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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के करीब एक साल बाद भी चंडीगढ़ में आवारा गोवंश की समस्या बनी हुई है। इस मामले को लेकर गौमाता सेवक राष्ट्रीय सनातन सेना भारत गौ रक्षा दल की चंडीगढ़ इकाई ने डिप्टी कमिश्नर नितिन यादव को आज पत्र लिखा है। संगठन ने आरोप लगाया है कि प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पूरी तरह पालन नहीं किया। साथ ही प्रशासन से आदेशों के अनुपालन और अब तक की गई कार्रवाई की पूरी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है। 7 बिंदुओं पर मांगी जानकारी डीसी को भेजे गए पत्र में संगठन ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के पालन को लेकर सात प्रमुख बिंदुओं पर जानकारी मांगी है। इनमें आदेशों के अनुपालन के लिए नियुक्त नोडल अधिकारी का नाम, सुप्रीम कोर्ट में दाखिल कॉम्प्लायंस रिपोर्ट की प्रति, विभिन्न विभागों को दी गई जिम्मेदारियों का विवरण, अब तक सड़कों से हटाए गए आवारा पशुओं का रिकॉर्ड, हेल्पलाइन व्यवस्था, समीक्षा बैठकों की जानकारी और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई का ब्यौरा शामिल है। RTI का हवाला देकर लगाए आरोप गौरक्षा दल के पंजाब एवं चंडीगढ़ प्रदेश अध्यक्ष रोहित शर्मा ने आरोप लगाया कि आरटीआई से मिली जानकारी में सामने आया है कि नगर निगम अब तक आवारा गायों को पकड़ने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार नहीं कर पाया है। संगठन का कहना है कि इससे पता चलता है कि समस्या के समाधान के लिए अब तक ठोस व्यवस्था नहीं बनाई गई है। रोहित शर्मा ने बताया कि लोगों की सुविधा के लिए संगठन ने अपनी ओर से एक हेल्पलाइन शुरू की है, ताकि घायल या आवारा गोवंश मिलने पर तुरंत सहायता उपलब्ध कराई जा सके। संगठन का दावा है कि यह व्यवस्था प्रशासनिक स्तर पर कमी को देखते हुए शुरू की गई है। मेडिकल ऑफिसर पर लगाया आरोप संगठन ने आरोप लगाया कि शुक्रवार रात एक आवारा गाय की सूचना देने के लिए मेडिकल ऑफिसर डॉ. समीर को कई बार फोन किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की। संगठन ने सवाल उठाया कि ऐसी स्थिति में आवारा गोवंश को पकड़ने और सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है।
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चंडीगढ़ में गौ-रक्षा दल का DC को पत्र:सुप्रीम कोर्ट के आदेश दरकिनार, नहीं सुधरी आवारा गोवंश की स्थिति; कार्रवाई का मांगा ब्यौरा
