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चंडीगढ़ सेक्टर-26 थाना क्षेत्र में चोरी का मामला दर्ज करने के बदले पांच लाख रुपये रिश्वत मांगने के आरोप में सीबीआई ने बापूधाम चौकी इंचार्ज इंस्पेक्टर सुरेश कुमार और एएसआई मंगत उर्फ मंगता को ढाई लाख रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। दोनों को सोमवार शाम को सीबीआई की टीम ने ट्रैप लगाकर पकड़ा। मामले में पुलिस विभाग के अन्य अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। वहीं नगर निगम के एक वरिष्ठ पार्षद की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। सीबीआई इस पहलू की अलग से जांच कर रही है। ज्वैलर के बेटे से मांगे 5 लाख सूत्रों के अनुसार बापूधाम निवासी निर्मल सिंह की ज्वेलरी की दुकान थी। कुछ समय पहले उनकी मौत हो गई थी। इसके बाद उनके बेटे सोनू ने कई दिन बाद दुकान खोली तो उसे काफी मात्रा में सोना गायब मिला। दुकान की चाबी एक महिला कर्मचारी के पास होने के कारण सोनू को उसी पर चोरी का संदेह हुआ। सोनू ने महिला कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई और चोरी का मामला दर्ज करने के लिए सेक्टर-26 थाने में शिकायत दी। आरोप है कि शिकायत पर कार्रवाई करने के बजाय पुलिसकर्मियों ने मामला दर्ज करने के बदले पांच लाख रुपये रिश्वत की मांग कर दी। शिकायत के बाद CBI ने बिछाया जाल रिश्वत की मांग से परेशान होकर शिकायतकर्ता ने सीबीआई से संपर्क किया। शिकायत की जांच के बाद सीबीआई ने ट्रैप की योजना बनाई। तय योजना के अनुसार शिकायतकर्ता को ढाई लाख रुपये लेकर आरोपियों के पास भेजा गया। जैसे ही इंस्पेक्टर सुरेश कुमार और एएसआई मंगत ने रिश्वत की रकम ली, सीबीआई की टीम ने दोनों को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया। सीबीआई ने दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसी अब यह भी पता लगा रही है कि रिश्वत की रकम किन-किन लोगों तक पहुंचनी थी और इस पूरे मामले में और कौन-कौन शामिल है। वरिष्ठ पार्षद की भूमिका भी जांच के दायरे में सूत्रों के मुताबिक इस पूरे मामले में चंडीगढ़ नगर निगम के एक वरिष्ठ पार्षद की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। बताया जा रहा है कि शिकायतकर्ता और पुलिस अधिकारियों के बीच बातचीत कराने में उनकी भूमिका रही। सीबीआई के पास शिकायतकर्ता और इंस्पेक्टर के बीच हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग भी मौजूद है। जांच एजेंसी अब पार्षद से भी पूछताछ कर सकती है। यदि जांच में उनकी भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। बड़े अधिकारियों की भूमिका की भी होगी जांच जांच के दौरान यह सवाल भी उठ रहा है कि एफआईआर दर्ज करने का अधिकार थाने के पास होता है, चौकी के पास नहीं। ऐसे में यह भी जांच की जाएगी कि चौकी स्तर पर शिकायतकर्ता से रिश्वत क्यों मांगी गई और इस पूरे मामले की जानकारी थाना स्तर के अधिकारियों को थी या नहीं। सीबीआई अब यह पता लगाने में जुटी है कि रिश्वत मांगने और लेने की इस साजिश में केवल दो पुलिसकर्मी शामिल थे या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क भी काम कर रहा था। जांच एजेंसी वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका, शिकायत पर हुई कार्रवाई और पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है। यदि जांच में अन्य अधिकारियों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। जीरो टॉलरेंस नीति पर टिकी निगाहें इस कार्रवाई के बाद पुलिस विभाग में चर्चा है कि क्या इस मामले में भी सख्त विभागीय कार्रवाई होगी। इससे पहले सेक्टर-39 थाना रिश्वत मामले में डीजीपी सागर प्रीत हुड्डा ने तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित एसएचओ का तबादला किया था। वहीं पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया भी पहले साफ कर चुके हैं कि पुलिस विभाग में रिश्वतखोरी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ऐसे में अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि इस मामले में पुलिस मुख्यालय आगे क्या कदम उठाता है।
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चंडीगढ़ में रिश्वत लेते इंस्पेक्टर और ASI गिरफ्तार:ज्वैलर के बेटे से मांगे 5 लाख, वरिष्ठ पार्षद की भूमिका भी जांच के दायरे में
