प्रसूता की मौत के मामले में नागौर कलेक्ट्रेट पर नारेबाजी:9 थानों का जाब्ता तैनात; प्रदर्शनकारियों ने झूठे मुकदमे वापस लेने सहित 9 मांगें रखीं




नागौर में प्रसूता रूकमा देवी मेघवाल की इलाज में कथित लापरवाही से मौत होने का मामला एक बार फिर तूल पकड़ रहा है। भारतीय दलित साहित्य अकादमी, मेघवाल समाज विकास समिति नागौर, डॉ अम्बेडकर मेमोरियल वेलफेयर सोसायटी नागौर और मामले में गठित संघर्ष समिति के नेतृत्व में बड़ी संख्या में लोग जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। वहां जिला कलेक्टर के माध्यम से राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपकर प्रशासन और सरकार के समक्ष 9 सूत्रीय मांगें रखीं। कलेक्ट्रेट पर 9 थानों का जाब्ता तैनात
जिला कलेक्टर ऑफिस के बाहर प्रदर्शन को देखते हुए 9 थानों का जाब्ता तैनात किया गया। समिति ने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो जिलेभर में जन-जागरण अभियान चलाकर बड़ा आंदोलन किया जाएगा। संघर्ष समिति ने ज्ञापन में आरोप लगाया कि 22 जून 2026 को जेएलएन अस्पताल के एमसीएच विंग में इलाज के दौरान रूकमा देवी की इलाज में लापरवाही से मौत हो हुई। इसके बाद शव को उच्च केंद्र रेफर किए जाने के विरोध में समाज के लोगों ने अस्पताल की मॉर्च्युरी के बाहर धरना दिया था। ‘दोषी डॉक्टरों पर हत्या का मामला दर्ज करे सरकार’
समिति का कहना है कि प्रशासन से समझौता होने और धरना समाप्त होने के बावजूद बाद में आंदोलन से जुड़े लोगों पर राजकार्य में बाधा सहित गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज कर दिए गए। समिति ने इन मुकदमों को वापस लेने, मामले में कथित दोषी डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज करने, जांच पूरी होने तक संबंधित चिकित्साकर्मियों को अन्यत्र लगाने और कथित रिश्वतखोरी की एसीबी से जांच कराने की मांग की है। 50 लाख रुपए का मुआवजा और नौकरी की मांग
ज्ञापन में जांच समिति की अब तक की कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक करने, एएसपी आशाराम चौधरी और कोतवाली सीआई वेदपाल शिवरान को हटाने, जिले में स्थायी पुलिस अधीक्षक की नियुक्ति करने, पीड़ित परिवार को 50 लाख रुपए की आर्थिक सहायता और एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग भी शामिल है। संघर्ष समिति ने नवजात बच्ची के पालन-पोषण और शिक्षा का पूरा खर्च राज्य सरकार से उठाने और वयस्क होने पर उसे सरकारी नौकरी देने की मांग भी की है। समिति ने स्पष्ट किया कि यदि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी।



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