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कोडरमा जिले के झुमरी तिलैया निवासी किशन संघाई गिर गायों के पालन के लिए इन दिनों काफी चर्चा में हैं। वे गुजरात की प्रसिद्ध गिर नस्ल की लगभग 20 गायों का पालन करते हैं और जिले के इकलौते A2 दूध उत्पादक हैं। 63 वर्षीय किशन संघाई एक सफल व्यवसायी होने के बावजूद गौ सेवा में सक्रिय रहते हैं। उन्होंने वर्ष 2023 में दो गिर गायों के साथ दूध का व्यवसाय शुरू किया था। आज उनके गौशाला में इस उत्तम नस्ल की करीब 20 गायें हैं। संघाई तापस के क्षेत्रों में लोहे के एक कुशल और प्रसिद्ध व्यापारी के रूप में जाने जाते हैं। वे लोहे के एंगल, सरिया और अन्य प्रकार के लोहे के सामान का उत्पादन और बिक्री करते हैं। 63 वर्ष की आयु में भी वे अपने लोहे के कारोबार के साथ-साथ गौ-पालन को भी बड़े उत्साह के साथ संभालते हैं। गोदाम स्थापित करते समय गौ-पालन की शुरुआत की
किशन संघाई ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2021 में झुमरीतिलैया के बिशुनपुर रोड पर एक नया गोदाम स्थापित करते समय गौ-पालन की शुरुआत की। वास्तु विशेषज्ञों ने उन्हें उस स्थान पर गौ-पालन की सलाह दी थी। शुरुआत में उनके मन में जर्सी गाय पालने का विचार आया, लेकिन बाद में उन्होंने गिर गायों को पालने का निर्णय लिया। इस निर्णय के बाद उन्होंने गिर गाय पालन से संबंधित विस्तृत जानकारी जुटाई। इसके बाद वे गुजरात गए और वहां से गिर नस्ल की दो गायें लेकर कोडरमा आए, जिससे उनके गौ-पालन की यात्रा शुरू हुई। वातावरण अनुकूल नहीं रहने के कारण शुरुआत में काफी कठिनाई हुई किशन संघाई ने बताया चूंकि गुजरात और कोडरमा के वातावरण अलग होने के कारण शुरुआत में गिर गाय को यहां पालने में काफी कठिनाई हुई। इस दौरान गुजरात से लाए गए दो गायों में से एक गाय की तबीयत कुछ ज्यादा ही बिगड़ने लगी। इसके बाद उन्होंने गाय को वापस गुजरात भेज दिया। जबकि एक अन्य गाय के प्रति समर्पण की भावना से उसकी सेवा करनी शुरू की। धीरे-धीरे वह गाय यहां के वातावरण के अनुकूल स्थिर हुई और इनमें गाय की संख्या बढ़ाने की हिम्मत जागी।
अब 20 गायों आए गौशाला की बढ़ रही शोभा किशन संघाई ने बताया कि सन।2023 में ये अन्य गिर नश्ल की गायों को लेकर यहां आए और उसका पालन शुरू किया। अब इनके गौशाले में गिर नश्ल की 20 गाएं हैं, जो पूरी तरह से स्वस्थ हैं। सालाना लाखों की होती है कमाई किशन संघाई ने बताया कि उनके गौशाले में मौजूद 20 गायों में मात्र 8 गाएं ऐसी हैं जो फिलहाल दूध दे रही हैं। इनसे कुल 70-80 लीटर प्रतिदिन दूध उत्पादन हो पा रहा है। उन्होंने बताया चूंकि इस नश्ल की गाएं बच्चा देने के बाद केवल 3 माह तक ही दूध देती हैं। इसलिए 20 गाएं होते हुए भी दूध का उत्पादन कम हो पाता है। उन्होंने बताया कि अगर सभी गाएं नियमित दूध दें तो इन्हें सालाना 6 से 7 लाख रुपए का बचत आसानी से हो जाता है। A2 दूध उत्पादन और बिक्री करने वाला एकमात्र गौशाला
बताते चलें कि गिर नश्ल की गाएं एक मात्र ऐसी गाएं होती हैं, जो A2 दूध का उत्पादन करती हैं। A2 दूध बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास के लिए काफी लाभकारी होता है। साथ ही साथ यह डायबिटीज और हाई ब्लड शुगर के रोगों को ठीक करने में काफी मददगार साबित होता है। यही कारण है कि A2 दूध का डिमांड स्थानीय स्तर पर काफी बढ़ता जा रहा है। किशन संघाई ने बताया कि इस दूध की बाजार मूल्य 130 से 140 रुपए प्रति किलो की है लेकिन ये इस दूध को मात्र 100 रुपए प्रति किलो की दर से ही बेच रहे हैं। इसके दूध से तैयार घी की है काफी कीमत
दरअसल, गिर गाय का दूध आसानी से उपलब्ध नहीं है। इसके दूध से तैयार शुद्ध घी की कीमत 4800 रुपए प्रति किलो है। बताते चलें कि 1 किलो घी बनाने में 30 किलो दूध की दरकार होती है।
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