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डॉ. अनिमा का गोस्सनर कॉलेज में योगदान, विभावि में डॉ. जमाल से मांगा रिलीविंग लेटर




जेपीएससी… एक ही दिन सदस्य पद से इस्तीफा, पर योगदान के नियम अलग, जेपीएससी सदस्य पद से दोनों‍ ने दिया था इस्तीफा शिक्षक दिवस शुक्रवार को है। इस अवसर पर देशभर में शिक्षकों के सम्मान में विविध एक्टिविटी आयोजित की जाएगी। शिक्षकों के बीच झारखंड की उच्च शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक सवाल सुर्खियों में है। क्या एक ही संवैधानिक संस्था से लौटने वाले दो शिक्षकों के लिए योगदान की प्रक्रिया अलग-अलग हो सकती है? मामला झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) के तीन सदस्यों के इस्तीफे के बाद अपने मूल शैक्षणिक संस्थानों में लौटने का है। आयोग में नियुक्ति से जुड़ी गड़बड़ियों और उठे विवादों के बीच तीनों सदस्यों ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया था। इनमें डॉ. जमाल अहमद और डॉ. अनिमा हांसदा हैं, जो झारखंड के विश्वविद्यालयों से जुड़े शिक्षक हैं, जबकि डॉ. अजीता भट्टाचार्य यूपी के उच्च शिक्षण संस्थान की हैं। डॉ. अनिमा हांसदा रांची यूनिवर्सिटी से संबद्ध गोस्सनर कॉलेज में टीचर हैं। आयोग सदस्य पद से इस्तीफा स्वीकार होने के बाद उन्होंने अपने मूल संस्थान में योगदान कर दिया। दूसरी ओर डॉ. जमाल अहमद विनोबा भावे विश्वविद्यालय के संत कोलंबा कॉलेज के शिक्षक हैं, लेकिन उनका मूल संस्थान में योगदान से संबंधित आवेदन अब तक लंबित है। योगदान के लिए रिलीविंग का होना जरूरी
डॉ. जमाल अहमद की योगदान प्रक्रिया इसलिए अटकी हुई है, क्योंकि आयोग सदस्य पद से इस्तीफा के बाद जेपीएससी द्वारा जारी किया जाने वाला रिलीविंग लेटर अभी तक कॉलेज प्रबंधन और विभावि को प्राप्त नहीं हुआ है। इसी दस्तावेज के अभाव में उनके मूल संस्थान में योगदान की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई है। क्या संवैधानिक पद से त्यागपत्र स्वीकार होने के बाद मूल शैक्षणिक संस्थान में लौटने के लिए अलग से रिलीविंग लेटर अनिवार्य है? मेरा सवाल प्रक्रिया को लेकर है
मैंने अपने मूल संस्थान विभावि के संत कोलंबा कॉलेज में योगदान के लिए आवेदन दिया है। आयोग सदस्य के पद से त्यागपत्र मंजूर हो चुका है, लेकिन योगदान की प्रक्रिया रिलीविंग लेटर के कारण लंबित है। सवाल यह है कि यदि आयोग के दूसरे सदस्य के मामले में बिना रिलीविंग के मूल संस्थान में योगदान की प्रक्रिया पूरी हो सकती है, तो मेरे मामले में इसे अनिवार्य क्यों माना जा रहा है? यदि रिलीविंग लेटर अनिवार्य है तो इसका स्पष्ट नियम या प्रावधान बताया जाना चाहिए। – डॉ. जमाल अहमद, पूर्व सदस्य, जेपीएससी



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