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जालंधर में गृह मंत्री अमित शाह 2027 चुनाव के लिए पंजाब BJP को नशामुक्ति का मुद्दा थमा गए। उन्होंने पूरे पंजाब को एक ही मुद्दे में समेट दिया और कहा कि वह आने वाला चुनाव इसी मुद्दे पर लड़ने वाले हैं। अपने 25 मिनट के भाषण में अमित शाह ने नशे पर पहली बार CM भगवंत मान, आम आदमी पार्टी (AAP) सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल पर सीधा हमला बोला। उन्होंने नशे को खत्म करने की तारीख बताकर पंजाब के युवाओं को साधने की कोशिश की। साथ ही नशे के दलदल में फंसे युवाओं की माताओं को स्वस्थ परिवार की आशा दिखाकर अपने पाले में करने का प्रयास किया। इधर, पंजाब में BJP की ओर से नशे को मुद्दा बनाने के तोड़ में AAP सरकार ने गुजरात में पकड़े जा रहे नशे पर भाजपा को घेरना शुरू कर दिया है। AAP सरकार ने गुजरात में पकड़े जा रहे नशे पर वीडियो जारी कर जवाब मांगा है कि यहां नशा न रुकने से पंजाब की जवानी बर्बाद हो रही है। पॉलिटिकल एक्सपर्ट ने रैली पर अपनी अलग-अलग राय दी है। डॉ. केके रत्तू का मानना है कि पंजाब में भाजपा नशे के मुद्दे पर एग्रेसिवली लड़ेगी। शाह की रैली का फायदा बीजेपी को मिल सकता है। वहीं, एडवोकेट नईम खान कहते हैं कि रैली पूरी तरह राजनीतिक थी। पंजाब देश से बाहर नहीं है। केंद्र राज्य सरकार से पावरफुल होता है। वह चाहे तो नशा रोक सकता है। यह वोट लेने का पॉलिटिकली स्टंट है। नशे के बाद BJP का युवा और महिलाओं पर फोकस पंजाब में नशे के मुद्दे के अलावा गृह मंत्री का बड़ा फोकस पंजाब के युवा और महिलाएं रहीं। अपने भाषण में शाह ने युवाओं से 3 बार कमल के बटन को दबाने की अपील की। इसके साथ ही महिलाओं को नशे से मर रहे उनके बच्चों के इमोशन से जोड़ा। शाह ने माताओं-बहनों कहकर बार-बार उन घटनाओं का जिक्र किया, जिसमें नशे से उनके बच्चे मरे हैं। लुधियाना के जगरांव में 6 बेटे खोने वाली महिला का जोर देकर जिक्र किया गया। नशे को मुद्दा बनाने की बड़ी वजह वोटर सेंट्रलाइजेशन एक्सपर्ट मानते हैं कि नशे का मुद्दा पूरे पंजाब से जुड़ा है। पंजाब में इसके अलावा भी कई और मुद्दे हैं जिनमें पानी, बेरोजगारी भी है, लेकिन ये एक साथ पूरे पंजाब को कनेक्ट नहीं करता। पंजाब का 100 फीसदी वोट सीधा नशे के मुद्दे से जुड़ा है। इसलिए बीजेपी को लगता है कि एक मुद्दे से पूरे पंजाब के वोटर्स के दिमाग में बीजेपी के लिए जगह बनाई जा सकती है। पंजाब में 4 हजार किलोमीटर तक रैली निकालने की भी यही वजह रही। रैली में वोटर्स के सामने ये इमोशन कार्ड फेंके रैली पर एक्सपर्ट्स क्या बोले… पहली बार भाजपा वोटर्स के समाने बेबस दिखी राजनीतिक मामलों के माहिर डॉ. कृष्ण कुमार रत्तू ने कहा कि भाजपा को नशे के अलावा मुद्दों पर भी बात क्लियर करनी चाहिए थी। अमित शाह अपने करियर की पहली रैली में वोट के लिए गिड़गिड़ाते नजर आए। वह बार-बार वोट मांगते रहे। रैली में कई मुद्दों को छुआ ही नहीं गया। रत्तू कहते हैं- किसानों की MSP गारंटी की बात नहीं की। बंदी सिंह की रिहाई पर कुछ नहीं कहा। नशे पर ये भी बताना चाहिए था कि केंद्र सरकार के अधीन आते पंजाब के बॉर्डर से 50 किलोमीटर के अंदर के एरिया में कितना नशा पकड़ा गया। पंजाब के कर्ज का जिक्र किया, लेकिन पंजाब में आने पर इसका क्या करेंगे? ये नहीं बताया। विदेश में रह रहे बच्चों की प्रॉब्लम पर बात नहीं की। अपने ही सांसद और LPU चांसलर अशोक मित्तल की यूनिवर्सिटी में हिंसा हुई, लेकिन इस पर एक शब्द नहीं बोला। नशे पर बार-बार कहना पंजाबियत का अपमान पॉलिटिकल एक्सपर्ट एडवोकेट नईम खान ने कहा कि पंजाब भाजपा की यह रैली नशा मुक्ति पर न होकर प्योरली राजनीतिक रैली थी। हर स्टेटमेंट पॉलिटिकल था। ड्रग्स पर बार-बार पंजाब का नाम लेने से पंजाबियत का अपमान किया गया है। गुजरात में पकड़ी ड्रग पर केंद्र सरकार चुप है। उस पर बात होनी चाहिए थी। उन्होंने कहा- पंजाब के लोगों को मुद्दों से गुमराह करने की भी कोशिश की गई। पंजाब के लोग रैली में इसलिए गए थे कि उन्हें उम्मीद थी कि पंजाब के लिए राहत पैकेज की घोषणा होगी। रोजगार की बात होगी, लेकिन कुछ नहीं कहा। केंद्र सरकार सूबे की सरकार से पावरफुल होती है। गृह मंत्री के आने पर जब शहर का चप्पा-चप्पा सील हो सकता है तो क्या बॉर्डर से नशा सील नहीं हो सकता?
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अमित शाह ने पूरा पंजाब एक ही मुद्दे पर समेटा:युवा-महिलाएं टारगेट; AAP का काउंटर- नशा गुजरात की देन; एक्सपर्ट बोले- वोट मांगने का स्टंट था
