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पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से चली आ रही अंदरूनी खींचतान को खत्म करने के लिए पार्टी हाईकमान ने अब संगठन के जिला स्तर तक सीधे निगरानी शुरू कर दी है। पंजाब कांग्रेस प्रभारी और ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) के महासचिव सचिन पायलट जिला कांग्रेस प्रधानों के साथ सीधे संवाद कर रहे हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, जिला प्रधानों को प्रदेश के किसी गुट के बजाय सीधे प्रभारी को संगठन की जमीनी स्थिति की रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है। पायलट ने जिला प्रधानों को एक साथ बड़ी संख्या में बुलाने के बजाय 4-4 के ग्रुप में दिल्ली बुलाकर बैठकें शुरू की हैं। इन बैठकों में संबंधित जिलों के संगठन की स्थिति, हलका इंचार्जों की सक्रियता, नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल और आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर तैयारियों का फीडबैक लिया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार पायलट ने जिला प्रधानों को साफ संदेश दिया है कि संगठन में किसी भी नेता को व्यक्तिगत खेमेबाजी के बजाय पार्टी के फैसलों के अनुसार काम करना होगा। पार्टी के भीतर यह संदेश दिया जा रहा है कि जिला संगठन किसी नेता विशेष के राजनीतिक खेमे के तौर पर काम नहीं करेगा। सूत्रों का यह भी दावा है कि जो नेता खुले तौर पर गुटबाजी को बढ़ावा देगा या संगठनात्मक अनुशासन के खिलाफ जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, ऐसे नेताओं को तत्काल पार्टी से बाहर करने की कोई चेतावनी नहीं दी गई। जानिए, पायलट की सीधी निगरानी क्यों जरूरी हुई? कांग्रेस का संदेश- व्यक्ति नहीं, संगठन पहले पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस अब जनता के बीच यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि पार्टी के भीतर मतभेदों को पीछे छोड़कर संगठन एकजुट होकर चुनावी मैदान में उतरेगा। पायलट की रणनीति का एक अहम हिस्सा जिला और विधानसभा स्तर तक संगठन को सीधे हाईकमान की निगरानी में सक्रिय करना बताया जा रहा है। फिलहाल वड़िंग प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बने हुए हैं और चन्नी कैंपेन कमेटी की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। दोनों नेताओं के बीच जिम्मेदारियों और राजनीतिक प्रभाव को लेकर पुरानी प्रतिस्पर्धा पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
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पायलट ने सीधे जिला प्रधानों से मांगी ग्राउंड रिपोर्ट:पंजाब कांग्रेस की गुटबाजी में शामिल न होने का संदेश दे रहे, संगठनात्मक कार्रवाई की चेतावनी
