Headlines

ध्वजारोहण के साथ शुरू हुआ श्री ब्रह्मोत्सव महापर्व:रजत वाहन पर निकली श्री रामानुज स्वामीजी की भव्य सवारी; वैदिक अनुष्ठानों से गूंजा छत्रीबाग




इंदौर के छत्रीबाग स्थित पावन सिद्धधाम श्री लक्ष्मी वेंकटेश देवस्थान में शुक्रवार से सप्त दिवसीय श्री ब्रह्मोत्सव एवं रथयात्रा महोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। ध्वजारोहण, वैदिक अनुष्ठानों, महाभिषेक और संत प्रवचनों के बीच आरंभ हुए इस उत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। प्रातःकाल “वेंकटरमण गोविंदा, श्रीनिवास गोविंदा” नाम-जप परिक्रमा और शृंगार आरती के बाद दक्षिण भारतीय वैदिक परंपरा के अनुसार गरुड़ ध्वजा का पूजन एवं आरोहण किया गया। नागोरिया पीठाधीश्वर स्वामी श्री विष्णुप्रपन्नाचार्यजी महाराज के सान्निध्य में दक्षिण भारत से पधारे विद्वान आचार्यों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ अनुष्ठान संपन्न कराया। गरुड़ ध्वजा को स्वर्ण स्तंभ पर स्थापित कर विशेष भोग अर्पित किया गया। आयोजकों के अनुसार गरुड़ ध्वजारोहण का उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं से रक्षा, वातावरण की शुद्धि तथा उत्सव के निर्विघ्न संपन्न होने की मंगलकामना करना है। वैष्णव परंपरा में इसे ब्रह्मोत्सव का सबसे महत्वपूर्ण प्रारंभिक अनुष्ठान माना जाता है। ध्वजारोहण के साथ अंकुरारोपण, कंकणधारण, विद्वत वरण तथा सप्तदिवसीय यज्ञ का शुभारंभ भी किया गया। यजमान रमेश चितलांगया परिवार के संकल्प के साथ रजत कलशों की सहस्त्रधारा से श्री रामानुज स्वामीजी महाराज का महाभिषेक संपन्न हुआ। इस दौरान स्वर्ण एवं रजत पुष्पों से विशेष अर्चना की गई। संतों ने दिया भक्ति और शरणागति का संदेश संत सभा में स्वामी विष्णुप्रपन्नाचार्यजी महाराज ने कहा कि भगवान के उत्सवों में सहभागिता ही सच्ची भक्ति का स्वरूप है। उन्होंने श्रद्धालुओं से मंदिर परिसर में सांसारिक चिंताओं को छोड़कर प्रभु चिंतन और नाम-स्मरण में समय बिताने का आग्रह किया। युवराज स्वामी माधवप्रपन्नाचार्यजी महाराज ने आचार्य परंपरा की महत्ता बताते हुए कहा कि गुरु ही भक्त को भगवान के चरणों तक पहुंचाने का माध्यम होते हैं, इसलिए आचार्य के प्रति श्रद्धा और आज्ञापालन वैष्णव जीवन का आधार है। इस अवसर पर अयोध्या से पधारे श्री अनंताचार्य स्वामीजी और मुमुक्षरामजी महाराज ने भी श्रद्धालुओं को आशीर्वचन प्रदान किए। सायंकालीन सत्र में श्री रामानुज स्वामीजी की भव्य सवारी रजत वाहन पर निकाली गई। वेणुगोपाल संस्कृत पाठशाला के विद्यार्थियों के वैदिक पाठ और सीहोर से आए भजन गायक हर्षित शास्त्री की प्रस्तुति ने भक्तिमय वातावरण बना दिया। श्रद्धालु भजन-कीर्तन के बीच झूमते हुए प्रभु की परिक्रमा में शामिल हुए। उत्सव के पहले दिन विशेष शृंगार में भगवान वेंकटेश बर्फीली घाटी और शेषनाग की छत्रछाया में विराजमान दिखाई दिए। कृत्रिम हिमवर्षा और जलधाराओं से सुसज्जित यह अलौकिक दृश्य श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहा।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *