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पाकिस्तान में सिख गुरुद्वारा गिराया:बलूचीस्तान की घटना, धार्मिक स्थल की जगह पर बनाया जा रहा मॉल, सिख समुदाय ने जताया रोष




पाकिस्तान के बलूचिस्तान में ऐतिहासिक गुरुद्वारा साहिब को गिरा दिया गया है। अब इस जगह पर एक मॉल का निर्माण किया जा रहा है।
बलूचिस्तान सिख सभा के अनुसार, यह पाकिस्तान में सिख धार्मिक विरासत के विनाश और उसके धीरे-धीरे मिटाए जाने का चिंताजनक उदाहरण है। पाकिस्तान के सिख समुदाय मिली जानकारी के अनुसार, बलूचिस्तान में कभी 12 गुरुद्वारा साहिब हुआ करते थे, जिनमें से अब केवल 2 ही बचे हैं। वहीं पूरे पाकिस्तान में भी ऐतिहासिक सिख धार्मिक स्थलों की संख्या लगातार घटती जा रही है। गुरुद्वारा साहिब केवल कोई इमारत या जमीन का टुकड़ा नहीं है।
यह सिख पंथ के इतिहास, आस्था, संघर्ष और बलिदानों से जुड़ा पवित्र स्थान था। गुरुद्वारा साहिब को ध्वस्त कर उसके स्थान पर बिजनेस मॉल का निर्माण करना सिख विरासत और धार्मिक भावनाओं का अपमान है। इस मुद्दे के उठाते हुए बीजेपी के नेशनल स्पोक्सपर्न ने कहा कि मैं से पुरजोर आग्रह करता हूं कि श्री अकाल तख्त साहिब तत्काल पाकिस्तान सरकार के समक्ष यह मामला उठाए और मांग करे कि गुरुद्वारा साहिब के विध्वंस की पूर्ण एवं स्वतंत्र जांच कराई जाए।
मॉल का तत्काल निर्माण रुकना चाहिए
आरपी सिंह ने कहा कि गुरुद्वारा साहिब की भूमि पर हो रहे किसी भी व्यावसायिक निर्माण को तत्काल रोका जाए। ऐतिहासिक गुरुद्वारा परिसर का पुनर्निर्माण, संरक्षण और पुनर्स्थापन सुनिश्चित किया जाए। बलूचिस्तान और पूरे पाकिस्तान में बचे हुए सभी गुरुद्वारों एवं सिख धार्मिक संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। गुरुद्वारा ध्वस्त करने और उसके बाद व्यावसायिक निर्माण कराने के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाए। भारत सरकार पहले ही फ़ारूकाबाद स्थित 125 वर्ष पुराने गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा साहिब के हालिया विध्वंस की कड़ी निंदा कर चुकी है, इसे “अत्यंत निंदनीय और लक्षित तोड़फोड़” बताते हुए उसके पुनर्स्थापन की मांग की है। अकाल तख्त साहिब से मामले में संज्ञान लेने की अपील इस मामले में अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार से संज्ञान लेने की अपील की गई। एक्स पोस्ट कर आरपी सिंह ने लिखा कि इस गंभीर मामले का तत्काल संज्ञान लेते हुए पाकिस्तान में सिख धार्मिक विरासत के विनाश के खिलाफ कड़ा और स्पष्ट बयान जारी करें।
अगर आज ऐतिहासिक गुरुद्वारों को ध्वस्त किया जाएगा और कल उसी स्थान पर मॉल खड़े कर दिए जाएंगे, तो दुनिया मूकदर्शक बनकर नहीं रह सकती।
यह केवल किसी इमारत को बचाने का सवाल नहीं है।
यह सिख इतिहास, विरासत और पहचान को बचाने का सवाल है।
यह निशान साहिब और गुरु साहिबान की पवित्र स्मृतियों को संरक्षित करने का सवाल है।
अकाल तख्त साहिब को बोलना चाहिए।
पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।



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