Headlines

महंगाई की आंच में मिट्टी के दीयों की चमक बरकरार:मिट्टी और ईंधन महंगा होने से कुम्हारों पर बढ़ा खर्च, दिवाली की खरीदारी शुरू




अंबाला सिटी में दिवाली की रौनक बाजारों में दिखने लगी है। दुकानों पर सांझी माता, मिट्टी के दीये और सजावटी सामान खरीदने के लिए ग्राहक पहुंच रहे हैं। त्योहार की तैयारियों के बीच इस बार महंगाई का असर मिट्टी के दीये बनाने वाले कारीगरों की लागत पर भी दिखाई दे रहा है। छोटे दीयों के दाम पिछले साल के आसपास बने हुए हैं, लेकिन बड़े दीयों की कीमत 10 से 15 रुपये से बढ़कर 20 रुपये तक पहुंच गई है। इसके बावजूद ग्राहक दिवाली की खरीदारी में कटौती करने के मूड में नहीं हैं। बाजार में खरीदारी के साथ मिट्टी के दीयों को लेकर लोगों का उत्साह भी बरकरार है। मिट्टी से लेकर पकाने तक बढ़ा खर्च दिवाली के लिए दीये तैयार करने वाले कारीगरों का कहना है कि महंगाई का असर केवल तैयार सामान की कीमतों तक सीमित नहीं है, बल्कि कच्चा माल जुटाने से लेकर दीये पकाने तक का खर्च बढ़ गया है। अंबाला सिटी में पुश्तैनी काम संभाल रहे नरेश कुमार प्रजापत बताते हैं कि उनके परिवार की कई पीढ़ियां मिट्टी के बर्तन और दीये बनाने का काम करती आ रही हैं। उन्हें खुद इस काम में 30 साल से अधिक का अनुभव है। नरेश के मुताबिक, पहले मिट्टी की ट्रॉली करीब 6 हजार रुपये में मिल जाती थी, लेकिन अब इसके लिए 8 से 9 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। दीयों को पकाने में इस्तेमाल होने वाली गोबर की पाथी भी 10 से 15 रुपये तक पड़ रही है। ऐसे में उत्पादन की लागत बढ़ गई है। कारीगरों के सामने चुनौती यह है कि लागत बढ़ने के बावजूद ग्राहकों को उचित दाम पर सामान उपलब्ध कराया जाए। 15 साल से दुकान संभाल रहीं कोमल, दादा 40 साल से कर रहे काम अंबाला में खुशी राम प्रजापत के साथ दुकान संभाल रहीं कोमल ने बताया कि वह पिछले 15 साल से इस काम से जुड़ी हैं, जबकि उनके दादा करीब 40 साल से इसे आगे बढ़ा रहे हैं। परिवार खुद मिट्टी के दीये तैयार करता है। इसके अलावा कुछ फैंसी दीये बाहर से मंगवाए जाते हैं, जिन पर वे खुद रंगों और डिजाइन से सजावट करती हैं। कोमल के अनुसार, मिट्टी खरीदने से लेकर दीये बनाने और पकाने तक की प्रक्रिया में परिवार खुद मेहनत करता है। पहले के मुकाबले खर्च काफी बढ़ गया है। कई बार ग्राहक बढ़े हुए दाम देने में भी हिचकिचाते हैं, जिससे कारीगरों के लिए लागत निकालना मुश्किल हो जाता है। दुकानदारों का कहना है कि अभी बाजार में खरीदारी की शुरुआत हुई है। उम्मीद है कि दिवाली नजदीक आने के साथ अगले एक-दो दिनों में ग्राहकों की भीड़ बढ़ेगी। महंगाई से तैयारियों पर असर नहीं, मिट्टी के दीये ही जलाएंगे बाजार में खरीदारी करने पहुंचीं अनु ने बताया कि दिवाली की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। वह सांझी माता और मिट्टी के दीये खरीदने आई हैं। उनके मुताबिक, इस समय बाजार में लगभग हर चीज महंगी मिल रही है, लेकिन त्योहार की तैयारियों में कोई कमी नहीं आएगी। अनु ने कहा कि उनका परिवार दिवाली पर मिट्टी के दीये ही जलाता है। बाजार में ग्राहकों की यह पसंद पारंपरिक दीये बेचने वाले दुकानदारों के लिए उम्मीद बनी हुई है। एक ओर महंगाई से कारीगरों की लागत बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर ग्राहक त्योहार की परंपरा को बनाए रखने के लिए मिट्टी के दीये खरीद रहे हैं। अब दुकानदारों को दिवाली के करीब आने के साथ बिक्री बढ़ने की उम्मीद है।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *