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जेपीएससी में धांधली:अभय बोला- एक सीट की 40 से 60 लाख में डील, सबका हिस्सा तय




सीआईडी की पूछताछ में मास्टरमाइंड का खुलासा झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) परीक्षा में हुई गंभीर अनियमितता की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) के सामने फर्जीवाड़े के बड़े सिंडिकेट की परतें खुलती जा रही हैं। मामले में सीआईडी अब तक 19 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। जांच के दौरान मास्टरमाइंड अभय तिवारी से लगातार 10 दिनों तक पूछताछ की गई। पूछताछ में उसने कई अहम खुलासे किए हैं। सीआईडी सूत्रों के अनुसार, अभय तिवारी ने बताया कि परीक्षा में सफलता दिलाने के नाम पर प्रत्येक अभ्यर्थी से 40 से 60 लाख रुपए तक की डील होती थी। इस रकम में ऊपर से नीचे तक जुड़े लोगों का हिस्सा पहले से तय रहता था। पूछताछ में सामने आया कि पूरे खेल की साजिश अभय तिवारी ने रची थी। सबसे पहले उसने परीक्षा संचालन एजेंसी टीडीपीएल के दोनों निदेशकों और कुछ कर्मियों को अपने साथ जोड़ा। इसके बाद कथित तौर पर जेपीएससी के अधिकारियों को लालच देकर पूरा सिस्टम सेट किया गया। कितने अभ्यर्थी पास कराए गए, जांच जारी
मामले में अब भी कई बड़े रहस्य बने हुए हैं। आरोपी अभ्यर्थियों की सटीक संख्या और कुल वसूली गई रकम की पूरी जानकारी देने से बच रहे हैं। सीआईडी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस सिंडिकेट के जरिए कुल कितने अभ्यर्थियों को गलत तरीके से पास कराया गया। प्रारंभिक जांच के मुताबिक, प्रति अभ्यर्थी 40 से 60 लाख रुपए की डील हुई थी। इसमें बड़ी राशि अंतिम चयन के बाद ली जानी थी। सीआईडी को आशंका है कि जांच आगे बढ़ने पर जेपीएससी के कुछ और अधिकारी, अभ्यर्थी, कोचिंग संचालक और दलाल भी गिरफ्त में आ सकते हैं। पूर्व अध्यक्ष खियांग्ते का कंप्यूटर ऑपरेटर रिमांड पर, पूछताछ शुरू
सीआईडी ने आयोग के पूर्व अध्यक्ष ख्यांग्ते के कंप्यूटर ऑपरेटर धर्मेंद्र कुमार को रिमांड पर लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। जांच एजेंसी को उम्मीद है कि परीक्षा संचालन और परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया में हुई कथित गड़बड़ियों से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आ सकते हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीआईडी शुक्रवार को इस केस के तीन अन्य आरोपियों को भी पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ कर सकती है। मास्टरमाइंड का रिश्तेदार हिरासत में
महेशमुंडा (गिरिडीह)| जेपीएससी परीक्षा में कथित अनियमितता की जांच के सिलसिले में गुरुवार तड़के सीआईडी की टीम गिरिडीह के बेंगाबाद पहुंची। टीम ने स्थानीय पुलिस के सहयोग से थाना क्षेत्र के एक गांव में कार्रवाई की। बताया जाता है कि टीम मामले के कथित मास्टरमाइंड अभय तिवारी उर्फ मनोज तिवारी के एक रिश्तेदार के घर पहुंची। पूछताछ के बाद उसे हिरासत में लेकर रांची लौट गई। हालांकि, हिरासत में लिए गए व्यक्ति की पहचान और कार्रवाई को लेकर पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। स्थानीय पुलिस भी मामले में कुछ भी बताने से इनकार कर रही है। सूत्रों के अनुसार, जेपीएससी-जेएसएससी बहाली में कथित गड़बड़ी की जांच के दौरान मिले कुछ इनपुट के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। सीआईडी पहले ही इस मामले में 19 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है और जांच जारी है। प्रशासनिक कार्य ठप… बिना अध्यक्ष 16 दिनों से चल रहा आयोग
जेपीएससी में पिछले 16 दिनों से अध्यक्ष का पद खाली है। 21 जुलाई को एल. खियांग्ते के इस्तीफे के बाद अब तक राज्य सरकार ने नए अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए प्रक्रिया शुरू नहीं की हैआयोग के वरीयतम सदस्य को कार्यवाहक (प्रभारी) अध्यक्ष का प्रभार देने की दिशा में भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इधर, विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की सीआईडी जांच चल रही है। ऐसे में आयोग में महत्वपूर्ण प्रशासनिक और वैधानिक कार्य लगभग ठप हैं। फिलहाल केवल जरूरी और रूटीन काम ही किए जा रहे हैं। हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा… जेपीएससी में अध्यक्ष का पद खाली क्यों?
झारखंड हाईकोर्ट में गुरुवार को वन विभाग में रिक्त पदों पर नियुक्ति से संबं​धित जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत में जेपीएससी की ओर से बताया गया कि असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट और रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर की मुख्य परीक्षा का परिणाम जारी हो चुका है। अभ्यर्थियों की शारीरिक जांच की तिथि भी तय कर दी गई है, पर जेपीएससी अध्यक्ष के इस्तीफे के कारण नियुक्ति प्रक्रिया नहीं बढ़ पा रही है। इस पर अदालत ने नाराजगी जताई। अदालत ने राज्य सरकार से पूछा कि लंबे समय से जेपीएससी अध्यक्ष जैसे महत्वपू्र्ण संवैधानिक पद पर नियुक्ति क्यों नहीं की गई। इतना लंबे समय तक अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं होना कितना उचित है। अदालत ने महाधिवक्ता को राज्य सरकार से निर्देश लेकर शपथपत्र के माध्यम से जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त को निर्धारित करते हुए अदालत ने पूछा है कि नए अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए सरकार ने अब तक क्या कदम उठाए हैं।



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