ा होगा, लेकिन ऐसा नहीं है।

दरअसल तेज भावनात्मक सदमे (सीवियर इमोशनल शॉक) या फिजिकल स्ट्रेस के बाद हार्ट मसल्स अचानक कमजोर पड़ जाती हैं। इसके लक्षण हार्ट अटैक जैसे हो सकते हैं। ऐसे में इस बारे में जानना जरूरी है।

इसलिए आज ‘फिजिकल हेल्थ’ में ‘ब्रोकेन हार्ट सिंड्रोम’ की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • ब्रोकेन हार्ट सिंड्रोम के क्या संकेत हैं?
  • इससे बचाव के लिए किन बातों का ध्यान रखें?

एक्सपर्ट- डॉ. समीर कुब्बा, डायरेक्टर, कार्डियोलॉजी, धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशिलिटी हॉस्पिटल, दिल्ली

सवाल- ब्रोकेन हार्ट सिंड्रोम क्या है?

जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए-

  • यह हार्ट से जुड़ी एक ऐसी कंडीशन है। इसका साइंटिफिक नाम ‘टाकोत्सुबो कार्डियोमायोपैथी’ है।
  • इस स्थिति में इमोशनल या फिजिकल स्ट्रेस से अचानक हार्ट मसल्स कमजोर हो जाती हैं।
  • इससे हार्ट की ब्लड पंप करने की क्षमता अस्थायी रूप से कम हो जाती है, जिससे शरीर के दूसरे हिस्सों तक पर्याप्त ब्लड नहीं पहुंच पाता।
  • इसमें सीने में दर्द और सांस फूलने जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं, जो हार्ट अटैक जैसे लगते हैं।
  • ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम को ‘हार्ट ब्रेक सिंड्रोम’ भी कहते हैं।

सवाल- ब्रोकेन हार्ट सिंड्रोम का हार्ट पर क्या प्रभाव पड़ता है?

जवाब- इसमें हार्ट का लेफ्ट वेंट्रिकल ठीक से ब्लड पंप नहीं कर पाता। इससे इसकी पंपिंग क्षमता घट सकती है। गंभीर मामलों में इसके कारण हार्ट फेलियर, अनियमित धड़कन या ब्लड क्लॉट बनने जैसे कॉम्प्लिकेशंस हो सकते हैं।

सवाल- ब्रोकेन हार्ट सिंड्रोम क्यों होता है?

जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए-

  • अचानक होने वाला इमोशनल शॉक या शारीरिक तनाव इसकी वजह बन सकता है।
  • हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ऐसे स्ट्रेस के दौरान शरीर में एड्रेनालिन जैसे स्ट्रेस हार्मोन तेजी से रिलीज होते हैं।
  • इन हार्मोन का बढ़ा हुआ लेवल हार्ट मसल्स को अस्थायी रूप से कमजोर कर सकता है। इससे ब्लड पंप करने की क्षमता प्रभावित होती है।
  • तलाक, नौकरी छूटना, सड़क दुर्घटना या किसी करीबी की मौत जैसी घटनाएं इस स्थिति को ट्रिगर कर सकती हैं।
  • हालांकि इसके होने की सटीक प्रक्रिया अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।

सवाल- क्या रोजमर्रा की जिंदगी का तनाव भी ब्रोकेन हार्ट सिंड्रोम का कारण बन सकता है?

जवाब- आमतौर पर यह स्थिति अचानक होने वाले तेज भावनात्मक या शारीरिक तनाव के बाद देखी जाती है।

नौकरी का दबाव, आर्थिक परेशानी या पारिवारिक विवाद जैसी स्थितियां तनाव बढ़ा सकती हैं। हालांकि, डेली तनाव में रहने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को यह सिंड्रोम होगा। इसके पीछे की सटीक प्रक्रिया और रिस्क फैक्टर्स पर अभी रिसर्च जारी है।

सवाल- क्या खुशखबरी मिलने से भी ब्रोकेन हार्ट सिंड्रोम हो सकता है?

जवाब- हां, बहुत ज्यादा खुशी या उत्साह से जुड़ी घटनाएं भी ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम को ट्रिगर कर सकती हैं। इसे ‘हैप्पी हार्ट सिंड्रोम’ कहते हैं।

  • शादी, बच्चे का जन्म, मनचाही नौकरी मिलना या कोई बड़ी उपलब्धि हासिल करना ऐसी घटनाओं के उदाहरण हैं।
  • बहुत ज्यादा खुशी मिलने पर शरीर में उत्साह और उत्तेजना अचानक बढ़ सकती है।
  • इससे शरीर का नर्वस सिस्टम एक्टिव होता है और एड्रेनालिन जैसे हार्मोन रिलीज हो सकते हैं।
  • इन हार्मोन का स्तर तेजी से बढ़ने पर हार्ट मसल की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। हालांकि, यह कंडीशन रेयर है और हर खुशखबरी से ऐसा नहीं होता।

सवाल- ब्रोकेन हार्ट सिंड्रोम के शुरुआती लक्षण क्या हैं?

जवाब- ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम के शुरुआती लक्षण अचानक दिखाई दे सकते हैं। इसे ग्राफिक में देखिए-

सवाल- ब्रोकेन हार्ट सिंड्रोम और हार्ट अटैक में क्या अंतर है?

जवाब- ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम और हार्ट अटैक में मुख्य अंतर इनके कारणों का है। ग्राफिक में दोनों के बीच का अंतर देखिए-

सवाल- ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम के रिस्क फैक्टर्स क्या हैं?

जवाब- ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम किसी को भी हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों में इसका रिस्क ज्यादा होता है। ग्राफिक में देखिए-

सवाल- सीने में दर्द हो तो क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए?

जवाब- इसे गैस या तनाव समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में कुछ बातों का ध्यान रखें, ग्राफिक में देखिए-

सवाल- डॉक्टर ब्रोकेन हार्ट सिंड्रोम की पहचान कैसे करते हैं?

जवाब- इसके लिए डॉक्टर मेडिकल हिस्ट्री और शारीरिक जांच के बाद कुछ टेस्ट कराते हैं, ताकि हार्ट मसल्स की कार्यक्षमता और उसकी ब्लड पंप करने की क्षमता का पता लगाया जा सके।

ब्लड टेस्ट

हार्ट मसल्स को नुकसान पहुंचने पर ब्लड में रिलीज होने वाले खास एंजाइम और प्रोटीन, जैसे ट्रोपोनिन की जांच की जाती है।

ECG

हार्ट बीट और उसकी इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी में होने वाले बदलावों का पता लगाया जाता है।

इकोकार्डियोग्राफी

अल्ट्रासाउंड की मदद से हार्ट की पंपिंग क्षमता और उसकी मसल्स की एक्टिविटी देखी जाती है।

कोरोनरी एंजियोग्राफी

हार्ट की आर्टरीज में रुकावट का पता लगाया जाता है। इससे हार्ट अटैक और ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम के बीच अंतर समझने में मदद मिलती है।

चेस्ट एक्स-रे या कार्डियक MRI

जरूरत पड़ने पर हार्ट की बनावट और दूसरी संभावित समस्याओं की जांच की जाती है।

इन टेस्ट के आधार पर डॉक्टर बीमारी की पहचान करते हैं। चूंकि इसके लक्षण हार्ट अटैक जैसे हो सकते हैं, इसलिए पहले हार्ट अटैक की आशंका की जांच करना जरूरी होता है।

सवाल- ब्रोकेन हार्ट सिंड्रोम का इलाज क्या है?

जवाब- इसके इलाज में मुख्य रूप से दवाओं और हार्ट की कार्यक्षमता को मॉनिटर किया जाता है। इलाज मरीज की स्थिति और हार्ट की पंपिंग क्षमता के आधार पर तय होता है।

  • डॉक्टर जरूरत के अनुसार ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने, हार्ट बीट सामान्य करने और शरीर में जमा अतिरिक्त फ्लुइड कम करने के लिए दवाएं दे सकते हैं।
  • कुछ मरीजों में क्लॉट बनने का रिस्क होने पर डॉक्टर खून पतला करने वाली दवाएं दे सकते हैं।
  • अगर हार्ट पर्याप्त ब्लड पंप नहीं कर पा रहा है तो विशेष उपकरणों की मदद से हार्ट को सपोर्ट देना पड़ सकता है।
  • ज्यादातर मरीजों में हार्ट की पंपिंग क्षमता कुछ हफ्तों में सुधर जाती है।

सवाल- क्या ब्रोकेन हार्ट सिंड्रोम जानलेवा हो सकता है?

जवाब- हां, ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम कुछ मामलों में जानलेवा हो सकता है। इसमें हार्ट की पंपिंग क्षमता अचानक कम होने से हार्ट फेलियर, अनियमित धड़कन या खून के थक्के बनने जैसे गंभीर कॉम्प्लिकेशंस हो सकते हैं। कुछ गंभीर मामलों में कार्डियोजेनिक शॉक भी हो सकता है।

सवाल- क्या एक बार ब्रोकेन हार्ट सिंड्रोम होने के बाद यह दोबारा हो सकता है?

जवाब- हां, लेकिन इसका रिस्क कम होता है। इमोशनल स्ट्रेस, फिजिकल स्ट्रेस या कोई दूसरी गंभीर घटना इसे ट्रिगर कर सकती है। इसलिए ठीक होने के बाद भी डॉक्टर की सलाह के अनुसार रेगुलर जांच कराना, दवाएं लेना और स्ट्रेस मैनेज करना जरूरी है।

सवाल- ब्रोकेन हार्ट सिंड्रोम का जोखिम कैसे कम कर सकते हैं?

जवाब- हेल्दी लाइफस्टाइल से इसका रिस्क कम किया जा सकता है। इसके लिए-

  • बैलेंस्ड डाइट लें।
  • हफ्ते में 5 दिन कम-से-कम 30 मिनट फिजिकल एक्टिविटी करें।
  • रोजाना 7-9 घंटे की नींद लें।
  • परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताएं।
  • तनाव मैनेज करने के लिए योग, मेडिटेशन या डायरी लिखने का अभ्यास करें।
  • तंबाकू और नशीले पदार्थों से बचें।
  • रेगुलर हेल्थ चेकअप कराएं।

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ग्राफिक्स- विपुल शर्मा

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