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सुखना लेक में पानी पहुंचाने वाली 3.4 किलोमीटर लंबी कांसल डाइवर्जन कैनाल की मजबूती को लेकर प्रशासन ने कदम उठाया है। कैनाल के कई हिस्सों में मिट्टी के कटाव की शिकायतों के बाद वेटलैंड अथॉरिटी ने इसकी विस्तृत इंजीनियरिंग और इकोलॉजिकल स्टडी को मंजूरी दी है। स्टडी के आधार पर संवेदनशील हिस्सों को मजबूत करने और मिट्टी के कटाव को रोकने के उपाय किए जाएंगे। कांसल डाइवर्जन कैनाल कैंबवाला एंट्री गेट से शुरू होकर नेपली की तरफ साकेतड़ी पुल तक करीब 3.4 किलोमीटर लंबी है। यह आसपास के कैचमेंट एरिया से आने वाले पानी को सुखना लेक तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाती है। ऐसे में कैनाल की मजबूती सीधे तौर पर सुखना लेक के जल प्रवाह से जुड़ी है। जानिए क्यों जरूरी है कांसल डाइवर्जन कैनाल का संरक्षण:- सुखना लेक के इकोलॉजिकल बैलेंस के लिए अहम कैनाल के संरक्षण से इसका ढांचा मजबूत होने के साथ सुखना लेक में मिट्टी और गाद जाने से भी रोकने में मदद मिलेगी। इससे लेक में पानी के प्रवाह और इकोलॉजिकल बैलेंस को बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।
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चंडीगढ़ सुखना लेक को पानी पहुंचाने वाली कैनाल पर संकट:मिट्टी कटाव से बढ़ी चिंता, इंजीनियरिंग-इकोलॉजिकल स्टडी को मंजूरी; नवंबर तक असेसमेंट
