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भास्कर न्यूज | सीतामढ़ी जिले में संभावित गर्मी, लगातार बढ़ते तापमान से संभावित जल संकट को देखते हुए डीएम रिची पांडेय की अध्यक्षता में परिचर्चा भवन में पीएचईडी और विद्युत विभाग के काम की प्रगति की समीक्षा हुई। बैठक में प्रखंड और वार्ड स्तर पर चल रही पेयजल योजनाओं की जांच में सामने आया कि कई जगह काम अपेक्षित गति से नहीं चल रहा है। डीएम ने निर्देश दिया कि सभी छूटे टोलों में पेयजल योजनाएं सर्वोच्च प्राथमिकता पर अविलंब पूरी कराई जाएं। बैठक में बोरिंग की स्थिति, पाइपलाइन काम की अद्यतन प्रगति, गृह जल संयोजन की समीक्षा हुई। डीएम ने कहा कि किसी भी हालत में आमजन को पेयजल संकट का सामना नहीं करना चाहिए। इसके लिए संबंधित पदाधिकारी और कार्यकारी एजेंसियां सीधे जवाबदेह होंगी। डीएम ने कार्यकारी एजेंसियों को चेतावनी दी कि अनावश्यक विलंब, लापरवाही, उदासीनता स्वीकार नहीं होगी। जिन एजेंसियों की प्रगति असंतोषजनक मिली, उनसे तत्काल स्पष्टीकरण लेने का निर्देश दिया गया। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई होगी। डीएम ने निर्देश दिया कि हर प्रखंड में काम कर रही टीमों की संख्या बढ़ाई जाए। अतिरिक्त मानव संसाधन लगाया जाए। अतिरिक्त मशीनरी लगाई जाए। सभी प्रखंडों से प्रतिदिन अद्यतन प्रगति प्रतिवेदन देने को कहा गया, ताकि सतत निगरानी हो सके, जवाबदेही तय हो सके। पहले से जल संकट प्रभावित क्षेत्रों की अलग से समीक्षा हुई। डीएम ने कहा कि ऐसे प्रखंडों में योजनाओं के क्रियान्वयन में शिथिलता गंभीरता से ली जाएगी। बैठक में अपर समाहर्ता आपदा प्रबंधन बृज किशोर पांडेय, पीएचईडी के कार्यपालक अभियंता, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी कमल सिंह, विद्युत कार्यपालक अभियंता, विभाग के सभी कनीय अभियंता, विभिन्न कार्यकारी एजेंसियों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। सीतामढ़ी में पेयजल की स्थिति चुनौतीपूर्ण है। भूमिगत जल स्तर में भारी गिरावट और नल-जल योजनाओं में तकनीकी खामियों के कारण ग्रामीण इलाकों में भीषण जल संकट पैदा होता रहता है। हालात से निपटने के लिए प्रशासन टैंकरों से पानी की आपूर्ति की जाती रही है, जबकि शहरी क्षेत्रों में सुधार के लिए अमृत-2 योजना शुरू की गई है। जानकार बताते हैं कि परिहार, सोनबरसा, बथनाहा, बाजपट्टी, और डुमरा जैसे प्रखंडों में हर साल गर्मियों में भू-जल स्तर खतरनाक रूप से नीचे चला जाता है। कई जगहों पर चापाकल सूख गए हैं और लोगों को पीने के पानी के लिए मीलों दूर जाना पड़ता है। सरकारी दावों के बावजूद, कई ग्रामीण इलाकों (विशेषकर परिहार और सोनबरसा के कुछ हिस्सों) में नल-जल योजनाएं खराब पड़ी हैं या ग्रामीणों के घरों तक पानी नहीं पहुंच रहा है। साथ ही खराब योजनाओं और चापाकलों की मरम्मत के लिए त्वरित अभियान भी चलाए जा रहे हैं। नगर निगम क्षेत्र में स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार की अमृत-2 योजना पर काम चल रहा है। लगभग 118 करोड़ की लागत से सभी 46 वार्डों में पाइपलाइन बिछाकर शुद्ध पेयजल पहुंचाने की परियोजना अंतिम चरण में है। भू-जल के स्तर की सटीक निगरानी और भविष्य की चुनौतियों का आकलन करने के लिए बथनाहा जैसे प्रखंडों में सेंसर युक्त अन्वेषण कुओं का निर्माण भी शुरू किया गया है।
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डीएम ने दी चेतावनी, छूटे टोलों में पेयजल योजना तुरंत पूरी करें
