आज का एक्सप्लेनर:शेख हसीना की फांसी लगभग तय, फिर भी बांग्लादेश क्यों जाना चाहती हैं; क्या भारत का रुख बदल गया




बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना बांग्लादेश लौटना चाहती हैं। अगस्त 2024 में तख्तापलट के बाद वो भागकर भारत आ गई थीं। उन्हें बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने मौत की सजा सुनाई है। बांग्लादेशी नेता कह रहे- वापस आने पर इस सजा को अंजाम दिया जाएगा। क्या वाकई बांग्लादेश लौटेंगी शेख हसीना, फांसी की आशंका के बीच इससे हासिल क्या होगा और भारत का रुख क्या है; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: शेख हसीना के बांग्लादेश लौटने की बात कहां से उठी?
जवाबः ये चर्चा शेख हसीना के ही बयानों से शुरू हुई। उन्होंने 29 जून को एक टीवी चैनल से ई-मेल इंटरव्यू में कहा… ‘मुझे मौत का डर नहीं है। मैंने 1975 में अपना पूरा परिवार खो दिया था। 21 अगस्त को ग्रेनेड से मेरी हत्या की कोशिश हुई। मैं हर साजिश से लड़ते हुए बांग्लादेश की अवाम के साथ खड़ी रही और वोट से 5 बार पीएम चुनी गई। मेरी पूरी जिंदगी बांग्लादेश की जनता, अवामी लीग (हसीना की पार्टी) और बांग्लादेश के हित से जुड़ी रही है। मैं हर रुकावट, हर साजिश को पार करते हुए इस साल अपने मुल्क लौटूंगी।’ इसके बाद 10 जुलाई की सुबह हसीना ने न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को भी टेलीफोनिक इंटरव्यू में बताया कि दिसंबर 2026 तक भारत से बांग्लादेश लौटेंगी और अपनी पार्टी के कुछ और निर्वासित नेताओं के साथ सरेंडर करेंगी। शेख हसीना ने कहा, ‘हो सकता है कि लौटने पर वे मुझे गिरफ्तार कर लें, वे मुझे मार भी सकते हैं। फिर भी, मुझे जाना ही होगा। मेरी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं का भयानक तरह से दमन हो रहा है।’ हसीना की सरकार में गृहमंत्री रहे असदुज्जमान खान भी निर्वासित हैं, उनको भी मौत की सजा सुनाई गई है। उन्होंने कहा, ‘हम सब मिलकर अदालत में आत्मसमर्पण करेंगे।’ सवाल-2: बांग्लादेश लौटने पर उनके साथ क्या-क्या हो सकता है?
जवाबः शेख हसीना पर उनके खिलाफ आंदोलन करने वाले स्टूडेंट्स की हत्याओं के लिए पुलिस और सेना को आदेश देने का आरोप है। बांग्लादेश की इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल, यानी ICT-BD नवंबर २०२५ में शेख हसीना को मौत की सजा सुना चुकी है। ये पहली बार है, जब बांग्लादेश में किसी पूर्व पीएम को मौत की सजा सुनाई गई है। अब अगर शेख हसीना बांग्लादेश जाकर सरेंडर करती हैं, तो उन्हें गिरफ्तार करके फांसी देने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। हालांकि ट्रिब्यूनल के फैसले के खिलाफ अपील भी की जा सकती है। हसीना की पार्टी अवामी लीग पर बांग्लादेश में बैन है। इसलिए गिरफ्तारी पर किसी बड़े विरोध प्रदर्शन की भी उम्मीद कम है। पुलिस इसे कुचल सकती है। बांग्लादेश के पीएम तारिक रहमान के स्ट्रैटेजिक एडवाइजर जाहिद-उर-रहमान ने कहा है, ‘देश की जनता चाहती है कि उनके जुर्म के लिए उन्हें मौत की सजा दी जाए। अगर वो वापस आईं, तो इस सजा को अंजाम दिया जाएगा। जनता यही चाहती है। उन्हें दुनिया के सबसे अच्छे वकील लाने दो।’ सवाल-3: जब फांसी की सजा हो चुकी, तो फिर लौटने का दांव क्यों खेल रहीं हसीना?
जवाबः हसीना के बांग्लादेश जाने के जोखिम भरे दांव के पीछे सबसे बड़ी वजह है- बांग्लादेश की राजनीति में वापसी की कोशिश। हसीना की अवामी लीग बांग्लादेश में बैन है। बीती 23 जून को पार्टी ने 77वां स्थापना दिवस मनाया, तो दर्जनों कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया। हसीना के बेटे सजीब वाजेद जॉय, फिलहाल अमेरिका में रहते हैं, लेकिन वो बांग्लादेश के मुद्दों पर एक्टिव हैं। अगर हसीना उनके लिए राजनीतिक जमीन तैयार करना चाहें, तो भी ये बिना बांग्लादेश लौटे मुमकिन नहीं है। अल-जजीरा के मुताबिक, हसीना ने विदेश से ही अवामी लीग को दोबारा मजबूत करने की कोशिशें शुरू कर दीं हैं। वो 100 से ज्यादा संसदीय इलाकों में अपनी पार्टी के लोगों के साथ ऑनलाइन बैठकें कर रही हैं। एक इंटरव्यू में हसीना ने खुद कहा, ‘अवामी लीग पर कई हमले हुए, बैन लगाया गया, लेकिन जनता की ताकत से पार्टी दोबारा उठ खड़ी हुई। ऐसी कोशिशों में वो पहले भी फेल हुए हैं, दोबारा होंगे। बैन लगाकर पार्टी के ऑफिस और पॉलिटिकल एक्टिविटी बंद कर सकते हैं, लेकिन पार्टी वर्कर्स जुलूस निकाल रहे हैं। आम लोग इसमें शामिल हो रहे हैं। ये संकेत है कि अवामी लीग फिर से मजबूत होने लगी है।’ हालांकि एक्सपर्ट्स एक छिपी वजह भी बताते हैं… ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन में स्ट्रैटेजिक स्टडीज प्रोग्राम के डिप्टी डायरेक्टर विवेक मिश्र कहते हैं, ‘आखिर कब तक हसीना भारत में या किसी और देश में रहेंगी? भारत भले ये बात न कहे, लेकिन उसके लिए एक एक्स्ट्रा जिम्मेदारी जैसा है। एक निर्वासित नेता को रखना आसान नहीं होता। शेख हसीना के साथ अमेरिका का भी सपोर्ट नहीं है। बांग्लादेश और चीन बहुत नजदीक आ चुके हैं। ऐसे में भारत तारिक रहमान के दौर में बांग्लादेश से अच्छे रिश्ते चाहता है।’ इसके संकेत भी मिलने लगे हैं। जब तारिक रहमान पीएम बने, तो पीएम मोदी बधाई देने वाली शुरुआती नेताओं में से एक थे। BNP ने पीएम मोदी की बधाई को हाईलाइट किया और अच्छे रिश्तों की उम्मीद जताई। अगले ही दिन BNP के सीनियर नेता सलाहुद्दीन अहमद ने भारत से शेख हसीना का प्रत्यर्पण करने की पार्टी की मांग दोहराई। तारिक ने भी कहा कि कानूनी प्रक्रिया के हिसाब से हसीना के प्रत्यर्पण की मांग की जाएगी। सवाल-4: तो क्या भारत दबाव में हसीना को वापस भेज देगा?
जवाबः दिसंबर 2024 से अब तक बांग्लादेश कई बार भारत को हसीना के प्रत्यर्पण का अनुरोध भेज चुका है। १४ जुलाई को भी भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है- पूर्व पीएम (शेख हसीना) के मामले में हमारे रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। प्रत्यर्पण का मामला कानूनी मुद्दा है, उसी तरीके से निपटा जाएगा। इस बयान और भारत के रुख का मतलब समझिए… हालांकि संधि में 3 आर्टिकल हैं, जिनके जरिए भारत शेख हसीना के प्रत्यर्पण से इनकार कर सकता है… आर्टिकल 6- अगर अपराध राजनीतिक हो: हसीना को कई हत्याओं के मामले में सजा हुई है। इसलिए ये आर्टिकल लागू होना मुश्किल है। आर्टिकल 7- आरोपी पर दूसरे देश में भी कोई मामला चल रहा हो: शेख हसीना के मामले में ऐसा नहीं है। आर्टिकल 8- अगर आरोप न्याय के लिए नहीं, बल्कि गलत तरीके से लगा हो: भारत कह सकता है कि हसीना के खिलाफ आरोप सही नहीं हैं और बांग्लादेश लौटने पर उनको राजनीतिक उत्पीड़न झेलना पड़ सकता है। 9 जुलाई को बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री शमा ओबैद इस्लाम ने कहा कि हसीना को लाने के लिए लगातार कोशिश जारी है। प्रत्यर्पण इंटरनेशनल नियमों और कानून के तहत होता है, इसलिए इसमें समय लगता है। हालांकि जब उनसे पूछा गया कि क्या भारत इस मामले में सहयोग कर रहा है, तो उन्होंने सीधे जवाब नहीं दिया। विवेक मिश्र कहते हैं कि बांग्लादेश में जब तक अंतरिम सरकार थी, तब तक भारत ने इस मुद्दे को टाले रखा। अब बांग्लादेश में स्थायी सरकार है। इसलिए भारत को जवाब देना होगा। ये बात शेख हसीना भी समझती हैं।’ इसीलिए हसीना ने खुद कहा है, ‘मुझे किसी के भेजने की जरूरत नहीं पड़ेगी, मैं खुद अपने देश लौटूंगी।’ सवाल-5: बांग्लादेश में हसीना के पास सजा से बचने का कोई रास्ता है? जवाब: बांग्लादेश में मौत की सजा से बचने के लिए हसीना के पास दो रास्ते हैं… ट्रिब्यूनल में ही सजा को चुनौती दें और केस जीत जाएं ट्रिब्यूनल के फैसले के खिलाफ हसीना वहीं अपील कर सकती हैं। हालांकि अपील की समयसीमा 30 दिन की है, लेकिन मार्च 2026 में हसीना के वकील ट्रिब्यूनल को पत्र भेजकर सजा को अवैध बताकर इसे रद्द करने की मांग कर चुके हैं। ह्यूमन राइट्स वाच और एमनेस्टी इंटरनेशनल भी बिना सुनवाई के हुई इस सजा पर चिंता जता चुके हैं। इसलिए हो सकता है, हसीना को ट्रिब्यूनल सुनवाई में शामिल होने का मौका दे दे। हालांकि ट्रिब्यूनल से हसीना आरोपों से बरी हो जाएं, ये मुश्किल है। सजा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करके स्टे ले लें हसीना सरेंडर से पहले ही इस फैसले के खिलाफ बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट फैसले पर सुनवाई शुरू कर सकता है या फिर स्टे दे सकता है। हालांकि बांग्लादेश में सुप्रीम कोर्ट पर सत्ता का प्रभाव रहता है। मसलन- ये खबर भी पढ़िए… ट्रम्प के करीबी लिंडसे ग्राहम की यूक्रेन से लौटते ही मौत, क्या रूस ने जहर दिया; भारत पर 500% टैरिफ के लिए उकसाते थे राष्ट्रपति ट्रम्प के बेहद करीबी सीनेटर लिंडसे ग्राहम 11 जुलाई को यूक्रेन दौरे से अमेरिका लौटे, ट्रम्प से फोन पर बात की और सोने चले गए। कुछ घंटे बाद तबीयत बिगड़ी और मौत हो गई। ग्राहम ईरान और रूस के धुर विरोधी माने जाते थे। भारत को भी निशाने पर रखा और मौत से एक दिन पहले तक 500% टैरिफ लगाने की जिद करते रहे। पूरी खबर पढ़िए…



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