![]()
सुकमा के मिनपा में 79वें स्वतंत्रता दिवस पर बदली हुई तस्वीर देखने को मिली। कभी माओवादियों के मजबूत गढ़ के रूप में पहचाने जाने वाले इस इलाके में ग्रामीणों ने अपने घरों और स्कूली बच्चों ने स्कूल परिसर में तिरंगा फहराया। एक समय ऐसा था जब यहां राष्ट्रीय पर्व मनाना भी चुनौतीपूर्ण माना जाता था और ग्रामीण तिरंगा फहराने से डरते थे। मिनपा लंबे समय तक माओवादी प्रभाव वाले क्षेत्र के रूप में जाना जाता रहा। सड़क, बिजली और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी के बीच ग्रामीण भय के माहौल में जीवन बिताते थे। स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्वों पर स्कूल भवनों में अक्सर काले झंडे फहराए जाते थे। ऐसे में तिरंगा फहराना ग्रामीणों के लिए जोखिम भरा माना जाता था। सुरक्षा बलों के लिए भी रहा चुनौतीपूर्ण इलाका मिनपा में सुरक्षा बलों के लिए भी लंबे समय तक हालात चुनौतीपूर्ण रहे। वर्ष 2013 में सुरक्षा बल जब इलाके में कैंप स्थापित करने पहुंचे थे, तब माओवादियों ने उन पर हमला किया था। विधानसभा चुनाव के दौरान मतदान कराने पहुंची पोलिंग पार्टी को भी माओवादियों ने निशाना बनाया था। 2020 में मुठभेड़ में शहीद हुए थे 17 जवान 21 मार्च 2020 को मिनपा एक बड़े माओवादी हमले के कारण राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया था। माओवादियों की मौजूदगी की सूचना पर डीआरजी और एसटीएफ की संयुक्त टीम तलाशी अभियान पर निकली थी। जवानों के पहुंचते ही घात लगाए माओवादियों ने हमला कर दिया। मुठभेड़ में 17 जवान शहीद हो गए थे। माओवाद का असर घटा तो बदला माहौल 31 मार्च 2026 तक बस्तर को माओवाद से मुक्त करने की तय समय-सीमा के बाद क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हुई और ग्रामीणों के बीच माओवादियों का डर कम होने लगा। इसी बदले माहौल का असर मिनपा में भी दिखाई दिया। 79वें स्वतंत्रता दिवस पर स्कूल परिसर में बच्चों ने तिरंगा फहराया और ग्रामीणों ने अपने घरों पर राष्ट्रीय ध्वज लगाया। कभी जिस इलाके में काला झंडा माओवादी प्रभाव का प्रतीक था, उसी धरती पर तिरंगा अब लोकतंत्र, आजादी और बदलते बस्तर की नई पहचान बनता दिखाई दिया।
Source link
कभी माओवादियों का गढ़ था मिनपा, अब घर-घर तिरंगा:स्कूलों से घरों तक शान से लहराया तिरंगा, कभी स्कूलों पर लहराते थे काले झंडे
