फ्रांस पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी, भारतीय समुदाय ने किया जोरदार स्वागत; आज मैक्रों से होगी मुलाकात
फ्रांस दौरे पर पीएम मोदी, भारतीय समुदाय ने किया भव्य स्वागत; आज मैक्रों से अहम वार्ता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार रात फ्रांस के नीस शहर पहुंचे, जहां प्रवासी भारतीयों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। होटल पहुंचने पर पीएम मोदी ने भारतीय समुदाय के लोगों से मुलाकात की, एक बच्चे को गोद में उठाकर स्नेह जताया और उपस्थित लोगों का अभिवादन स्वीकार किया। इस दौरान उन्होंने सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आनंद लिया।
आज प्रधानमंत्री मोदी फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। इसके अलावा वह ‘भारत इनोवेट्स’ कार्यक्रम का उद्घाटन भी करेंगे, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच नवाचार और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देना है।
बैठक में टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, हेल्थ टेक, मेडिकल टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर और अंतरिक्ष तकनीक समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी। सूत्रों के अनुसार, इन क्षेत्रों से जुड़े करीब 12 समझौतों पर सहमति बन सकती है।
रक्षा सहयोग भी बैठक का प्रमुख एजेंडा रहेगा। भारत और फ्रांस के बीच 114 राफेल लड़ाकू विमानों की संभावित डील पर अहम बातचीत होने की उम्मीद है। भारत चाहता है कि इन विमानों में स्वदेशी हथियार प्रणालियों को एकीकृत करने की सुविधा मिले, जिसके लिए सोर्स कोड से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की जा सकती है।
डील पर अभी कैबिनेट की सुरक्षा मामलों की समिति (CCS) की मंजूरी नहीं मिली है। प्रधानमंत्री की यात्रा के बाद ही इस पर अंतिम फैसला होगा।
पीएम का 6 दिन का फ्रांस और स्लोवाकिया का दौरा
प्रधानमंत्री 13 से 18 जून तक फ्रांस और स्लोवाकिया के 6 दिनों के दौरे पर हैं। पीएम बनने के बाद उनकी यह 7वीं फ्रांस यात्रा है। उनका फ्रांस दौरा दो फेज में होगा। इस दौरान 3 शहरों नीस, एवियान और पेरिस जाएंगे। वे 13-14 जून तक नीस में रहेंगे।
16 से 17 जून को एवियान में G7 समिट में हिस्सा लेंगे। 18 जून को पेरिस में राष्ट्रपति मैक्रों के साथ विवाटेक सम्मेलन में जाएंगे। 17 जून को G7 समिट के दौरान मोदी की अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प से द्विपक्षीय मुलाकात होगी। दोनों नेता 16 महीने बाद मिलेंगे। दोनों आखिरी बार फरवरी 2025 में वॉशिंगटन में मिले थे।
फांस दौरे के बीच मोदी 14 जून की शाम फ्रांस से स्लोवाकिया जाएंगे और 15 जून तक रुकेंगे। इस दौरान स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रोबर्ट फिको और राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रीनी से मुलाकात करेंगे। 1993 में स्लोवाकिया के आजाद देश बनने के बाद किसी भारतीय पीएम का यह पहला दौरा है।
होर्मुज रक्षा गठबंधन में भारत के शामिल होने पर निर्णय संभव
प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान ईरान युद्ध के कारण होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही को लेकर बड़ा फैसला हो सकता है। ब्रिटेन की अगुवाई में अप्रैल में हुई पेरिस वार्ता में भारत शामिल हुआ था।
होर्मुज खोलने को लेकर भारत किसी एक देश की पहल पर होने वाली सुरक्षा व्यवस्था के बजाए संयुक्त राष्ट्र के नियमों के अनुकूल बहुपक्षीय सुरक्षा व्यवस्था के हक में है। ऐसे में भारत फ्रांस और ब्रिटेन की पहल के साथ कदम मिलाते हुए होर्मुज रक्षा गठबंधन में शामिल होने पर सहमति दे सकता है।
G7 क्या है, इसमें कौन-कौन से देश हैं?
G7 यानी ‘ग्रुप ऑफ सेवन’, दुनिया के उन 7 देशों का समूह है, जिन्हें दुनिया की ‘मॉडर्न इकोनॉमी’ वाला देश कहा जाता है। इनमें अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, जापान, इटली, कनाडा और जर्मनी शामिल हैं।
इसकी शुरुआत 1975 में G6 के रूप में हुई थी। 1976 में कनाडा के जुड़ने के बाद यह G7 बन गया। 1998 में रूस को शामिल कर इसका नाम G8 कर दिया गया, लेकिन 2014 में यूक्रेन के क्रीमिया क्षेत्र पर रूस के कब्जे के बाद उसे समूह से बाहर कर दिया गया। इसके बाद यह फिर से G7 कहलाने लगा।
भारत G7 में गेस्ट नेशन, पीएम 7वीं बार शामिल होंगे
भारत G7 का सदस्य नहीं है, लेकिन दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्था और महत्वपूर्ण वैश्विक भूमिका के कारण उसे अक्सर विशेष आमंत्रित देश (गेस्ट नेशन) के रूप में बुलाया जाता है। आमतौर पर भारत के प्रधानमंत्री को समिट का न्यौता मिलता है।
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 2005 से 2013 के बीच पांच बार G7 (पहले G8) समिट में हिस्सा लिया था। PM मोदी को पहली बार 2019 में फ्रांस के बियारिट्ज में आयोजित G7 समिट में आमंत्रित किया गया था।
2020 में अमेरिका को मेजबानी करनी थी, लेकिन उसने तब समिट रद्द कर दी। इसके बाद 2021 में ब्रिटेन की मेजबानी में आयोजित सम्मेलन में PM मोदी वर्चुअली शामिल हुए। इसके अलावा मोदी 2022 में जर्मनी, 2023 में जापान, 2024 में इटली और 2025 में कनाडा में आयोजित G7 समिट में शामिल हुए।
भारत के टॉप-2 हथियार सप्लायर्स में शामिल फ्रांस
साल 2025 में फ्रेंच अखबार ला मोंड की खबर के मुताबिक फ्रांस ऐसे वक्त में भी भारत का साथ देता आया है, जब अमेरिका समेत दुनिया की तमाम बड़ी शक्तियों ने भारत का साथ छोड़ दिया था।
पोखरण में परमाणु टेस्ट के बाद अमेरिका, जापान, जर्मनी और ब्रिटेन जैसे देशों ने भारत पर कई प्रतिबंध लगा दिए, लेकिन फ्रांस ने भारत का समर्थन किया।
फ्रांस ने अमेरिकी प्रतिबंधों की अनदेखी करते हुए भारत को हथियार बेचना शुरू किया और अब वो रूस के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा रक्षा हथियार आपूर्तिकर्ता बन गया है।
भारत को फ्रांस से मिराज 2000 फाइटर जेट, राफेल फाइटर जेट और स्कॉर्पीन पनडुब्बी मिल चुकी है।
फ्रांस ने इंटरनेशनल फोरम पर हमेशा भारत को सपोर्ट किया
सितंबर 2023 में हुई G20 समिट के दौरान PM मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन को 2024 के गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होने का न्योता दिया था, लेकिन दिसंबर में उन्होंने भारत आने से इनकार कर दिया।
ऐसे वक्त में भारत ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को गणतंत्र दिवस में शामिल होने का न्योता भेजा। उन्होंने इसे तुरंत स्वीकार भी कर लिया।
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर फ्रांस ने भारत का हमेशा समर्थन किया है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सितंबर 2024 में संयुक्त राष्ट्र में भारत को सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनाने की मांग की थी।
इसके अलावा फ्रांस, न्यूक्लियर सप्लाई ग्रुप (NSG) में भी भारत को सदस्य बनाने का पक्षधर है।
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