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कटनी की रीठी तहसील के सिमरा और देवगांव के सैकड़ों ग्रामीणों ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट कार्यालय के मुख्य द्वार पर प्रदर्शन किया। वे उद्योग विभाग को भूमि सौंपने के प्रस्ताव का विरोध कर रहे थे। मूसलाधार बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में ग्रामीण, जिनमें विशेष रूप से महिला किसान शामिल थीं, अपनी जमीन बचाने की मांग को लेकर लगभग दो घंटे तक धरने पर डटे रहे। संयुक्त कलेक्टर द्वारा उचित कार्रवाई का आश्वासन मिलने के बाद ही ग्रामीणों ने अपना धरना समाप्त किया। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे ग्रामीण मुकेश यादव ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वर्षों से इन जमीनों पर काबिज सैकड़ों गरीब परिवारों को उद्योगपतियों के इशारे पर उजाड़ने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्रामीण किसी भी कीमत पर अपनी पुश्तैनी और निस्तारी की जमीन उद्योगों के लिए नहीं सौंपेंगे। ग्रामीणों के आक्रोश का मुख्य कारण न्यायालय अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व)/नजूल अधिकारी कटनी द्वारा 23 जून 2026 को जारी किया गया एक आम इश्तहार है। इस नोटिस के माध्यम से ग्रामीणों को पता चला कि ग्राम सिमरा (नंबर 1), तहसील रीठी की कुल 12 खसरों की अविकसित शासकीय भूमि को औद्योगिक प्रयोजन के लिए एमआईडीसी औद्योगिक विकास निगम, क्षेत्रीय कार्यालय जबलपुर को आवंटित किया जाना प्रस्तावित है। विवादित भूमि में खसरा क्रमांक 434, 689, 490, 851, 667, 433, 685, 493, 676, 491, 857 और 492 शामिल हैं। यह कई टुकड़ों में कुल मिलाकर करीब 34 हेक्टेयर से अधिक की भूमि है, जिसका हस्तांतरण किया जा रहा है। कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि आवंटन के लिए प्रस्तावित भूमि के खसरा क्रमांक 490 और 689 पर ग्रामीण पिछले कई वर्षों से पक्के और कच्चे मकान बनाकर परिवार सहित निवास कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त, शेष खसरों की भूमि का उपयोग पूरे गांव के लोग अपने मवेशियों को चराने और सार्वजनिक निस्तार (दैनिक उपयोग) के लिए करते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस भूमि के आवंटन से उनके मकान और मवेशियों के निस्तार का संकट गहरा जाएगा। यह भूमि उद्योग विभाग को दे दी गई, तो ग्रामीणों के सामने रहने और मवेशियों को पालने का बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा।
तहसील में दर्ज कराई आपत्ति ग्रामीणों ने बताया कि इस संबंध में उन्होंने 6 जुलाई 2026 को रीठी तहसील कार्यालय पहुंचकर सामूहिक रूप से लिखित आपत्ति दर्ज कराई है। ग्रामीणों का कहना है कि इस आवंटन से न केवल उनका भविष्य अंधकारमय होगा, बल्कि गांवों के स्थानीय विकास कार्य भी पूरी तरह बाधित हो जाएंगे। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि इस शासकीय भूमि को औद्योगिक प्रयोजन के लिए आवंटित करने का प्रस्ताव तुरंत निरस्त किया जाए। टीम को मौके पर भेज कराएंगे निरीक्षण इस संबंध में कटनी कलेक्टर आशीष तिवारी ने बताया कि टीम भेजकर मौके का निरीक्षण कराया जाएगा। पूरी जांच प्रक्रिया के बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
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उद्योग विभाग को भूमि सौंपने का विरोध:रीठी की दो पंचायतों के ग्रामीण कलेक्ट्रेट पर डटे, आश्वासन के बाद माने
