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पंजाब के गुरदासपुर में मनरेगा कर्मचारियों और राज्य सरकार के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई है। पिछले 6 महीने से वेतन न मिलने और नौकरी से निकाले जाने के आदेशों के विरोध में मनरेगा कर्मचारियों ने पंचायत भवन में पंजाब सरकार के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने सरकार की नीतियों को ‘तानाशाही’ करार देते हुए अपना संघर्ष तेज करने की चेतावनी दी है। जिला गुरदासपुर मनरेगा कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष संदीप सिंह ने प्रदर्शन के दौरान सरकार के रवैये की कड़ी निंदा की। यूनियन नेताओं का आरोप है कि कर्मचारी लंबे समय से अपनी सेवाएं नियमित (Regular) करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार ने उनकी मांगें पूरी करने के बजाय उन्हें नौकरी से निकालने का एकतरफा और तानाशाही फरमान जारी कर दिया है। यूनियन अध्यक्ष संदीप सिंह और बलविंदर कौर ने बताया कि सरकार मनरेगा कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाकर, उनकी जगह दूसरे विभागों के कर्मचारियों को ट्रेनिंग दे रही है, जो कि पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है। कर्मचारियों के इस तीखे रुख को देखते हुए आने वाले दिनों में पंजाब सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। अब देखना यह होगा कि सरकार इस मामले पर क्या संज्ञान लेती है। सरकार की दोहरी नीति पर उठाए सवाल प्रदर्शनकारियों ने सरकार की नीयत और उसकी दोहरी नीतियों पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। यूनियन नेताओं के मुताबिक, पंजाब सरकार एक तरफ तो राज्य में मनरेगा को लागू न करने की बातें कर रही थी, वहीं दूसरी तरफ इसे जल्दबाजी में लागू करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। वेतनमान तय होने तक जारी रहेगा संघर्ष: सोमवार से आंदोलन होगा तेज कर्मचारियों का कहना है कि वे पिछले 6 महीने से बिना वेतन के काम कर रहे हैं, जिससे उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। संदीप सिंह ने पंजाब सरकार को दोटूक चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक सरकार मनरेगा कर्मचारियों का स्थायी वेतनमान तय नहीं करती और छंटनी के आदेश वापस नहीं लेती, तब तक यह विरोध प्रदर्शन थमेगा नहीं। आने वाले सोमवार से इस संघर्ष को और अधिक उग्र व तेज किया जाएगा।”
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पंजाब में मनरेगा कर्मियों को निकाला जाएगा:प्रदेश सरकार से आदेश जारी, गुरदासपुर में प्रदर्शन, 18 साल बाद सेवा समाप्त होने से रोष
