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चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी के 116.84 करोड़ रुपये के कथित घोटाले में 7 महीने से फरार चल रहे नगर निगम के अकाउंटेंट अनुभव मिश्रा ने वीरवार को सीबीआई की विशेष अदालत में सरेंडर कर दिया। अदालत में पहुंचते ही सीबीआई ने उसे हिरासत में ले लिया और पूछताछ के लिए रिमांड की मांग की। सीबीआई ने अदालत को बताया कि घोटाले में अपनी भूमिका सामने आने और जांच एजेंसी के शिकंजे में आने की भनक लगने के बाद अनुभव मिश्रा देश छोड़कर थाईलैंड भाग गया था। सीबीआई के मुताबिक, आरोपी जांच शुरू होने के बाद लगातार एजेंसी से बचता रहा। उसे कई बार जांच में शामिल होने के लिए नोटिस भेजे गए, लेकिन वह पेश नहीं हुआ। पिछले सप्ताह अदालत ने उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए थे। इसके बाद सीबीआई उसकी तलाश और गतिविधियों पर नजर रख रही थी। जांच एजेंसी को उसके विदेश में होने की जानकारी भी मिल गई थी। सीबीआई ने अदालत में कहा कि जब आरोपी के पास बचने का कोई रास्ता नहीं बचा तो वह भारत लौट आया और अदालत में सरेंडर कर दिया। 7 दिन के रिमांड में होगी पूछताछ सीबीआई के वकील नरेंद्र सिंह ने अदालत में कहा कि अनुभव मिश्रा से घोटाले में उसकी भूमिका के साथ-साथ अन्य आरोपियों से उसके संपर्क और पैसों के लेनदेन के बारे में पूछताछ करनी है। जांच एजेंसी उसके मोबाइल फोन, वाट्सऐप चैट, कॉल डिटेल और ई-मेल से जुड़ी जानकारी की जांच करना चाहती है। इसके अलावा बैंक खातों और कथित फर्जी एफडी से जुड़े दस्तावेजों के बारे में भी पूछताछ की जाएगी। अदालत ने सीबीआई की दलीलों को स्वीकार करते हुए अनुभव मिश्रा को सात दिन के रिमांड पर भेज दिया। अब सीबीआई उससे पूछताछ कर घोटाले में उसकी वास्तविक भूमिका और दूसरे आरोपियों के साथ उसके संबंधों की जानकारी जुटाएगी। आउटसोर्स कर्मचारी बलि का बकरा बनाया अनुभव मिश्रा की ओर से अदालत में पेश हुए बचाव पक्ष के वकील ने सीबीआई के आरोपों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि मिश्रा नगर निगम का नियमित कर्मचारी नहीं, बल्कि आउटसोर्स कर्मचारी था। उसे घोटाले की पूरी जानकारी नहीं थी और उसे मामले में बलि का बकरा बनाया जा रहा है। बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि उसके खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों को लेकर सीबीआई के पास पर्याप्त आधार नहीं हैं। हालांकि अदालत ने बचाव पक्ष की दलीलों को स्वीकार नहीं किया और सीबीआई को सात दिन का रिमांड दे दिया। 116.84 करोड़ से जुड़ा पूरा मामला स्मार्ट सिटी घोटाला मार्च 2026 में सामने आया था। आरोप है कि फर्जी दस्तावेज तैयार कर आईडीएफसी बैंक में जमा स्मार्ट सिटी परियोजना की बड़ी रकम को गलत तरीके से निकाला गया। इसके बाद करोड़ों रुपये अलग-अलग खातों और कथित फर्जी कंपनियों में भेजे गए। जांच में यह भी सामने आया कि रकम का इस्तेमाल रियल एस्टेट में निवेश के लिए किए जाने का आरोप है। शुरुआत में इस मामले की जांच चंडीगढ़ पुलिस कर रही थी। बाद में मामला सीबीआई को सौंप दिया गया। सीबीआई अब पूरे वित्तीय लेनदेन की कड़ियां जोड़ने में जुटी है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि स्मार्ट सिटी परियोजना की इतनी बड़ी रकम तक एक आउटसोर्स कर्मचारी की पहुंच कैसे बनी। फर्जी एफडी बनाकर पैसे निकाले सीबीआई के अनुसार, आरोपियों ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में स्मार्ट सिटी परियोजना के नाम पर कथित तौर पर फर्जी सावधि जमा तैयार की। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर परियोजना के खाते से रकम निकाली गई। बाद में इस रकम को कथित शेल कंपनियों और दूसरे खातों में भेजा गया। जांच एजेंसी बैंक रिकॉर्ड में मिली विसंगतियों और अलग-अलग खातों में हुए लेनदेन की भी जांच कर रही है। सीबीआई यह पता लगाने में जुटी है कि रकम निकालने और ट्रांसफर करने की पूरी प्रक्रिया में कौन-कौन लोग शामिल थे और किसकी क्या भूमिका थी। बैंक अधिकारी से लगातार संपर्क में रहा सीबीआई ने अदालत में एक अहम दावा करते हुए कहा कि अनुभव मिश्रा और आईडीएफसी बैंक के अधिकारी तथा मामले के सह-आरोपी अभय कुमार के बीच लगातार बातचीत होती थी। जांच के दौरान दोनों के बीच हुई कई चैट भी सीबीआई के हाथ लगी हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, अनुभव मिश्रा का मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी स्मार्ट सिटी के बैंक खाते से भी जुड़ी मिली है। इसी आधार पर सीबीआई उससे बैंक अधिकारी के साथ हुई बातचीत, बैंक खाते से जुड़े काम और फर्जी एफडी तैयार करने की प्रक्रिया के बारे में पूछताछ करना चाहती है। डिजिटल सबूतों की जांच करेगी सीबीआई रिमांड के दौरान सीबीआई अनुभव मिश्रा के मोबाइल और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड की जांच करेगी। एजेंसी वाट्सऐप चैट, कॉल डिटेल, ई-मेल और कथित वित्तीय लेनदेन से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड को खंगालेगी। इसके अलावा बैंक में तैयार किए गए दस्तावेजों और अलग-अलग खातों में भेजी गई रकम के बारे में भी पूछताछ की जाएगी। सीबीआई का कहना है कि इन डिजिटल और बैंकिंग रिकॉर्ड से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि घोटाले की योजना किस स्तर पर बनाई गई थी और रकम को एक खाते से दूसरे खाते तक पहुंचाने में किन लोगों की भूमिका थी। थाईलैंड जाने की वजह जांचेगी एजेंसी सीबीआई अब यह भी पता लगाएगी कि अनुभव मिश्रा घोटाला सामने आने के बाद थाईलैंड कब गया, किसके संपर्क में था और विदेश जाने की पूरी व्यवस्था किसने की। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश करेगी कि विदेश में रहते हुए उसका मामले से जुड़े अन्य आरोपियों से संपर्क बना रहा या नहीं। सीबीआई के मुताबिक, अनुभव मिश्रा का सरेंडर मामले की जांच में महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकता है। सात दिन के रिमांड में उससे घोटाले की रकम, बैंक खातों, फर्जी एफडी, डिजिटल बातचीत और अन्य आरोपियों से संबंधों को लेकर पूछताछ की जाएगी।
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चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी घोटाला, अकाउंटेंट अनुभव मिश्रा का सरेंडर:7 माह से फरार, बचने के लिए थाईलैंड भागा,CBI ने 7 दिन के रिमांड पर लिया
