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झज्जर शहर की धर्म मार्केट में मोबाइल सेफ के नाम पर लोगों को ठगने का मामला सामने आया है। दिल्ली निवासी आसीम असली मोबाइल दिखाकर ग्राहकों का भरोसा जीतता था और मोबाइल सेफ के नाम पर पैसे लेने के बाद डिलीवरी के समय बाक्स में मोबाइल की जगह कांच का पत्थर रखकर दे देता था। आरोपी भोले-भाले लोगों और प्रवासी मजदूरों को अपना सॉफ्ट टारगेट बनाकर यह खेल कर रहा था। मामले का खुलासा तब हुआ, जब आरोपी दोबारा धर्म मार्केट पहुंचा और स्थानीय लोगों ने उसे पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। असली मोबाइल दिखाकर बनाता था भरोसा जानकारी के अनुसार आसीम पहले ग्राहक को असली मोबाइल दिखाता था। मोबाइल पसंद आने के बाद वह ग्राहक से मोबाइल सेफ के नाम पर पैसे लेता और इसके बाद काले रंग के चैन वाले बाक्स में मोबाइल की डिलीवरी करता था। ग्राहक जब बाक्स खोलता तो उसमें मोबाइल की जगह कांच का पत्थर मिलता था। प्रवासी मजदूर को भी लगाया चूना इसी तरीके से धर्म मार्केट में एक प्रवासी मजदूर को भी चूना लगाया गया। आरोपी भोले-भाले लोगों और प्रवासी मजदूरों को आसान शिकार समझकर उनसे मोबाइल का सौदा करता था। असली मोबाइल दिखाने के कारण ग्राहक को उस पर शक नहीं होता था। दूसरी बार झज्जर पहुंचा तो लोगों को हुआ शक स्थानीय लोगों के मुताबिक आरोपी सप्ताह में दूसरी बार झज्जर पहुंचा था। दोबारा धर्म मार्केट में दिखाई देने पर कुछ लोगों को उस पर शक हो गया। लोगों ने उसकी गतिविधियों पर नजर रखी और संदिग्ध लगने पर उसे मौके पर ही पकड़ लिया। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस आरोपी को थाने ले गई सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और आसीम को अपने साथ थाने ले गई। पुलिस अब उससे पूछताछ कर रही है। पूछताछ में यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि वह अब तक कितने लोगों को इसी तरीके से ठग चुका है और इस काम में उसके साथ कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल है या नहीं। बाक्स खोलते ही सामने आ जाता था पूरा खेल आरोपी का पूरा तरीका ऐसा था कि ग्राहक के सामने पहले असली मोबाइल दिखाकर भरोसा कायम किया जाता था। भुगतान लेने के बाद काले रंग के चैन वाले बाक्स में सामान दिया जाता था। बाक्स खोलने पर मोबाइल की जगह कांच का पत्थर मिलने से ग्राहक को ठगी का पता चलता था। लोगों के पकड़ने के बाद अब पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है।
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झज्जर में असली मोबाइल दिखाकर बेचा कांच-पत्थर:असली मोबाइल दिखाकर लोगों को देता था भरोसा, बाक्स में मोबाइल की जगह थमाता था कांच का पत्थर; प्रवासी मजदूर भी बना शिकार
