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केंद्रीय विद्यालय में कला उत्सव शुरू:‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ संभागीय कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ हुआ




केंद्रीय विद्यालय क्रमांक 2 जयपुर में सोमवार को कला उत्सव एवं ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के अंतर्गत दो दिवसीय संभागीय कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का आयोजन 10 एवं 11 अगस्त को किया जा रहा है। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को देश की विविध कला, संस्कृति, लोक परंपराओं एवं सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराते हुए उनमें राष्ट्रीय एकता, भाईचारे और सांस्कृतिक चेतना की भावना विकसित करना है। कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय प्रबंधन समिति के मनोनीत अध्यक्ष कर्नल पीयूष मिश्रा ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में सहायक आयुक्त दिनेश चंद मीणा उपस्थित रहे। अतिथियों का विद्यालय परिवार की ओर से स्वागत किया गया। कार्यक्रम के प्रारंभ में विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय संस्कृति की समृद्ध विविधता का परिचय दिया। ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना के अनुरूप इस आयोजन में विशेष रूप से त्रिपुरा एवं मिजोरम राज्यों की सभ्यता, संस्कृति, लोक परंपराओं, कला एवं जीवन शैली की मनोहारी झलक देखने को मिली। विद्यार्थियों ने इन राज्यों की पारंपरिक संस्कृति को अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से जीवंत किया। त्रिपुरा और मिजोरम की लोक एवं जनजातीय संस्कृति, पारंपरिक वेशभूषा, लोकगीत, नृत्य तथा सांस्कृतिक परंपराओं को विद्यार्थियों ने अत्यंत आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया। प्रस्तुतियों के माध्यम से राजस्थान सहित देश के अन्य भागों से आए विद्यार्थियों को पूर्वोत्तर भारत की विशिष्ट सांस्कृतिक विरासत को समझने और उससे जुड़ने का अवसर मिला। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि भाषा, वेशभूषा, खान-पान और लोक परंपराओं में भिन्नता होने के बावजूद भारत की आत्मा एक है। कार्यक्रम में जयपुर, कोटा, जोधपुर, अजमेर, अलवर एवं बीकानेर संकुलों से चयनित विद्यार्थी प्रतिभाग कर रहे हैं। दो दिवसीय इस संभागीय आयोजन में कुल 16 प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है। विभिन्न प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी कला, रचनात्मकता, कल्पनाशीलता एवं सांस्कृतिक प्रतिभा को प्रदर्शित करने का अवसर मिल रहा है। कार्यक्रम में समूह नृत्य, एकल नृत्य, समूह गान, एकल एवं समूह दृश्य कला, शास्त्रीय गायन, समूह ऑर्केस्ट्रा, थिएटर तथा पारंपरिक कहानी सहित विभिन्न विधाओं में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विभिन्न प्रस्तुतियों में भारतीय संस्कृति के अनेक रंग दिखाई दिए। विद्यालय के प्राचार्य प्रदीप कुमार टेलर ने अतिथियों, विभिन्न संकुलों से आए विद्यार्थियों एवं शिक्षकों का स्वागत करते हुए कहा कि ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि देश की विविधता में एकता की भावना को मजबूत करने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि भारत की अलग-अलग भाषाएँ, लोक परंपराएँ, कला एवं संस्कृतियाँ हमारी राष्ट्रीय पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसे आयोजनों के माध्यम से विद्यार्थी देश के विभिन्न क्षेत्रों की संस्कृति को नजदीक से समझते हैं तथा उनमें परस्पर सम्मान, सहयोग और भाईचारे की भावना विकसित होती है। मुख्य अतिथि कर्नल पीयूष मिश्रा ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि कला केवल प्रतिभा प्रदर्शन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह हमारी संस्कृति, परंपराओं और विरासत को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने विद्यार्थियों से प्रतियोगिताओं में पूरे उत्साह के साथ भाग लेने तथा स्वस्थ प्रतिस्पर्धा एवं अनुशासन की भावना बनाए रखने का आह्वान किया। विशिष्ट अतिथि सहायक आयुक्त दिनेश चंद मीणा ने भी विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि कला एवं सांस्कृतिक गतिविधियाँ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा पहचानने और उसे निखारने का मंच प्रदान करते हैं। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत समूह एवं एकल नृत्य, गायन, वाद्य संगीत, थिएटर और पारंपरिक कहानी ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। विशेष रूप से त्रिपुरा एवं मिजोरम की सांस्कृतिक झलक प्रस्तुत करने वाली प्रस्तुतियों में पूर्वोत्तर भारत की विशिष्ट लोक परंपराओं और सांस्कृतिक रंगों का सुंदर समावेश देखने को मिला। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों में पारंपरिक कला के साथ आधुनिक मंचीय प्रस्तुति का सुंदर समन्वय दिखाई दिया। रंग-बिरंगी वेशभूषा, लोक संगीत, नृत्य की आकर्षक मुद्राओं तथा प्रभावी मंचन ने कार्यक्रम को जीवंत बना दिया। दो दिवसीय यह आयोजन विद्यार्थियों में रचनात्मकता, आत्मविश्वास, सांस्कृतिक चेतना, सहयोग की भावना एवं राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। विभिन्न संकुलों से आए विद्यार्थियों और शिक्षकों में कार्यक्रम को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला।
कार्यक्रम ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि भारत की शक्ति उसकी विविधता में निहित है और विभिन्न संस्कृतियों का परस्पर सम्मान ही ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की वास्तविक भावना है।



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