मंदसौर में थमा मानसून,8 दिन से अच्छी बारिश नहीं:तेज धूप-उमस से जनजीवन प्रभावित,किसान बारिश के इंतजार में;17 जुलाई से मानसून की रफ्तार बढ़ने के आसार




मंदसौर जिले में मानसून की रफ्तार फिलहाल थम सी गई है। पिछले करीब एक सप्ताह से जिले में अच्छी बारिश नहीं होने से गर्मी और उमस का असर बढ़ गया है। खेतों में नमी कम होने लगी है, जिससे किसानों की चिंता भी बढ़ती जा रही है। मौसम विभाग ने फिलहाल भारी बारिश की संभावना से इनकार किया है, हालांकि 17 जुलाई के बाद मानसूनी गतिविधियों में तेजी आने के संकेत दिए हैं। 8 जुलाई के बाद नहीं हुई अच्छी बारिश जिले में आखिरी बार 8 जुलाई को अच्छी बारिश दर्ज की गई थी। इसके बाद 9 जुलाई की रात जिला मुख्यालय और कुछ क्षेत्रों में हल्की बूंदाबांदी हुई, लेकिन तब से अब तक कहीं भी उल्लेखनीय वर्षा नहीं हुई है। लगातार बारिश का इंतजार कर रहे लोगों को बादलों के बावजूद राहत नहीं मिल रही। तेज धूप और उमस ने बढ़ाई परेशानी बारिश का दौर थमने के बाद दिनभर तेज धूप और उमस का असर बना हुआ है। सुबह से शाम तक गर्मी लोगों को परेशान कर रही है। आसमान में बादल तो छा रहे हैं, लेकिन बिना बरसे आगे बढ़ जाने से मौसम और अधिक उमस भरा हो गया है। जिले के अधिकांश इलाके सूखे जिला मुख्यालय के अलावा भावगढ़, गरोठ, सुवासरा, शामगढ़, दलौदा, मल्हारगढ़, पिपलिया मंडी, नारायणगढ़, डिगांव, सुंठोद, बरखेड़ा और अफजलपुर सहित अधिकांश क्षेत्रों में पिछले कई दिनों से अच्छी बारिश नहीं हुई है। खेतों की मिट्टी की नमी तेजी से कम हो रही है, जिससे खरीफ फसलों पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। किसानों की बढ़ी चिंता शुरुआती बारिश से किसानों ने खरीफ फसलों की बुवाई कर दी थी, लेकिन अब लगातार बारिश नहीं होने से फसलों की बढ़वार प्रभावित होने लगी है। किसान अच्छी वर्षा का इंतजार कर रहे हैं ताकि फसलों को पर्याप्त नमी मिल सके और उत्पादन प्रभावित न हो। 17 जुलाई के बाद सक्रिय हो सकता है मानसून मौसम विभाग के अनुसार, फिलहाल पश्चिमी मध्य प्रदेश में व्यापक बारिश की संभावना कम है। कुछ स्थानों पर हल्की बारिश या गरज-चमक की गतिविधियां हो सकती हैं, लेकिन भारी वर्षा के आसार नहीं हैं। हालांकि, 17 जुलाई के आसपास मानसून के दोबारा सक्रिय होने और बारिश का दौर शुरू होने की संभावना जताई गई है। अब तक 10.13 इंच बारिश दर्ज जिले में इस मानसून सीजन में अब तक औसतन करीब 10.13 इंच बारिश रिकॉर्ड की जा चुकी है। शुरुआती वर्षा से खरीफ फसलों को फायदा मिला, लेकिन कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अच्छी पैदावार के लिए आगामी दिनों में नियमित और संतुलित बारिश बेहद जरूरी होगी।



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