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किसी ने बैसाखी के सहारे जिंदगी की मुश्किलें पार कीं, तो किसी ने कृत्रिम पैर के सहारे चलना सीखा। उदयपुर के बड़ी स्थित रविवार को जब ‘सेवा महातीर्थ’ में 50 जोड़ों ने एक-दूसरे का हाथ थामकर सात फेरे लिए, तो उनकी दिव्यांगता बहुत पीछे छूट गई। नारायण सेवा संस्थान के 47वें दिव्यांग और निर्धन सामूहिक विवाह समारोह में देश के अलग-अलग राज्यों से आए 100 वर-वधू शादी के बंधन में बंध गए। वैदिक मंत्रोच्चार और मंगल गीतों के बीच इन नवदंपतियों ने अपने नए जीवन की शुरुआत की। इस सामूहिक विवाह की सबसे भावुक बात यह रही कि कई दूल्हा-दुल्हन ऐसे थे, जिनका कभी इसी संस्थान में मुफ्त इलाज, ऑपरेशन या पुनर्वास हुआ था। इलाज के दौरान जो लोग कभी लाचार होकर यहां पहुंचे थे, वे रविवार को सज-धजकर दूल्हा-दुल्हन बने। वे मुस्कुराते हुए अपने जीवनसाथी के साथ नए सफर पर निकल पड़े। दया नहीं, सम्मान और आत्मनिर्भरता संस्थान के अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने बताया कि देश में करीब 2.61 करोड़ दिव्यांगजन हैं। उन्हें आज भी समाज में कई तरह के पूर्वाग्रहों का सामना करना पड़ता है। इस विवाह समारोह की खास बात यह भी रही कि कुछ जोड़ों में एक साथी दिव्यांग है तो दूसरा पूरी तरह सक्षम। उन्होंने सामाजिक सोच से ऊपर उठकर एक-दूसरे का साथ चुना है। संस्थान का मकसद दिव्यांगों को दया नहीं, बल्कि सम्मान और सुरक्षित भविष्य देना है। 22 सालों में 2,582 जोड़ों का घर बसाया प्रशांत अग्रवाल ने बताया कि पिछले 22 वर्षों में संस्थान के माध्यम से 2,582 दिव्यांग युवक-युवतियों के विवाह संपन्न कराए जा चुके हैं। यह केवल शादी का आयोजन नहीं है, बल्कि दिव्यांगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की एक बड़ी कोशिश है।
स्वतंत्रता सेनानी परिवार की सुशीला परिहार सम्मानित दो दिवसीय इस समारोह में देश-विदेश से आए अतिथियों और संतों ने नवदंपतियों को आशीर्वाद दिया। इस मौके पर जोधपुर के स्वतंत्रता सेनानी परिवार की सुशीला परिहार को उनकी सेवा भावना के लिए सम्मानित किया गया। शादी के बाद नए जोड़ों को अपना घर बसाने के लिए जरूरी सामान भी दिया गया। समारोह में संस्थापक कैलाश मानव, सहसंस्थापिका कमला देवी अग्रवाल, वंदना अग्रवाल, यश मेहता और पलक अग्रवाल भी मौजूद रहे।
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दिव्यांगता को पीछे छोड़ 50-जोड़ों ने शुरू की नई जिंदगी:नारायण सेवा संस्थान के सामूहिक विवाह में थामा एक-दूसरे का हाथ; गृहस्थी का पूरा सामान मिला
