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प्रयागराज में दो साल पहले शुरू हुई डॉ. राजेंद्र प्रसाद नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में 12 पदों पर असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में कथित अनियमितताओं की जांच अब शासन स्तर से होगी। पिछले महीने हुई इन नियुक्तियों पर उठे सवालों को मुख्यमंत्री ने गंभीरता से लिया। मुख्यमंत्री इस यूनिवर्सिटी के चेयरपर्सन भी है। उन्होंने पूरे मामले की जांच के लिए एम देवराज की अध्यक्षता में तीन प्रमुख सचिवों की उच्चस्तरीय कमेटी 3 सितम्बर को गठित कर दी है। वह कमेटी चयन प्रक्रिया से लेकर नियुक्ति तक के पूरे मामले की जांच करेगी। शासन ने समिति को 30 दिन के भीतर अपनी जांच आख्या और निष्कर्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। जांच का आदेश होने के बाद से यूनिवर्सिटी में हड़कंप मच गया है। अगले हफ्ते वह कमेटी प्रयागराज आ सकती है। नवगठित नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी का अपना कैंपस भी नहीं है और यहां पर असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती विवादों में आ गई। इसका अपना कैंपस झलवा में निर्माणाधीन है। बीए एलएलबी के 60 सीटों वाले इस विश्वविद्यालय में अब तक दो सत्रों में प्रवेश हुआ है और तीसरे सत्र का प्रवेश चल रहा है। यूनिवर्सिटी में भर्ती का विवाद हुआ तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी बना दी है। इसका आदेश न्याय अनुभाग के विशेष सचिव दिनेश सिंह ने जारी किया है।
मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जांच की जिम्मेदारी शासन के तीन वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई है। यह कमेटी कार्मिक एवं नियुक्ति विभाग के प्रमुख सचिव एम. देवराज की अध्यक्षया में बनाई गई है। इसमें उच्च शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव एमपी अग्रवाल और न्याय व विधि परामर्शी विभाग प्रमुख सचिव उदय प्रताप सिंह को सदस्य बनाया गया है। इस तरह भर्ती प्रक्रिया की जांच में कार्मिक, उच्च शिक्षा और विधि तीनों विभागों का प्रतिनिधित्व रहेगा। जनवरी में मिली थी भर्ती की अनुमति
इसी बीच प्रदेश सरकार ने 27 जनवरी 2026 को यूनिवर्सिटी से 12 पदों पर असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती की अनुमति दी। इन पदों पर भर्ती के लिए 6 मार्च को विज्ञापन निकाला गया। कहा गया कि यूजीसी की गाइडलाइन के अनुसार सभी पदों पर चयन किया जाएगा। रिक्त पदों के सापेक्ष 680 आवेदन आए। उनकी जांच के बाद 569 अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए बुला लिया गया। 22 से 31 जुलाई तक इंटरव्यू हुआ और 31 जुलाई की शाम 4:00 बजे कार्य परिषद की आपात बैठक बुलाकर देर रात परिणाम घोषित कर दिया गया। कार्य परिषद के सदस्यों ने भर्ती पर उठाया था सवाल
कार्य परिषद की बैठक के दो सदस्यों में चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाया था। उन्होंने कहा था कि यूजीसी की जो गाइडलाइन है, उसका पालन नहीं किया गया है। अभ्यर्थियों का एपीआई (एकेडमिक परफॉर्मेंस इंडिकेटर) क्यों नहीं बनाया गया? इसके साथ ही असिस्टेंट रजिस्ट्रार के एक पद पर भर्ती हुई है। उसमें परीक्षा और इंटरव्यू समेत सभी मानको का पालन किया गया तो इसमें क्यों नहीं। इसके बावजूद कुलपति ने वोटिंग करवा कर दो के मुकाबले चार मतों से भर्ती को वैध घोषित करते हुए रात 10 बजे परिणाम जारी कर दिया था। रात में चयनित अभ्यार्थियों को नियुक्ति पत्र ईमेल कर दिया गया लेकिन किसी के नियुक्ति पत्र पर रजिस्ट्रार के हस्ताक्षर नहीं थे। अगले दिन सभी अभ्यर्थियों को बुलाकर बिना हस्ताक्षर वाले नियुक्त पत्र से ज्वाइन करवा दिया गया। नियुक्तियों के पूरे रिकॉर्ड खंगाले जाएंगे
कमेटी को विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती की चयन प्रक्रिया एवं नियुक्ति से संबंधित सभी सुसंगत तथ्यों, प्रपत्रों और अभिलेखों की जांच करने के अधिकार दिए गए हैं। जांच में 27 जनवरी 2026 के शासनादेश, यूजीसी रेगुलेशन-2018 और डॉ. राजेंद्र प्रसाद राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय अधिनियम-2020 में निर्धारित प्रावधानों को आधार बनाया जाएगा। यानी कमेटी यह देखेगी कि भर्ती प्रक्रिया और नियुक्तियों में संबंधित नियमों एवं प्रावधानों का पालन हुआ या नहीं। विश्वविद्यालय के सभी विभागों को सहयोग के निर्देश
जांच के दौरान विश्वविद्यालय के सभी विभाग, अधिकारी और कार्मिक समिति को पूरा सहयोग करेंगे। शासन ने स्पष्ट किया है कि जांच समिति को आवश्यक जानकारी और रिकॉर्ड उपलब्ध कराए जाएं, ताकि चयन प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों की विस्तृत पड़ताल की जा सके। 30 दिन में मुख्यमंत्री को सौपेंगे रिपोर्ट
कमेटी को जांच के लिए 30 दिन की समय सीमा दी गई है। जांच पूरी होने के बाद समिति अपनी आख्या और निष्कर्ष यूनिवर्सिटी के चेयरपर्सन व मुख्यमंत्री को प्रस्तुत करेगी। रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में लगाए गए अनियमितता के आरोपों में कितनी सच्चाई है और यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो वह किस स्तर पर हुआ। वित्तीय अनियमितता का भी लगा आरोप
यूनिवर्सिटी की कुलपति डॉ. उषा टंडन पर वित्तीय अनियमितता का भी आरोप लगा है। वह वेतन से अतिरिक्त पिछले दो साल से हर महीने एकेडमिक इंसेंटिव के रूप में 70,000 रुपए ले रही थी। एकेडमिक इंसेंटिव पर वित्त नियंत्रक ने आपत्ति करते हुए बिल भुगतान जुलाई से रोक दिया है। इसके अलावा सरकारी आवास होते हुए भी हर महीने 19700 रुपए HRA लेती रही हैं।
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प्रयागराज लॉ यूनिवर्सिटी में जांच को आएंगे तीन प्रमुख सचिव:असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में गड़बड़ी के आरोप, सीएम ने बनाई कमेटी
