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केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत बिट्‌टू ने इस्तीफा दिया:राष्ट्रपति ने मंजूर किया, BJP ने राज्यसभा टिकट नहीं दी थी, पंजाब चुनाव लड़ेंगे




केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत बिट्‌टू ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वीकार कर लिया है। बिट्‌टू को कुछ समय पहले भाजपा ने राज्यसभा की टिकट नहीं दी थी, जिस वजह से वे अब सांसद नहीं थे। वे केंद्र सरकार में पंजाब से BJP के इकलौते राज्य मंत्री थे, उन्हें रेल राज्य और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग विभाग दिया गया था। वह पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय बेअंत सिंह के पोते हैं। अब बिट्‌टू अगले साल होने वाला पंजाब विधानसभा चुनाव लड़ सकते हैं। रवनीत बिट्‌टू ने लुधियाना से 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन वह हार गए थे। इसके बाद भाजपा ने उन्हें राजस्थान से राज्यसभा सांसद बनाया। इसके बाद 21 जून को कार्यकाल खत्म हो गया। इसके बाद भाजपा ने उनकी जगह अमृतसर से भाजपा नेता तरुण चुघ को राज्यसभा भेज दिया। हालांकि नियमों के मुताबिक बिट्‌टू बिना सांसद बने भी 6 महीने यानी 21 दिसंबर तक मंत्री बने रह सकते थे, लेकिन उन्होंने अचानक इस्तीफा दे दिया। राष्ट्रपति ने बिट्‌टू का इस्तीफा स्वीकार किया बिट्‌टू बोले- अब मेरा टाइम पंजाब के लिए है इस्तीफे को लेकर रवनीत बिट्‌टू ने कहा- मैंने 2–3 महीने पहले ही इस बारे में रिक्वेस्ट की थी। जिस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जालंधर आए थे, उस दिन भी मैंने ये बात कही। पिछले सेशन में भी मैं शामिल नहीं हुआ था। जिस दिन मेरी राज्यसभा की टर्म खत्म हुई, मैंने उसी दिन इस्तीफा दे दिया था। मैं कल फिर उनसे मिला था। अब मेरा टाइम पंजाब के लिए है। आज भी मैं कई जगहों पर गया था। अब मुझ पर पंजाब में सरकार बनाने की जिम्मेदारी है, मैं इसी काम पर लगा हूं। बेअंत सिंह की विरासत मिली, कांग्रेस से बगावत की रवनीत सिंह बिट्टू पंजाब की राजनीति में बेअंत सिंह परिवार की तीसरी पीढ़ी का चेहरा हैं। पूर्व CM बेअंत सिंह के पोते होने के कारण उन्हें शुरुआत से ही कांग्रेस की विरासत मिली। 2009 में आनंदपुर साहिब से लोकसभा पहुंचकर उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में एंट्री की। इसके बाद लुधियाना सीट से 2014 और 2019 में जीत दर्ज कर अपनी पकड़ बनाई। कांग्रेस में रहते हुए बिट्टू को पार्टी के आक्रामक और मुखर नेताओं में गिना जाता था। किसान आंदोलन, कानून-व्यवस्था और पंजाब से जुड़े मुद्दों पर वे खुलकर अपनी राय रखते रहे। 2021 में उन्हें लोकसभा में कांग्रेस का नेता भी बनाया गया, लेकिन पंजाब कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान और नेतृत्व विवादों के बीच उनका पार्टी से मोहभंग बढ़ता गया। 2024 लोकसभा चुनाव से पहले बिट्टू ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया। यह कदम पंजाब की राजनीति में बड़ा बदलाव माना गया, क्योंकि भाजपा को पहली बार एक मजबूत जट्ट सिख चेहरा मिला। हालांकि वे लुधियाना लोकसभा चुनाव हार गए, लेकिन भाजपा ने उन पर भरोसा जताते हुए उन्हें केंद्र सरकार में मंत्री बनाया था। खबर को हम लगातार अपडेट कर रहे हैं…



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