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गुलाब सिद्धू-जैस्मिन भसीन पहुंचे अमृतसर के गोल्डन टेंपल:21 अगस्त को रिलीज होगी नई फिल्म जुदा, सफलता के लिए की अरदास




प्रसिद्ध पंजाबी गायक व अभिनेता गुलाब सिद्धू और जानी-मानी अभिनेत्री जैस्मिन भसीन आज सचखंड श्री दरबार साहिब (स्वर्ण मंदिर) पहुंचे। दोनों कलाकारों ने पवित्र गुरु घर में माथा टेका और अपनी आगामी पंजाबी फिल्म जुदा की सफलता के लिए वाहेगुरु के चरणों में अरदास की। इस दौरान उन्होंने ‘सरबत के भले’ की प्रार्थना की, पवित्र गुरबाणी कीर्तन का आनंद लिया और कुछ समय श्री दरबार साहिब की परिक्रमा में भी व्यतीत किया। पत्रकारों से बातचीत करते हुए गुलाब सिद्धू ने बताया कि उनकी यह नई फिल्म 21 अगस्त (2026) को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। फिल्म की पूरी टीम की मेहनत की सफलता के लिए वे गुरु घर का आशीर्वाद लेने आए हैं। सिद्धू ने साझा किया कि पंजाबी सिनेमा में बतौर मुख्य अभिनेता यह उनका डेब्यू (पहला कदम) है। उन्होंने ईमानदारी से स्वीकार किया कि शूटिंग के शुरुआती दिनों में उन्हें कैमरे के सामने अभिनय करने में थोड़ी झिझक और परेशानी हुई थी, लेकिन सह-कलाकारों के सहयोग से जल्द ही वह सहज हो गए। फिल्म में दोस्ती, लव स्टोरी और मां-बेटे का अटूट प्यार अपने किरदार का खुलासा करते हुए गुलाब सिद्धू ने बताया कि फिल्म में वह एक ऐसे बेटे की भूमिका निभा रहे हैं जो अपनी मां से बेहद प्यार करता है। उन्होंने कहा कि यह फिल्म केवल एक कहानी पर आधारित नहीं है, बल्कि इसमें दोस्ती, पारिवारिक भाईचारे और एक खूबसूरत लव स्टोरी के साथ-साथ दर्शकों के लिए भरपूर सस्पेंस भी देखने को मिलेगा। इस रोल के लिए उन्होंने अपने शारीरिक बदलाव पर भी बात की और बताया कि वजन कम करने के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की और रोजाना सुबह दौड़ (रनिंग) लगाया करते थे। सिद्धू मूसेवाला को याद कर छलका दर्द—”आने वाली पीढ़ियों को खलेगी कमी” बातचीत के दौरान दिवंगत पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला का जिक्र आने पर गुलाब सिद्धू बेहद भावुक नजर आए। उन्होंने नम आंखों से कहा कि सिद्धू मूसेवाला सिर्फ एक गायक नहीं, बल्कि एक बहुत बड़ा ग्लोबल स्टार था, जिसकी जगह कभी कोई नहीं ले सकता और उसकी कमी पूरी जिंदगी महसूस होती रहेगी। उन्होंने कहा कि मूसेवाला की कमी केवल उनके परिवार या करीबियों को ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी हमेशा खलेगी। अपनी आखिरी मुलाकात को याद करते हुए गुलाब सिद्धू ने बताया कि मूसेवाला की मौत से करीब 20 दिन से एक महीना पहले उनकी मुलाकात हुई थी। उन्होंने भावुक मन से कहा कि उनकी जिंदगी में सिद्धू मूसेवाला जैसे इंसान का आना भी गुरु महाराज की एक विशेष बख्शिश (कृपा) थी और आज वे जीवन के जिस मुकाम पर हैं, वहां तक पहुँचाने में गुरु की असीम कृपा और मूसेवाला का बड़ा योगदान रहा है।



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