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पार्षद टिकट के लिए बढ़ी दावेदारी:पाली में भाजपा के 276 आवेदन; कांग्रेस का टफ फॉर्मेट बना परेशानी




पाली जिले में निकाय चुनाव में पार्षद बनने के लिए भाजपा और कांग्रेस में कार्यकर्ताओं की दावेदारी बढ़ गई है। दोनों पार्टियों में बड़ी संख्या में आवेदन जमा हो चुके हैं और कई कार्यकर्ता अपने परिवार के सदस्यों को भी चुनाव लड़ाने की तैयारी कर रहे हैं। कांग्रेस में आवेदन के लिए स्कैनर से ऑनलाइन फॉर्म भरने और जयपुर से ओके कराने की प्रक्रिया होने से कार्यकर्ताओं को थोड़ी परेशानी हो रही है, जबकि भाजपा में आवेदन को लेकर उत्साह है। 31 अगस्त तक नामांकन होंगे और नाम वापसी के बाद 4 सितंबर को चुनाव चिन्ह आवंटित किए जाएंगे। इसके बाद ही तय होगा कि किसे पार्टी का टिकट मिला और कौन बागी होकर निर्दलीय मैदान में उतरेगा। कांग्रेस का टफ फॉर्मेट बना परेशानी का सबब दोनों पार्टियां ऑनलाइन आवेदन भी ले रही हैं, लेकिन कांग्रेस का आवेदन फॉर्म भरने का तरीका कार्यकर्ताओं के लिए थोड़ा मुश्किल बना हुआ है। कांग्रेस की ओर से एक स्कैनर जारी किया गया है। इसे स्कैन करने पर ऑनलाइन फॉर्मेट खुलता है, जिसे भरना होता है। यह आवेदन आगे कांग्रेस की जयपुर टीम तक पहुंचता है। वहां से ओके होने के बाद उसकी फोटो कॉपी पार्षद का चुनाव लड़ने के इच्छुक कार्यकर्ता को जिलास्तर पर आवेदन जमा करते समय लगानी होती है। इसके साथ ही नगर निकाय की एनओसी, वोटर आईडी, पहचान पत्र, भाग संख्या और पहचानकर्ता की पूरी जानकारी भी देनी होती है। कांग्रेस की ओर से यह प्रक्रिया इसलिए रखी गई है ताकि बाद में आवेदन में किसी तरह की कमी नहीं रहे और प्रशासन की टीम जब नामांकन फॉर्म की जांच करे तो किसी कमी के कारण आवेदन रिजेक्ट न हो। कांग्रेस- फॉर्म रिजेक्ट न हो, इसलिए पूरी जानकारी भरवा रहे कांग्रेस जिलाध्यक्ष शिशुपाल सिंह राजपुरोहित ने बताया कि पार्षद का चुनाव लड़ने के इच्छुक प्रत्याशी को पहले ऑनलाइन आवेदन भरना होता है। जयपुर से आवेदन ओके होने के बाद उसकी एक कॉपी जिलास्तर पर आवेदन जमा करवाते समय साथ लगानी होती है। जिले की सभी निकायों से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता आवेदन कर रहे हैं। भाजपा- फॉर्म भरने को लेकर कार्यकर्ताओं में उत्साह भाजपा जिलाध्यक्ष सुनील भंडारी ने कहा कि कार्यकर्ता आवेदन भरने को लेकर काफी उत्साहित हैं। सभी निकायों से अच्छी संख्या में आवेदन भरे जा रहे हैं। पार्टी किस प्रत्याशी को टिकट देती है, यह आवेदन की जांच और पार्टी स्तर पर निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा।



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