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पापा-टीचर्स कहते थे-पढ़ो खेल से कुछ नहीं होगा, बैठे रहोगे:क्रिकेट में रुचि, सेपकटकरा खिलाड़ी बने; एशियन गेम्स में पहली बार मेडल जीतने वाले बॉबी की कहानी




एशियन गेम्स-2026 में भारत ने 85 पदक अपने नाम किए। इनमें एक पदक सेपक टकरा में भी आया, जहां भारतीय टीम ने ब्रॉन्ज मेडल जीता। इस टीम का हिस्सा बिहार के खिलाड़ी बॉबी कुमार भी रहे। अपने पहले ही एशियन गेम्स में देश के लिए पदक जीतने वाले बॉबी के लिए यह उपलब्धि गर्व का पल है। बॉबी ने शुरुआत गली-मोहल्लों में सेपक टकरा खेलकर की। परिवार और स्कूल में उन्हें रोक-टोक का सामना करना पड़ा। पिता और टीचर्स कहते थे- पढ़ाई करोगे, तभी कुछ बनोगे। खेल में कुछ नहीं रखा है। इसके बावजूद बॉबी ने अपनी रुचि जारी रखी। अब बिहार सरकार में सब-इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत बॉबी का लक्ष्य इससे आगे बढ़कर अगले एशियन गेम्स में देश के लिए गोल्ड मेडल जीतना है। दैनिक भास्कर ने बॉबी कुमार से खास बातचीत की… पहले ही एशियन गेम्स में मेडल जीतना गर्व की बात बॉबी कुमार ने कहा, बेहद खुशी है कि मैंने भारत के लिए मेडल जीता। यह पहला एशियन गेम्स था और पहली ही बार में पदक जीतने का मौका मिला। देश के लिए मेडल जीतना उनके गर्व की बात है। जापान में अपने अनुभव को लेकर बॉबी ने बताया, वहां मौसम और समय के अंतर की वजह से उन्हें काफी परेशानी हुई। जापान भारत से करीब तीन घंटे आगे है। ऐसे में परिवार से फोन पर बात करना भी आसान नहीं था। जब माता-पिता फोन करते थे, तब वहां रात के 1-2 बज जाते थे और कई बार वह उनसे बात नहीं कर पाते थे। 13 साल की उम्र में पहली बार देखा था सेपकटकरा बॉबी ने कहा, जब वह करीब 13 साल के थे, तब पहली बार उन्होंने सेपकटकरा खेलते हुए कुछ लड़कों को देखा था। उनके घर के पास ही एक मैदान था, जहां बच्चे यह खेल खेलते थे। उस समय उन्हें इस खेल के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। खेल देखने और खेलने में उन्हें मजा आता था, इसलिए वह भी इसमें शामिल हो गए। इससे पहले मुझे क्रिकेट में भी दिलचस्पी थी। मोहल्ले के दूसरे बच्चों के साथ क्रिकेट खेलता था, लेकिन धीरे-धीरे सेपकटकरा के प्रति लगाव बढ़ता गया। पिता कहते थे- पढ़ाई करो, खेल से कुछ नहीं होगा बॉबी के लिए खेल को करियर बनाना आसान नहीं था। जब उन्होंने सेपकटकरा खेलना शुरू किया तो उनके पिता उन्हें खेलने से रोकते थे। बॉबी कुमार बताते हैं, मेरे पिता गांव में खुद भी फुटबॉल खेलते थे।उस वक्त खेल को लेकर बिहार में सुविधाएं नहीं थीं। ना ही माहौल था इसलिए पापा डरते थे कि मैं स्पोर्ट्स में अपना करियर बर्बाद कर रहा हूं। पापा मुझे कहते थे पढ़ाई पर ध्यान दो और कुछ बनो। बिहार में लोग पढ़ाई को ही सब कुछ मानते हैं। वे कहते थे कि खेल से कुछ होने वाला नहीं है। मेरी मम्मी भी मुझे खेलने से मना करती थी कहती थी कि पापा गुस्सा होते हैं। धीरे-धीरे जब मैं मेहनत करने लगा और इसमें कामयाबी मिली तो पापा को भी लगा कि मैं सही दिशा में जा रहा हूं। वह भी मुझे सपोर्ट करने लगे। टीचर कहते थे- पढ़ेगा नहीं, तो कुछ नहीं होगा यहां तक पहुंचने के अपने सफर के बारे में बात करते हुए बॉबी कहते हैं, मुझे कई लोगों से बातें सुनने को भी मिली। स्कूल में टीचर कहते थे कि पढ़ेगा नहीं, तो कुछ नहीं होगा। मोहल्ले के लोग भी बोलते थे कि मैं क्या करता हूं, बस खेलते ही तो हूं। यह सभी बातें सुनकर मुझे बुरा तो जरूर लगता था लेकिन मैं यही सोचता था कि अपना भी टाइम आएगा, मेरी मेहनत पूरी दुनिया देखेगी। ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ योजना से बने सब इंस्पेक्टर बॉबी कुमार की खेल उपलब्धियों का असर उनके करियर पर भी पड़ा। बिहार सरकार की ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ योजना के तहत उन्हें सब इंस्पेक्टर (SI) की नौकरी मिली है। इसके लिए उन्होंने बिहार सरकार का आभार जताया। ‘ब्रॉन्ज से संतुष्ट नहीं, अगला लक्ष्य गोल्ड’ एशियन गेम्स में जीता ब्रॉन्ज मेडल बॉबी के लिए देश को दिया गया एक तोहफा है, लेकिन वह इसे अपनी अंतिम मंजिल नहीं मानते। उनका कहना है कि “मेरे लिए ब्रॉन्ज मेडल कोई मंजिल नहीं है। मैंने यह अपने देश के लिए जीता है, लेकिन मेरा लक्ष्य गोल्ड मेडल है।” बॉबी ने कहा कि वह अगले एशियन गेम्स के लिए और ज्यादा मेहनत करेंगे और गोल्ड मेडल जीतकर देश का तिरंगा सबसे ऊंचा करने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ेंगे। SAI में हुआ सिलेक्शन उसके बाद बदली किस्मत बॉबी को शुरुआती दौर में उन्हें बेहतर प्रशिक्षण और खेल सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ा था, क्योंकि बिहार में संसाधनों की कमी थी। 2018 से बिहार सरकार ने उन्हें इस खेल में आगे बढ़ाने के लिए सहयोग देना शुरू किया। उनका चयन भारतीय खेल प्राधिकरण यानी SAI के प्रशिक्षण केंद्र में हुआ। वहां उन्हें बेहतर खेल सुविधाएं मिलीं। उन्होंने बिहार की टीम के साथ जूनियर, सब-जूनियर और सीनियर स्तर की प्रतियोगिताओं में पदक जीते। बिहार की टीम ने जूनियर नेशनल प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक भी हासिल किया। बॉबी तीन बार विश्व चैंपियनशिप में हिस्सा ले चुके हैं। इसके बाद उन्होंने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 2 दिन पहले बॉबी कुमार को सम्मानित किया था। सीएम ने कहा था, बॉबी ने बिहार के साथ-साथ पूरे देश का मान बढ़ाया है। एशियन गेम्स में बिहार के अबतक 3 खिलाड़ी जीत चुके पदक एशियन गेम्स में अबतक बिहार के 3 खिलाड़ी देश के लिए पदक जीत चुके हैं। 2006 में दोहा एशियन गेम्स में भारतीय कबड्‌डी टीम ने स्वर्ण पदक जीता था। उस समय प्रदेश के राजीव कुमार टीम के सदस्य थे। 2010 में चीन में हुए एशियन खेल में सोना जीतने वाली टीम में मोकामा की स्मिता कुमारी शामिल थीं। 2014 में साउथ कोरिया में संपन्न प्रतियोगिता की ट्रैप शूटिंग टीम स्पर्धा में भारत को कांस्य पदक मिला था। टीम में वर्तमान में राज्य की खेल मंत्री श्रेयसी सिंह भी शामिल थीं।



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