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फरीदाबाद साइबर थाना सेंट्रल की टीम ने घर बैठे पार्ट-टाइम नौकरी और क्रिप्टो ट्रेडिंग के जरिए मोटा मुनाफा कमाने का झांसा देकर 43.12 लाख रुपए की साइबर ठगी करने वाले गिरोह पर कार्रवाही की है। पुलिस ने एक महिला सहित 10 आरोपितों को नोएडा दिल्ली गुरुग्राम व रोहतक से गिरफ्तार किया है। जांच के दौरान पुलिस ने 3.10 लाख रुपये नकद, दो सिम कार्ड और एक मोबाइल फोन भी बरामद किया है। पुलिस ने सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया है। पुलिस इस गैंग के दूसरे सदस्यों की तलाश कर रही है। व्हाट्सएप और टेलीग्राम के जरिए फंसाया पुलिस प्रवक्ता ,यशपाल ने जानकारी देते हुए बताया कि, सेक्टर-31 के रहने वाले विकास ने 15 मई को पुलिस को दी शिकायत में बताया कि, उसे एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा गया। इसके बाद टेलीग्राम के माध्यम से उसे घर बैठे पार्ट-टाइम नौकरी और ऑनलाइन टास्क पूरा कर अच्छी कमाई का लालच दिया गया। शुरुआत में उसे ई-कॉमर्स वेबसाइट के उत्पादों के लिंक पर क्लिक कर स्क्रीनशॉट भेजने जैसे आसान कार्य दिए गए और बदले में छोटी-छोटी रकम उसके खाते में भेजी गई। इससे पीड़ित का भरोसा जीतने के बाद उसे क्रिप्टो ट्रेडिंग में अधिक निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया। फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर दिखाया नकली मुनाफा ठगों ने एक फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर उसके खाते में लगातार 30 से 50 प्रतिशत तक का नकली मुनाफा दिखाकर निवेश बढ़ाने के लिए उकसाया। पीड़ित ने 17 मई से 1 जून के बीच आरोपियों द्वारा बताए गए विभिन्न बैंक खातों में 43.12 लाख रूपए ट्रांसफर कर दिए। जब उसने निवेश की गई राशि और मुनाफा निकालने का प्रयास किया तो निकासी रोक दी गई। इसके बाद उससे खाता अपग्रेड शुल्क, केवाईसी शुल्क, एडवांस टैक्स और अन्य चार्ज के नाम पर लगातार और पैसे जमा कराने की मांग की गई। इतना ही नहीं, पहले खाते को सस्पेंड बताकर नया ट्रेडिंग खाता भी खुलवा दिया गया। इसके बावजूद न तो उसकी मूल राशि वापस मिली और न ही कोई लाभ। ठगी का एहसास होने पर पीड़ित ने साइबर थाना सेंट्रल में शिकायत दर्ज कराई। नोएडा से तीन आरोपी गिरफ्तार जांच के दौरान साइबर थाना सेंट्रल की टीम ने 17 जून को पहली कार्रवाई करते हुए प्रशांत शर्मा (उधानपुर, आगरा), विक्रम सिंह (मूल निवासी मधुबनी, बिहार,) और विवेक कुमार (मूल निवासी मधुबनी, बिहार को नोएडा से गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि विवेक बैंक खाता खाताधारक था। उसने अपना बैंक खाता विक्रम सिंह को उपलब्ध कराया और विक्रम ने वही खाता आगे प्रशांत शर्मा को सौंप दिया। प्रशांत ने बैंक खाते और उससे जुड़े दस्तावेज कोरियर के माध्यम से साइबर ठगों तक पहुंचाए। जांच में सामने आया कि इस खाते में ठगी की रकम में से करीब 3.80 लाख रुपये जमा हुए थे। दिल्ली से तीन और आरोपी दबोचे मामले की आगे की जांच में पुलिस ने 2 जुलाई को गौरव कुमार, रेहान अहमद शाह और रणजीत को दिल्ली के प्रेम नगर-2 को किराड़ी सुलेमान नगर और सुल्तानपुरी क्षेत्र से गिरफ्तार किया। पूछताछ में पता चला कि रणजीत ने खाताधारक विकाश का बैंक खाता साइबर ठगों को उपलब्ध कराया था। इस खाते में ठगी की रकम के 16 हजार रुपये आए थे। जांच में यह भी सामने आया कि खाते से लिंक सिम गौरव कुमार के नाम पर थी और रेहान अहमद शाह उस सिम का इस्तेमाल कर रहा था। रेहान, उसी सिम पर आने वाले ओटीपी साइबर ठगों को उपलब्ध कराकर बैंकिंग लेन-देन में उनकी मदद करता था। खाताधारक विकाश फिलहाल फरार है, जिसकी तलाश जारी है। महिला मित्र के नाम पर खुलवाया बैंक खाता इसके बाद 9 जुलाई को साइबर थाना की टीम ने एक और कार्रवाई करते हुए मनोज (भिवानी), दीपक (रोहतक), अस्मित (हरिद्वार, उत्तराखंड) तथा रोहतक निवासी एक महिला को गिरफ्तार किया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि मनोज ने अपनी महिला मित्र के नाम पर बैंक खाता खुलवाया और उसे अपने रिश्तेदार दीपक को दे दिया। दीपक ने टेलीग्राम के माध्यम से यह बैंक खाता अस्मित तक पहुंचाया। जांच में सामने आया कि इस खाते में ठगी की रकम में से 19 हजार रुपये ट्रांसफर हुए थे। 14 बैंक खाते और 6 यूपीआई खाते इस्तेमाल किए पुलिस के अनुसार साइबर ठगी के इस पूरे नेटवर्क में अलग-अलग लोग बैंक खाते उपलब्ध कराने, सिम कार्ड उपलब्ध कराने, ओटीपी साझा करने का काम कर रहे थे। जांच में यह भी सामने आया कि ठगी के 43.12 लाख रूपए प्रथम लेयर के 14 बैंक खातों व 6 यूपीआई खाता में ट्रांसफर कराये गये थे। पुलिस नेटवर्क में शामिल दूसरे सदस्यों की तलाश कर रही है।
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फरीदाबाद में 43.12 लाख की साइबर ठगी का भंडाफोड़:महिला समेत 10 आरोपी गिरफ्तार, नोएडा, दिल्ली, गुरुग्राम और रोहतक से अरेस्ट किए
