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बिहार में ट्रैक्टर, पुलिस की गाड़ियों के बीच होगा युद्ध:बेगूसराय में किसान नेता राकेश टिकैत बोले- देश में चल रहा बड़ा बीज घोटाला




भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने बेगूसराय में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान केंद्र और बिहार सरकार पर तीखा हमला बोला है। दो दिनों के बिहार दौरे के दौरान आज शाम बेगूसराय पहुंचे टिकैत ने राज्य में किसानों की दुर्दशा, भूमि अधिग्रहण, मंडी व्यवस्था, खाद-बीज संकट और चुनावी प्रक्रिया में धांधली को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि बिहार में पिछले 20-25 सालों से एक सोची-समझी रणनीति के तहत किसानों को उनकी फसलों के उचित दाम न देकर पलायन के लिए मजबूर किया जा रहा है। इसका मुख्य मकसद यह है कि किसान अपनी खेती और जमीन से नफरत करने लगें और गांव छोड़कर शहरों की ओर चले जाएं। इसके बाद बड़े-बड़े पूंजीपति और कॉर्पोरेट घराने गांवों में आकर किसानों की उपजाऊ जमीनों को कौड़ियों के भाव लूट लें। ‘बिहार में जमीन लूट का एक बहुत बड़ा खेल चल रहा है’ किसान नेता ने चेतावनी दी कि यदि बिहार के लोगों को अपनी जमीन, फसल और आने वाली पीढ़ी की आजीविका बचानी है, तो राजधानी पटना में भी दिल्ली के ऐतिहासिक आंदोलन की तर्ज पर एक विशाल जन-आंदोलन खड़ा करना पड़ेगा। भूमि अधिग्रहण और सर्किल रेट के मुद्दे पर राज्य सरकार को आड़े हाथों लेते हुए राकेश टिकैत ने कहा कि बिहार में जमीन लूट का एक बहुत बड़ा खेल चल रहा है। राज्य में साल 2013 के बाद से डीसी रेट यानी सर्किल रेट को संशोधित ही नहीं किया गया है। आज जब सरकार या निजी कंपनियां राज्य में कोई नई फैक्ट्री या बुनियादी ढांचा तैयार करती हैं, तो उसमें इस्तेमाल होने वाले स्टील, गिट्टी, मोरम, कंक्रीट से लेकर इंजीनियरों और मजदूरों का भुगतान वर्तमान बाजार दरों के हिसाब से किया जाता है। इसके विपरीत, जिस किसान की कीमती जमीन ली जाती है, उसे 13 साल पुराने 2013 के सर्किल रेट के आधार पर मुआवजा दिया जा रहा है। ‘गांव का युवा खेती छोड़कर शहरों में मजदूरी करने को विवश है’ राकेश टिकैत ने कहा कि आज गांव का युवा खेती छोड़कर शहरों में मजदूरी करने को विवश है। जबकि शहरों के बड़े उद्योगपति गांवों में आकर जमीनें खरीद रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि केवल बिहार को एमएसपी पर सरकारी खरीद न होने के कारण हर साल 1 लाख 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक का सीधा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि मक्का, धान, गेहूं और सूरजमुखी के उत्पादन में बिहार के किसानों को औने-पौने दाम मिल रहे हैं। राज्य में धान की खरीद किसानों से महज 800 रुपये से 1200 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर की जाती है। यह सस्ता धान सीधे पंजाब और हरियाणा के बड़े व्यापारियों और राइस मिलरों के पास भेज दिया जाता है। हरियाणा में एक-एक सेलर की क्रेडिट लिमिट 5-5 हजार करोड़ रुपये तक की है, जो बिहार से कौड़ियों के भाव धान खरीदकर भारी मुनाफा कमाते हैं। इससे बिहार के किसानों को तो भारी नुकसान होता ही है, पंजाब और हरियाणा के किसानों की एमएसपी खरीद पर भी इसका बुरा असर पड़ता है। बिहार में मंडियों को इसलिए बंद किया गया ताकि… टिकैत ने कहा कि बिहार-यूपी सीमा पर मंसूरी धान की खरीद में अकेले रामपुर और मुरादाबाद में एक ही साल के भीतर 200 करोड़ रुपये का घोटाला पकड़ा गया था। इसके तमाम पक्के दस्तावेज शासन-प्रशासन को सौंपे गए, लेकिन बड़ी कंपनियों और बिचौलियों को बचाने के लिए इसकी कोई जांच नहीं कराई गई। बिहार में मंडियों को इसलिए बंद किया गया ताकि बड़े पूंजीपति किसानों से सस्ती दर पर फसलें खरीदकर बाजार में महंगे दामों पर बेच सकें। अब सरकार इन्हीं बंद पड़ी मंडियों को बड़े उद्योगपतियों को लीज पर देने की योजना बना रही है। इसके साथ ही उन्होंने देश भर में चल रहे बीज घोटाले पर पर्दाफाश करते हुए कहा कि सामान्य अनाज की छंटाई करके, उसे कट्टों में पैक करके किसानों को महंगे बीजों के नाम पर बेचा जा रहा है और सब्सिडी डकारी जा रही है। कंपनियां जल्द ही जेनेटिकली मॉडिफाइड (जीएम) और हाइब्रिड बीज लाकर देश की पारंपरिक कृषि व्यवस्था को पूरी तरह तबाह कर देगी। ‘जैविक और प्राकृतिक खेती की ओर वापस लौटना होगा’ खाद और उर्वरक की किल्लत पर उन्होंने कहा कि अब किसानों को रासायनिक खादों पर निर्भरता छोड़कर जैविक और प्राकृतिक खेती की ओर वापस लौटना होगा। सरकार की नीतियां ऐसी हैं जिससे देश का पशुधन और डेयरी क्षेत्र खत्म हो रहा है और किसान पूरी तरह लाचार हो रहा है। उन्होंने कहा कि बिहार के जो युवा दिल्ली, मुंबई या अन्य बड़े शहरों में नौकरी-कारोबार कर रहे हैं और वहां महंगी गाड़ियां खरीद रहे हैं, वे अपने गांव में अपने परिवार के लिए कम से कम एक ट्रैक्टर जरूर भेजें। जब बिहार के हर किसान परिवार के पास ट्रैक्टर होगा, तो आंदोलन को अभूतपूर्व ताकत मिलेगी। उन्होंने कहा कि एक दिन बिहार की सड़कों पर ऐसा युद्ध देखने को मिलेगा जो किसानों के ट्रैक्टरों और पुलिस की गाड़ियों के बीच होगा। टिकैत ने घोषणा की कि आगामी 10 तारीख को दिल्ली में आयोजित होने वाले विशाल किसान आंदोलन में देश भर के साथ-साथ बिहार के किसान भी बड़ी संख्या में शामिल होंगे। लोकतांत्रिक और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाया प्रेसवार्ता में देश की लोकतांत्रिक और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए राकेश टिकैत ने वोट चोरी का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि चुनाव जीतने और हराने का वोट चोरी का पूरा फार्मूला सबसे पहले बिहार से ही प्रयोग में लाया गया था। जहां जीते हुए उम्मीदवारों को प्रशासनिक दबाव में हरा दिया गया और हारे हुए भाजपा उम्मीदवारों को जिता दिया गया। अब इसी मॉडल को उत्तर प्रदेश और देश के अन्य राज्यों में लागू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आगामी विधानसभा चुनावों के लिए सत्ता पक्ष ने नया फार्मूला तैयार किया है। विपक्ष के मजबूत प्रत्याशियों को डराया-धमकाया जा रहा है, उनकी एजेंसियां, कारोबार और पेट्रोल पंप बंद कराने की धमकी देकर जबरन नामांकन वापस कराया जा रहा है। चुनाव आयुक्त से जुड़े सवाल पर टिकैत ने कहा कि चुनाव आयुक्त को नैतिकता के आधार पर तुरंत अपने पद से त्यागपत्र दे देना चाहिए। मौके पर संयुक्त किसान मोर्चा बिहार के नेता दिनेश कुमार एवं अशोक प्रसाद सिंह सहित अन्य उपस्थित थे।



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