आदिवासी बच्चों की मौत की कीमत सिर्फ ₹20 हजार:कांग्रेस MLA ने कहा- सरकारी आंकड़ों में 8, हकीकत में 22 मौतें, स्पेशल कमेटी से जांच हो




आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और झाबुआ विधायक डॉ. विक्रांत भूरिया ने बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौतों को लेकर सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस में भूरिया ने दावा किया कि बालाघाट में कुपोषण, मलेरिया और मीजल्स के कारण 22 आदिवासी बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि सरकारी आंकड़ों में अब तक सिर्फ आठ मौतें दर्ज की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि मृत बच्चों में पीजीवीटी बैगा आदिवासी समुदाय के बच्चे शामिल हैं। छह महीने से पोषण आहार बंद भूरिया ने कहा कि संबंधित क्षेत्र में पिछले छह महीने से पोषण आहार बंद है। उन्होंने सवाल उठाया कि आदिवासी बच्चों के लिए आने वाला टेक होम राशन आखिर कहां जा रहा है?। उन्होंने कहा कि कई गांवों से नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र करीब 20 किलोमीटर दूर है। क्षेत्र में वनाधिकार के पट्टे भी नहीं हैं और आदिवासी परिवारों के पास अपनी आवाज उठाने का प्रभावी तंत्र नहीं है। 80% से कम टीकाकरण, मीजल्स फैलने का दावा भूरिया ने कहा कि संबंधित क्षेत्रों में टीकाकरण कवरेज 80 प्रतिशत से भी कम है। इसके कारण मीजल्स फैलने की स्थिति बनी। उन्होंने सवाल किया कि जब कई आदिवासी क्षेत्रों में बच्चों का पूरा टीकाकरण नहीं हो पा रहा है तो फिर सार्वभौमिक टीकाकरण कवरेज के दावे कैसे किए जा सकते हैं। ‘आदिवासी बच्चे की जिंदगी की कीमत सिर्फ 20 हजार’ भूरिया ने सरकार की सहायता राशि पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि बच्चों की मौत के बाद उनके परिवारों को सिर्फ 20-20 हजार रुपए दिए गए। उन्होंने कहा कि गलती परिवारों की नहीं, बल्कि सिस्टम की थी। ऐसे में मृत बच्चों के परिवारों को इतनी कम राशि देना संवेदनहीनता है। बैगा विकास प्राधिकरण के बजट पर भी सवाल भूरिया ने आरोप लगाया कि बैगा विकास प्राधिकरण के लिए करोड़ों रुपए का बजट आता है, लेकिन यह पैसा कहां खर्च हो रहा है, इसका पता नहीं है। उन्होंने सरकार से आदिवासी क्षेत्रों में आने वाले बजट और उसके वास्तविक खर्च का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग की। विधानसभा के जवाब का हवाला देकर 12 रुपए के पोषण आहार पर सवाल भूरिया ने कहा कि उन्होंने मध्यप्रदेश विधानसभा में सवाल पूछा था कि 2020 से 2025 के बीच प्रदेश के आदिवासी ब्लॉकों को कितना बजट दिया गया और कितना खर्च हुआ। सरकार के जवाब का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि कुपोषित या अति कम वजन वाले बच्चों के लिए 12 रुपए का पोषण आहार दिया जाता है। उन्होंने कहा कि 12 रुपए में दो केले भी नहीं आ पाएंगे। उन्होंने यह भी दावा किया कि सरकार ने विधानसभा में बताया कि महिला एवं बाल विकास विभाग के पास आदिवासी ब्लॉकों के लिए बजट नहीं है। भूरिया के मुताबिक, जब इस बारे में मंत्री से पूछा गया तो जवाब मिला कि केंद्र से पैसा नहीं आने के कारण राशि नहीं दी जा पा रही है। पोषण पुनर्वास केंद्र में 980 रुपए खर्च पर सवाल भूरिया ने कहा कि पोषण पुनर्वास केंद्र में एक बच्चे पर कुल मिलाकर करीब 980 रुपए खर्च किए जाते हैं। उन्होंने सवाल किया कि इतनी राशि में गंभीर रूप से कुपोषित बच्चे का समुचित इलाज कैसे संभव है। गढ़चिरौली में हॉस्टल में सांप के डसने से तीन बच्चियों की मौत का दावा भूरिया ने महाराष्ट्र के गढ़चिरौली का मामला भी उठाया। उन्होंने कहा कि आदिवासी हॉस्टल में सांप के डसने से तीन आदिवासी बच्चियों की मौत हो गई। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि गढ़चिरौली जिले के प्रभारी मंत्री स्वयं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस हैं। इसके बावजूद आदिवासी छात्रावासों की स्थिति इतनी खराब है कि वहां सांप के डसने से बच्चियों की जान चली गई। राष्ट्रपति और राज्यपाल का हवाला देकर सरकार से सवाल भूरिया ने कहा कि देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और मध्यप्रदेश के राज्यपाल भी आदिवासी समाज से आते हैं। इसके बावजूद मध्यप्रदेश में 22 आदिवासी बच्चों की मौत होना गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने सरकार से आदिवासी इलाकों में पोषण, स्वास्थ्य, टीकाकरण और छात्रावासों की व्यवस्था की तत्काल जांच कराने की मांग की।



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