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चंडीगढ़ में 132 जलस्रोतों पर छोड़ी जाएंगी गंबूसिया मछलियां:मच्छरों का लार्वा खाएगी; सेक्टर-26 बटरफ्लाई पार्क से अभियान की शुरूआत




मलेरिया और डेंगू जैसी मच्छर जनित बीमारियों से बचाव के लिए चंडीगढ़ प्रशासन ने नया अभियान शुरू किया है। पशुपालन एवं मत्स्य विभाग ने वन विभाग और स्वास्थ्य विभाग के मलेरिया विंग के साथ मिलकर सेक्टर-26 स्थित बटरफ्लाई पार्क के जलस्रोत में गंबूसिया मछली के बच्चे छोड़े। इसके साथ ही शहर के अलग-अलग तालाबों और पानी के ठहरे हुए स्थानों में मच्छरों के लार्वा खाने वाली मछलियां छोड़ने का अभियान शुरू हो गया। इस अभियान के तहत चंडीगढ़ में 132 चिन्हित जगहों पर गंबूसिया मछलियां छोड़ी जाएंगी। यह काम 11 सितंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रशासन का मानना है कि इससे मच्छरों की संख्या को उनके पनपने के स्थान पर ही नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। रोज 100-300 मच्छरों लार्वा खा सकती है एक मछली गंबूसिया मछली को मच्छरों के लार्वा को नियंत्रित करने का प्राकृतिक और पर्यावरण के अनुकूल तरीका माना जाता है। विभाग के अनुसार एक गंबूसिया मछली एक दिन में करीब 100 से 300 मच्छरों के लार्वा खा सकती है। इससे पानी में मच्छरों के लार्वा की संख्या कम होती है और मच्छरों के पनपने पर रोक लगती है। खास बात यह है कि इस तरीके में मच्छरों को नियंत्रित करने के लिए रसायनों या कीटनाशकों का इस्तेमाल नहीं करना पड़ता। पशुपालन एवं मत्स्य विभाग की ओर से चंडीगढ़ में ऐसे 132 जलस्रोतों और तालाबों की पहचान की गई है, जहां मच्छरों के पनपने की संभावना रहती है। इन सभी स्थानों पर चरणबद्ध तरीके से गंबूसिया मछली छोड़ी जाएगी। अधिकारियों के अनुसार यह अभियान 11 सितंबर तक पूरा कर लिया जाएगा। इसका उद्देश्य मच्छरों की संख्या कम करने के साथ-साथ मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियों से बचाव के लिए पहले से जरूरी कदम उठाना है। सरकारी फार्म में तैयार की जाती मछली अभियान के तहत छोड़ी जा रही गंबूसिया मछलियों को सरकारी मछली बीज फार्म, चंडीगढ़ में तैयार किया जाता है। यह फार्म पशुपालन एवं मत्स्य विभाग के अधीन है। विभाग यहां नियमित रूप से गंबूसिया मछलियों का प्रजनन और पालन करता है। इसके बाद इन्हें ऐसे जलस्रोतों में छोड़ा जाता है, जहां पानी रुका रहता है और मच्छरों के लार्वा पनपने की संभावना होती है। यह अभियान पशुपालन एवं मत्स्य विभाग, वन विभाग और स्वास्थ्य विभाग के मलेरिया विंग ने मिलकर शुरू किया है। कार्यक्रम सचिव पशुपालन एवं मत्स्य विभाग प्रदीप कुमार के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया।



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