Headlines

भोजपुर- खतरे के निशान से 19cm ऊपर बह रही गंगा:19 पंचायतों में पहुंचा बाढ़ का पानी, ग्रामीण नाव से नदी पार करने को मजबूर; बोले- पक्का पुल ही स्थायी समाधान




नेपाल के रसुवा जिले में आई भीषण बाढ़ के बाद बिहार की नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी ने चिंता बढ़ा दी है। भोजपुर जिले के बड़हरा प्रखंड में गंगा नदी उफान पर है। प्रखंड की 19 पंचायतों के कई गांवों और मैदानी इलाकों में बाढ़ का पानी फैल गया है। कई सड़कों पर पानी चढ़ने से लोगों की परेशानी बढ़ गई है। खेतों में लगी मक्का और सब्जी की फसल डूबने से किसानों को नुकसान हुआ है, जबकि धान की फसल पर भी संकट मंडरा रहा है। 53.27 मीटर पर रुका गंगा नदी का जलस्तर गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 19 सेंटीमीटर ऊपर पहुंचकर 53.27 मीटर पर रुका हुआ है। जलस्तर में लगातार उतार-चढ़ाव के बीच नेपाल में हुई भारी बारिश और बाढ़ के कारण बिहार की नदियों पर भी प्रशासन की नजर बनी हुई है। बड़हरा प्रखंड के नेकनाम टोला, बखोरापुर, फरना, पश्चिमी बबुरा, बिशुनपुर, पूर्वी गुंडी, पश्चिमी गुंडी, बड़हरा, एकवना, गजियापुर, नथमलपुर, बलुआ, नरगदा, सोहरा, सिन्हा, पकड़ी, सरैया और खवासपुर पंचायत के कई इलाकों में बाढ़ का पानी फैल गया है। पीपा पुल खुलने के बाद नाव ही सहारा गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण पीपा पुल को खोल दिया गया है। इसके बाद नदी के दोनों किनारों के बीच आवागमन करने वाले ग्रामीणों के सामने नाव ही एकमात्र सहारा रह गया है। उफनती गंगा की तेज धार के बीच लोग नाव से सफर करने को मजबूर हैं। जान जोखिम में डालकर नदी पार करने को मजबूर स्कूल या कॉलेज से पढ़कर लौट रहे बच्चे हों या परिवार के साथ जरूरी काम से निकले ग्रामीण, सभी को जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ रही है। कई महिलाएं छोटे बच्चों को गोद में लेकर नाव से सफर करती नजर आ रही हैं। पीपा पुल बंद होने के बाद नाव से आवागमन करना मजबूरी बन गया है। तेज हवा और बारिश के बीच उफनती नदी में नाव का सफर लोगों के लिए खतरे से खाली नहीं है। इसके बावजूद रोजमर्रा की जरूरतों, पढ़ाई और जरूरी काम के लिए उन्हें नदी पार करनी पड़ रही है। निचले इलाकों में रहने वालों की बढ़ीं मुश्किलें बाढ़ के पानी से निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। इधर, खेतों में पानी फैलने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। मक्का और सब्जियों की फसल को नुकसान होने लगा है। धान की फसल भी जलस्तर बढ़ने से प्रभावित होने की आशंका है। नेपाल की त्रासदी के बाद गंगा के उफान ने बड़हरा के ग्रामीणों के सामने एक और बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। सिस्टम की तैयारियों के बीच जमीन पर ग्रामीणों की मजबूरियां साफ दिखाई दे रही हैं। डेढ़ किलोमीटर पानी में घुसकर दुकान पर जा रहे ग्रामीण बड़हरा प्रखंड के जीवा राय के टोला निवासी बिट्टू कुमार राय ने बताया कि हर साल गांव में बाढ़ आने से काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। एक समान खरीदने के लिए डेढ़ किलोमीटर से ज्यादा पानी में घुसकर मुख्य सड़क पर आना पड़ता है। प्रशासन ने नहीं की नाव की व्यवस्था नाव की भी व्यवस्था नहीं की गई है, पिछले एक सप्ताह में गंगा का जलस्तर बढ़ने से गांव में पानी घुस गया है। कपड़ा खोलकर इस पार से उस पार जाना पड़ता है। पूरा गांव जलमग्न है, हमारे यहां कोई भी जन्प्रतिनिधि इसका आजतक संज्ञान नहीं लिए हैं। ना कोई समस्या का समाधान निकाल पाए है। कई बार शिकायत के बावजूद समाधान नहीं कई बार स्थानीय विधायक से लेकर मंत्री तक को हम लोगों ने लिखित आवेदन तक दिया है। उसके बावजूद आज तक हमारे गांव में ठोस कदम उठाया गया है। नाव के सहारे सफर करने को मजबूर गंगा के दूसरी तरफ खवासपुर के जानकी बाजार निवासी सुगीला देवी ने बताया कि गांव से आरा जाने के लिए सुबह ही नाव पकड़ने के लिए निकलना पड़ता है। शाम से पहले किसी भी हालत में गांव वापस लौटना पड़ता है। अगर समय पर महुली घाट ना पहुंचे तो नाव नहीं मिलती है। बच्चों को नाव से आने-जाने में खतरा परिवार और बच्चों को लेकर नाव से सफर करना काफी मुश्किल हो जाता है। छोटे बच्चे काफी डरने लगते हैं, हम लोगों को आदत सी हो चुकी है। फिर भी कमर भर पानी में उतरकर जाना पड़ता है। शुगिला ने बताया कि शादी होने के बाद हम नाव से अपने ससुराल गए थे। हमारी मांग है कि पीपा पुल की जगह एक पक्का पुल का निर्माण कराया जाए। मंजू देवी ने बताया कि बहुत आने–जाने में दिक्कत होता है। आज आरा कोर्ट गए थे,समय पर नहीं पहुंचने से समस्या हुई। एक तरफ से नाव का भाड़ा 50 रूपये देना पड़ता है। गरीब परिवार कितना पैसा कहां से देगा। छोटी से छोटी कामों के लिए नाव से सफर करके महुली घाट आना पड़ता है। हम लोग चाहते हैं कि यार पक्का पुल का निर्माण करा कर सरकार उचित सुविधा दे। ताकि गरीब परिवार को यात्रा करने में कोई परेशानी ना हो। छात्रों को स्कूल-कोचिंग जाने में परेशानी छात्र आशीष कुमार ने बताया कि वो 11th का छात्र है। हर रोज नाव से ट्यूशन और क्लास करने के लिए आर जाना पड़ता है। काफी डर लगता है लेकिन पढ़ाई करना भी जरूरी है। जबसे होश संभाला है,तबसे से साल के पांच से छह महीने नाव से सफर किया है। पक्का पुल के निर्माण की मांग सरकार हम लोगों पर जल्द से जल्द ध्यान दें और यहां पक्का पुल का निर्माण करें। उससे पहले ग्रामीणों के सहयोग के लिए जिला प्रशासन को एक बड़ा नाम का व्यवस्था करना पड़ेगा। छोटी नावों पर सफर करने में काफी डर लगता है और जान हमेशा जोखिम में रहता है।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *