जालंधर में NHM मुलाजिमों का रोड पर प्रदर्शन:सिविल सर्जन दफ्तर से प्रेस क्लब तक निकाला रोष मार्च, प्रैस क्लब चौक में की नारेबाजी




जालंधर में स्वास्थ्य विभाग में नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) के तहत लगभग 20 सालों से ठेके पर काम कर रहे कच्चे सेहत मुलाजिमों की ओर से प्रदर्शन किया गया। सेहत मुलाजिम सड़कों पर उतरे और प्रैस क्लब चौक में सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
मुलाजिमों ने बताया कि 13 अगस्त 2026 से अपनी जायज मांगों को लेकर रोष प्रदर्शन जारी है। आम आदमी पार्टी की पंजाब सरकार पर अपने वादों से भागने का आरोप लगाते हुए बुधवार को एनएचएम के सभी कर्मचारी सड़कों पर उतर आए। कर्मचारियों ने पहले सिविल सर्जन दफ्तर में धरना प्रदर्शन करते हुए नारेबाजी की और इसके बाद डॉ. पंखुड़ी की अगुवाई में प्रेस क्लब तक रोष मार्च निकाला।
इस दौरान आम आदमी क्लीनिक सांझा फ्रंट के कर्मचारी भी कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने की मांग को लेकर इस रोष रैली में शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री भगवंत मान, वित्त मंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। जब तक मांगें पूरी नहीं होती, प्रदर्शन जारी रहेगा
यूनियन के मुख्य प्रवक्ताओं ने कहा कि जब तक सरकार कर्मचारियों की मांगें नहीं मानती, तब तक यह हड़ताल जारी रहेगी और संघर्ष को और तेज किया जाएगा। इस मौके पर जिला प्रोग्राम मैनेजर डॉ. सुखविंदर कौर, डॉ. सुमीत कपाही, सीएचओ सुखप्रीत कौर, डॉ. योगेश सचदेवा, परमवीर झमट, डॉ. पंकज, डॉ. गौरव और डॉ. सिलवरी मौजूद रहे। कर्मचारियों का कहना है कि पंजाब सरकार द्वारा टालमटोल की नीति अपनाने और मांगों को पूरा करने के लिए कोई स्पष्ट सकारात्मक प्रतिक्रिया न देने के कारण राज्य भर के एनएचएम कर्मचारियों में भारी रोष है। लगातार चल रहे धरने के कारण स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं, जिसकी जिम्मेदार पंजाब सरकार है। वहीं, सरकार की ओर से 2 सितंबर को यूनियन के मुख्य प्रवक्ताओं के साथ बैठक का समय दिया गया है। समान काम समान वेतन, ग्रेच्युटी, और उम्र सीमा में छूट की मांग
एनएचएम एम्प्लॉइज यूनियन पंजाब की 13 अगस्त से जारी इस हड़ताल के दौरान कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर अपना विरोध जताया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार उनकी मुख्य मांगों जैसे समान काम समान वेतन, ग्रेच्युटी, और उम्र सीमा में छूट को स्वीकार नहीं करती है, तो आने वाले समय में सरकार को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा और इसका जवाब कर्मचारी आगामी विधानसभा चुनावों में देंगे। प्रवक्ताओं ने साफ शब्दों में कहा कि यदि मांगों का जल्द समाधान नहीं हुआ, तो यूनियन द्वारा सरकार का हर मोड़ पर घेराव किया जाएगा।



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