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25 साल के इरशाद शेख दिल्ली के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में एडमिट हैं। चेहरे और आंख पर जख्म के निशान हैं। गुरुग्राम में नौकरी करने वाले इरशाद 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर चल रहे प्रोटेस्ट में गए थे। तभी पुलिस ने भीड़ को रोकने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। इरशाद ने महसूस किया कि उनकी पीठ जल रही है। सीने, गले और चेहरे पर घाव हैं। उनसे खून टपक रहा था। आरोप है कि रैपिड एक्शन फोर्स के एक जवान ने पैलेट गन चलाई, जिससे इरशाद जख्मी हो गए। मैं 23 जुलाई को इरशाद से मिलने हॉस्पिटल पहुंची। ENT डिपार्टमेंट में उनका इलाज चल रहा है। डिपार्टमेंट के गेट पर खड़े सिक्योरिटी गार्ड ने मुझे रोक दिया। कई बार कोशिश करने के बाद मैं इरशाद तक पहुंच गई। उस वक्त डॉक्टर कमरे में मौजूद थे। बातचीत के दौरान इरशाद ने अपना मोबाइल नंबर दिया और कहा कि आप मुझे सीधे मैसेज कर दीजिए। फिर फोन पर हमारी बात हुई। इरशाद ने कहा कि मैं उनसे मिलूं। हॉस्पिटल स्टाफ ने इरशाद से मिलने से रोका मैं दोबारा हॉस्पिटल पहुंची, तो गार्ड और स्टाफ ने मुझे फिर रोक दिया। इरशाद ने दो बार अस्पताल स्टाफ से कहा कि वह मुझसे मिलना चाहते हैं। इसके बावजूद मुझे अंदर नहीं जाने दिया गया। कहा कि आप बाहर बैठिए। मैंने कहा- इरशाद ने बुलाया है। गार्ड ने जवाब दिया- नहीं बुलाया है। कुछ देर बार बोला- रुकिए मैं पूछता हूं। इसी दौरान एक शख्स स्टाफ के साथ आए। वे खुद को गवर्नमेंट एम्पलाई बता रहे थे। उन्होंने स्टाफ से कहा कि इरशाद से किसी को न मिलने दिया जाए। कुछ देर बाद इरशाद ने फोन पर कहा कि मैं अपने सवाल वॉट्सऐप पर भेज दूं। समझ नहीं आया कि इरशाद खुद मिलना चाहते थे, तब उनसे क्यों नहीं मिलवाया गया। ये अस्पताल प्रशासन का फैसला था या सुरक्षा एजेंसियों का या किसी और का, इसका जवाब नहीं मिला। मैं अस्पताल के बाहर इंतजार करती रही। कुछ देर बाद इरशाद का एक दोस्त बाहर आया। उसने दावा किया कि केंद्र सरकार में मंत्री जेपी नड्डा इरशाद से मिलने आए थे। उसी के बाद इरशाद के आसपास सख्ती बढ़ी है। कुछ देर बाद इरशाद का फोन आया। उन्होंने बताया कि अब मेरी हालत ठीक है। पढ़िए पूरी बातचीत… सवाल: क्या आपको पैलेट गन से चोट लगी है? जवाब: हां। मेरे चेहरे और दाहिनी कंधे पर 40 से ज्यादा पैलेट्स लगे हैं। सवाल: उस दिन क्या हुआ था? जवाब: मैं करीब 3:30 बजे कनॉट प्लेस पहुंचा। वहां से जंतर-मंतर की तरफ चला गया। उधर पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स के जवान थे। अचानक उन्होंने लाठीचार्ज शुरू कर दिया। हम लोग पीछे की तरफ भागे। प्रदर्शन कर रहे सभी लोग नई उम्र के थे। तभी जवानों ने टियर गैस दागना शुरू कर दिया। सभी कनॉट प्लेस की तरफ आ गए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि हम आतंकवादी नहीं हैं। हम यहां अपनी मांगें लेकर आए हैं। वे सभी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का नारा लगा रहे थे। मैंने देखा कि रैपिड एक्शन फोर्स के एक जवान ने अपनी गन हमारी तरफ तान दी। हमें लगा कि डराने के लिए ऐसा कर रहा है। तभी फायर की आवाज सुनाई दी। मेरी बायीं आंख, चेहरे और कंधे पर गोली के छर्रे धंस गए। शरीर से खून बहने लगा। उस वक्त मैं होश में था। आसपास मौजूद लोगों ने खून रोकने की कोशिश की। एक स्कूटी रोककर मुझे लेडी हॉर्डिंग हॉस्पिटल के इमरजेंसी वार्ड में एडमिट किया। सवाल: क्या आपको मेडिकल रिपोर्ट नहीं मिली है? जवाब: मैंने रिपोर्ट मांगी थी। बताया गया कि अभी इलाज और सर्जरी की प्रोसेस चल रही है। इसलिए फिलहाल पूरी रिपोर्ट नहीं दी जा सकती। डिस्चार्ज के वक्त रिपोर्ट दे देंगे। सवाल: जेपी नड्डा आपसे मिलने आए थे, उनसे क्या बात हुई? जवाब: उन्होंने मेरा नाम-पता पूछा। फिर कहा कि मैं प्रदर्शन में क्यों शामिल था। मैंने उन्हें बताया कि मैं छोटे भाई-बहनों के भविष्य के लिए वहां गया था। फिर उन्होंने कहा, तुम्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है। तुम जल्द ही ठीक हो जाओगे। सवाल: क्या अभिजीत दीपके या उनके किसी साथी ने आपसे बात की है? जवाब: नहीं, मेरा उनसे कोई संपर्क नहीं है। मैं किसी पार्टी का समर्थन नहीं करता। मेरा मकसद था कि हम अपनी आवाज उठा सकें और सरकार के सामने मांगें रख सकें। सवाल: अपने साथ हुए हादसे पर क्या कहेंगे? जवाब: मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरे साथ ऐसा होगा। इसके बाद भी मुझे कोई पछतावा नहीं है कि मैं वहां गया। मैं यह सोचकर नहीं गया था कि मेरे साथ ऐसा कुछ होगा। अगर फिर मौका मिला, तो मैं दोबारा वहां जाऊंगा। सवाल: यानी आप खुद को इस आंदोलन का हिस्सा मानते हैं? जवाब: जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन का हिस्सा बना रहूंगा। सवाल: आपने कहा था कि मैं आपकी दोस्त बनकर मिलने आ सकती हूं। डायरेक्टर के सामने आपने कहा कि मुझे जानते ही नहीं हैं। ऐसा क्यों? जवाब: नहीं, ऐसी बात नहीं थी। अस्पताल के अधिकारियों ने कहा था कि किसी को भी मुझसे मिलने न दिया जाए। मैंने कहा था कि कोई दोस्त आए तो मिल सकता है, लेकिन मुझे बताया गया था कि उसे फोन जमा कराना होगा। मेरा इलाज चल रहा है, इसलिए मुझे भी हॉस्पिटल के नियम मानने पड़ेंगे। सवाल: आप नर्वस दिख रहे थे। क्या आपके ऊपर कोई सरकारी दबाव है? जवाब: कोई दबाव नहीं है। यहां मैं अकेला पेशेंट नहीं हूं। और भी मरीज हैं। उनकी प्राइवेसी का ध्यान रखना है। मुझे किसी ने डराया-धमकाया नहीं है। सवाल: दिल्ली पुलिस ने कहा है कि प्रोटेस्ट के दौरान पैलेट गन इस्तेमाल नहीं हुई हैं। इस पर क्या कहेंगे? जवाब: मैं भी दावे के साथ नहीं कह सकता, लेकिन ये उसी तरह की चीज है। अगर पैलेट गन इस्तेमाल होती है, तो उसके पार्टिकल्स बॉडी में घुस जाते हैं। यही मेरे साथ हुआ है। दिल्ली पुलिस या फिर सरकार ने भले इसे नहीं माना, लेकिन मुझे लगता है कि ये पैलेट गन हो सकती है। सवाल: सरकार से क्या कहना चाहेंगे?
जवाब: अगर पैलेट गन पर बैन है, तो कैसे इस्तेमाल हो सकती है। इसकी जांच होनी चाहिए कि कौन इसे इस्तेमाल कर रहा है। पैलेट गन का दावा सच निकला तो दिल्ली का पहला केस होगा लेफ्ट के स्टूडेंट विंग AISA के कार्यकर्ता दानिश के मुताबिक, रैपिड एक्शन फोर्स के वर्दीधारी जवान ने पैलेट गन से फायर किया गया था। अगर ये दावे सही हुए तो पहली बार होगा कि दिल्ली में सिविल प्रोटेस्ट में पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया। दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पैलेट गन इस्तेमाल नहीं की गई है। ये दावे झूठे और भ्रामक हैं। इन अफवाहों को आगे न बढ़ाएं। पैलेट गन इस्तेमाल के नियम क्या हैं
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पैलेट्स से जख्मी इरशाद से बोले नड्डा-प्रोटेस्ट में क्यों गए:हॉस्पिटल ने मेडिकल रिपोर्ट नहीं दी, ठीक होकर फिर जंतर-मंतर जाऊंगा
