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भागलपुर के राघोपुर में तटबंध का हिस्सा धंसा:करोड़ों खर्च के बाद भी कटाव जारी; फ्लड फाइटिंग के भरोसे सुरक्षा, विभाग के काम पर लोगों ने उठाए सवाल




भागलपुर के राघोपुर में पुरानी रेल लाइन का तटबंध धंस गया है। गंगा का जलस्तर घटने के बावजूद कटाव हुआ है। तटबंध का कई मीटर लंबा हिस्सा टूट गया, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। इस तटबंध को बचाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च किए गए थे। राघोपुर में ही बिहार सरकार के ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल का घर का है। अगस्त-सितंबर के बीच इस तटबंध पर और इसके आगे मार्जिनल बांध का बड़ा हिस्सा ध्वस्त हुआ था। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी इसका निरीक्षण किया था। दो बार एरिया सर्वे के जरिए जायजा लिया था। लोगों ने उठाए सवाल ब्रह्मस्थान के पास हुए इस कटाव ने जल संसाधन विभाग के काम पर सवाल खड़े किए हैं। नदी का पानी उतरने के दौरान भी किनारों को तेजी से काटता है। करोड़ों खर्च के बावजूद तटबंध का दोबारा टूटना बड़ा सवाल है। विभाग ने कटाव रोकने के लिए फिर से फ्लड फाइटिंग शुरू की है। लोगों का कहना है कि अगर पहले का काम प्रभावी होता तो दोबारा बचाव की जरूरत नहीं पड़ती। तटबंध कटने पर भी चौक की ओर नहीं बढ़ेगा पानी भीषण कटाव के बीच स्थानीय लोगों के लिए राहत की खबर भी सामने आई है। मौके से मिली जानकारी के अनुसार, तटबंध का हिस्सा कटने के बावजूद पानी के चौक और आबादी वाले इलाके की ओर बढ़ने की आशंका फिलहाल नहीं जताई जा रही है।बताया जा रहा है कि गंगा का जलस्तर काफी नीचे होने के कारण तटबंध से निकलने वाला पानी सीधे गंगा नदी में ही समा जाएगा। इससे आसपास के इलाकों में बड़े पैमाने पर जलजमाव या पानी फैलने का तत्काल खतरा कम बताया जा रहा है।हालांकि, यह राहत की स्थिति मौजूदा जलस्तर और पानी के बहाव पर निर्भर करेगी। इसलिए तटबंध के पास रहने वाले लोगों के लिए सतर्क रहना जरूरी है। कटाव की रफ्तार बढ़ने या नदी की धारा में बदलाव होने पर हालात बदल भी सकते हैं। कुछ ही मीटर बचा तटबंध, बढ़ी खतरे की चिंता स्थानीय जानकारी के अनुसार, तटबंध का अब बहुत छोटा हिस्सा ही बचा हुआ है। ऐसे में कटाव यदि लगातार जारी रहा, तो बचा हुआ हिस्सा भी खतरे में पड़ सकता है। यही वजह है कि मौके पर कटावरोधी कार्य तेज करने की जरूरत है। जल संसाधन विभाग की टीम फ्लड फाइटिंग के जरिए स्थिति को नियंत्रित करने में जुटी है। अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि गंगा की धारा को तटबंध के शेष हिस्से तक पहुंचने से कैसे रोका जाए। गंगा का जलस्तर घटा, लेकिन कटाव का खतरा बरकरार आमतौर पर गंगा का जलस्तर घटने पर लोगों को बाढ़ से राहत मिलने की उम्मीद रहती है। लेकिन नदी के किनारे बसे इलाकों में पानी उतरने के दौरान भी कटाव का खतरा बना रहता है। नदी की धारा में बदलाव, किनारे की मिट्टी का कमजोर होना और पानी के बहाव का दबाव तटबंधों को नुकसान पहुंचा सकता है। अब फ्लड फाइटिंग के भरोसे तटबंध की सुरक्षा कटाव की ताजा घटना के बाद जल संसाधन विभाग की ओर से फ्लड फाइटिंग का काम शुरू किया गया है। मौके पर कटाव को रोकने और तटबंध के बचे हिस्से को सुरक्षित रखने की कोशिश की जा रही है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या इस बार तटबंध को बचाने के लिए किए जा रहे इंतजाम लंबे समय तक टिक पाएंगे? या फिर गंगा का अगला तेज बहाव दोबारा विभागीय तैयारियों की परीक्षा लेगा?



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