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इंस्टग्राम पर भावुक पोस्ट डाली, फैंस ने भर दिया थिएटर:एक्टर बोले- इश्क का खुमार फिल्म में निभा रहा मुख्य भूमिका, मिल रहा समाज का सपोर्ट




जयपुर के पास बस्सी के बांसखोह जैसे ग्रामीण इलाके से निकलकर फिल्मी दुनिया में अपनी पहचान बनाने का सपना देखने वाले राजवीर गुर्जर बस्सी अब फिल्म ‘इश्क का खुमार’ में मुख्य भूमिका में नजर आ रहे हैं। खास बात यह है कि इस फिल्म में उन्होंने अभिनय के साथ निर्देशन की जिम्मेदारी भी संभाली है। जबकि कहानी और पटकथा अब्दुल क़ालिम ने लिखी है। फिल्म में राजवीर के साथ अभिनेत्री श्रेया खन्ना मुख्य भूमिका में हैं। राजस्थान में ही शूट हुई इस फिल्म के संगीत से बॉलीवुड के गायक शाहिद माल्या और संगीतकार निक्स बोहरा जुड़े हैं। राजवीर के लिए यह फिल्म सिर्फ एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि उनके लंबे संघर्ष और सपने का नतीजा है। वे बताते हैं कि शुरुआत में जब फिल्म को दर्शकों का अपेक्षित समर्थन नहीं मिल रहा था तो उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए लोगों से फिल्म देखने की अपील की। लेकिन थिएटर में दर्शकों का ऐसा प्यार मिला कि सुबह के शो तक हाउसफुल हो गए। इस दौरान राजवीर गुर्जर ने अपने गांव से निकलकर फिल्म इंडस्ट्री में लीड रोल तक पहुंचने, संघर्ष, समाज की सोच में आए बदलाव और ‘इश्क का खुमार’ की कहानी को लेकर दैनिक भास्कर से बातचीत की। सवाल: आपकी फिल्म ‘‘इश्क का खुमार’ किस तरह की कहानी है और इसमें आपका किरदार कैसा है? राजवीर गुर्जर बस्सी: यह हिंदी फिल्म है और आज की पीढ़ी को ध्यान में रखकर बनाई गई है। मेरा किरदार भी नई पीढ़ी की सोच और जीवनशैली से जुड़ा हुआ है। समाज जिस तरह बदल रहा है, उसी बदलाव को कहानी में जगह दी गई है। फिल्म मूल रूप से प्रेम कहानी है। इसमें दिखाया गया है कि किस तरह दो लोगों के बीच प्यार होता है, वह रिश्ता किस तरह आगे बढ़ता है और बदलते समय के साथ प्रेम को लेकर नई पीढ़ी की सोच किस तरह विकसित हो रही है। कोशिश यही रही है कि कहानी आज के युवाओं को अपनी लगे।
सवाल: फिल्म का विचार कैसे आया और कहानी को किस तरह विकसित किया गया? राजवीर गुर्जर बस्सी: जयपुर में सोनम टेलीफिल्म्स नाम से प्रोडक्शन हाउस है। उनकी ओर से मुझे फिल्म बनाने के लिए प्रेरित किया गया। उनसे बातचीत हुई तो विचार आया कि आज की जनरेशन को ध्यान में रखते हुए एक प्रेम कहानी बनाई जाए, जिसमें वर्तमान समय की सोच और रिश्तों को दिखाया जाए। इसके बाद हमने कहानी पर काम शुरू किया। लेखक अब्दुल क़ालिम ने मेरे साथ मिलकर कहानी को विकसित किया और इसकी पटकथा तैयार की। धीरे-धीरे कहानी का स्वरूप तैयार हुआ और फिर फिल्म बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई। सवाल: आप बस्सी के ग्रामीण इलाके से आते हैं। फिल्म इंडस्ट्री में आने का सपना कैसे देखा? राजवीर गुर्जर बस्सी: मैं बस्सी के बांसखोह का रहने वाला हूं। यह पूरी तरह ग्रामीण अंचल है। जयपुर के नजदीक होने के बावजूद इसकी अपनी एक अलग कस्बाई और ग्रामीण पहचान है। जब मैं अपने पिता के साथ जयपुर आया था, तभी से फिल्म इंडस्ट्री में जाने का सपना मन में था। हालांकि इस सपने की शुरुआत कॉलेज के समय ही हो गई थी। उस समय इंडस्ट्री में जाने के रास्ते बहुत स्पष्ट नहीं थे। यह भी पता नहीं था कि कहां जाकर ऑडिशन देना है, किससे मिलना है और काम कैसे मिलेगा। फिर मैंने राजस्थानी फिल्म इंडस्ट्री से शुरुआत की। छोटे-छोटे काम किए, गाने बनाए और जहां भी मौका मिला, अपनी प्रतिभा दिखाने की कोशिश की। मेरा मानना था कि अगर मौका नहीं मिल रहा है तो कम से कम अपनी तरफ से कोशिश में कोई कमी नहीं होनी चाहिए। बॉलीवुड में भी काम करने का मौका मिला। मैंने ‘सास, बहू, फ्लेमिंगो’ जैसी सीरीज में काम किया। वहां जाकर बहुत कुछ सीखने को मिला। बड़े सेट कैसे तैयार होते हैं, कलाकारों के साथ किस तरह काम होता है, कहानी को किस स्तर पर आगे बढ़ाया जाता है और एक बड़े प्रोडक्शन में हर व्यक्ति की क्या भूमिका होती है, इन सब चीजों को करीब से देखने का मौका मिला। इन अनुभवों से मुझे लगा कि मुझे खुद को और बेहतर करना है। अभिनय के साथ-साथ कहानी और फिल्म निर्माण को भी समझना शुरू किया। लगातार सीखने और खुद को सुधारने के बाद अब ‘इश्क का खुमार’ में लीड रोल करने का मौका मिला है। सवाल: शुरुआत में आपने कहा कि लोगों का सपोर्ट नहीं मिल रहा था, लेकिन फिल्म रिलीज होने के बाद थिएटर में दर्शकों का खूब प्यार मिला। इसे किस तरह देखते हैं? राजवीर गुर्जर बस्सी: यह फिल्म मेरा सपना था। मैंने इस फिल्म को सिर्फ बनाया नहीं, बल्कि इसे जिया है। फिल्म में मैं अभिनेता होने के साथ-साथ निर्देशक के तौर पर भी जुड़ा हूं। इसलिए यह मेरे दिल के बहुत करीब है। जब फिल्म रिलीज हुई तो शुरुआत में मुझे लगा कि लोगों का उतना समर्थन नहीं मिल रहा है, जितनी उम्मीद थी। मैंने लोगों से अपील की, सोशल मीडिया पर अपनी भावनाएं सामने रखीं और उनसे फिल्म को सपोर्ट करने की गुहार लगाई। मुझे उम्मीद नहीं थी कि उसके बाद इतना प्यार मिलेगा। थिएटर में दर्शकों की भीड़ देखकर बहुत भावुक हुआ। सुबह का शो हाउसफुल रहा। सबसे खास बात यह थी कि जो लोग फिल्म देखने आए, उनमें से ज्यादातर मेरे व्यक्तिगत जानकार नहीं थे। वे सिर्फ फिल्म को पसंद करके और मुझे सपोर्ट करने के लिए आए थे। यह मेरे लिए बहुत बड़ा अनुभव था। सोशल मीडिया पर फिल्म के गानों पर रील बन रही हैं। हर जगह फिल्म की चर्चा हो रही है। मेरे लिए यह पूरा माहौल बहुत यादगार है। सवाल: जिस समाज और ग्रामीण पृष्ठभूमि से आप आते हैं, वहां से निकलकर अभिनय में पहचान बनाना कितना चुनौतीपूर्ण रहा? राजवीर गुर्जर बस्सी: मेरे लिए यह बहुत बड़ी चुनौती थी। मैं जिस समाज से आता हूं, उसे आमतौर पर किसान वर्ग के रूप में जाना जाता है। पिछले कुछ वर्षों में इस समाज के बच्चे शिक्षा, खेल, प्रशासन, कारोबार और दूसरे क्षेत्रों में भी आगे बढ़े हैं। लेकिन फिल्म इंडस्ट्री मेरे लिए बिल्कुल अलग क्षेत्र था। मेरे आसपास दूर-दूर तक कोई ऐसा नहीं था, जिसे देखकर मैं कह सकूं कि इस रास्ते पर चलकर यहां तक पहुंचा जा सकता है। मैं अपने इलाके से ऐसा पहला लड़का हूं, जो लीड रोल में काम कर रहा है। यह मेरे लिए बहुत भावुक करने वाला पल है। शुरुआत में समाज के कुछ लोगों के लिए मुझे इस रूप में स्वीकार करना आसान नहीं था। उन्हें समझ नहीं आता था कि एक ग्रामीण इलाके का लड़का फिल्म इंडस्ट्री में कैसे जाएगा और क्या करेगा। लेकिन मैंने अपना काम जारी रखा। अब जब फिल्म को लोगों का प्यार मिल रहा है और मुझे लीड रोल में देख रहे हैं तो वही लोग गर्व महसूस कर रहे हैं और समर्थन दे रहे हैं। समय के साथ सोच बदली है और मेरे लिए यह बदलाव बहुत मायने रखता है।



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