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जैसलमेर ने पूरे किए 871 साल, राजमहल में फहराया ध्वज:स्थापना दिवस पर चैतन्यराज सिंह बोले- विरासत बचाना हम सबकी जिम्मेदारी




जैसलमेर ने सोमवार को अपने इतिहास के 871 साल पूरे कर लिए हैं। इस खास और पावन मौके पर सोनार किले के राजमहल में 871वां स्थापना दिवस बहुत ही धूमधाम, परंपराओं और राजसी अंदाज के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत भाटी राजवंश की कुलदेवी मां स्वांगिया माता और शहर को बसाने वाले महारावल जैसल देव जी की पूजा-अर्चना के साथ हुई। इसके बाद राजमहल की छत पर जैसलमेर के पुराने रियासतकालीन झंडे की पूजा की गई। पूर्व राजपरिवार के सदस्य चैतन्यराज सिंह, दुष्यंत सिंह और केसरी सिंह ने मिलकर ध्वजारोहण किया और पूरे जिले की सुख-समृद्धि व अच्छी सेहत की प्रार्थना की। पूर्व महारावल का संदेश: स्वच्छता और संरक्षण पर दें ध्यान स्थापना दिवस पर पूर्व राजपरिवार सदस्य चैतन्यराज सिंह ने सभी शहरवासियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि जैसलमेर का इतिहास अदम्य साहस, वीरता और स्वाभिमान से भरा रहा है। हमारा शहर हमेशा से देश की सीमा पर मजबूती से डटकर खड़ा रहा है। 1965 और 1971 की जंग में भी इस क्षेत्र की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण रही थी। पर्यटन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जैसलमेर आज पूरी दुनिया में अपनी अलग पहचान बना चुका है। इसे और खूबसूरत और मजबूत बनाने के लिए सभी लोगों को सफाई, पुरानी सांस्कृतिक धरोहरों को बचाने और बेहतर व्यवस्थाओं पर खुद ध्यान देना होगा। 1156 में रखी गई थी जैसलमेर की नींव जैसलमेर की शुरुआत तत्कालीन महारावल जैसल सिंह ने साल 1156 (विक्रम संवत 1212) में की थी। उत्तर दिशा से होने वाले विदेशी हमलों को रोकने के कारण भाटी राजवंश को ‘उत्तरभड़ किवाड़’ की बड़ी उपाधि मिली। यह शहर अपने ढाई साके, महान शूरवीरों और वीरांगनाओं के त्याग के लिए जाना जाता है। अलाउद्दीन खिलजी और फिरोजशाह तुगलक जैसे राजाओं के हमलों के बावजूद जैसलमेर ने अपनी पहचान और शान हमेशा बरकरार रखी। सिल्क रूट का केंद्र और आधुनिक विकास पुराने जमाने में सिल्क रूट (व्यापारिक रास्ते) पर होने की वजह से जैसलमेर व्यापार का बड़ा केंद्र बना। इसी वजह से यहां पीले पत्थरों की नक्काशीदार हवेलियां, मशहूर सोनार किला और सुंदर छतरियां बनीं। आधुनिक समय में तत्कालीन महारावल जवाहर सिंह (1914-1948) के दौर में विकास के काम तेजी से हुए। साल 1939 में यहां टेलीफोन सुविधा शुरू हुई। पोकरण तक ट्रेन आई, जो 1968 में जैसलमेर से जुड़ी।



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