लुधियाना | जिला उपभोक्ता फोरम ने मेडिकल जांच में लापरवाही पर प्रसिद्ध गामा स्कैन एंड पाथ लैब और डॉ. मंजीत सिंह बिनेपाल को दोषी ठहराया है। आयोग ने 32 साल की महिला मरीज को गलत रिपोर्ट देकर मानसिक उत्पीड़न और अतिरिक्त चिकित्सा खर्च में धकेलने पर 1 लाख रुपए मुआवजा देने का आदेश सुनाया है। कनाडा की स्थायी निवासी रमनजीत कौर गिल ने 10 फरवरी, 2024 को थकान की शिकायत पर पेट-पेल्विस का अल्ट्रासाउंड करवाया था। डॉ. बिनेपाल द्वारा जारी रिपोर्ट में गर्भाशय को नॉर्मल बताकर फाइब्रॉइड न होने की बात लिखी गई। गिल ने बताया कि रिपोर्ट देखने के बाद उनको लगा था कि कोई बीमारी नहीं है। संतुष्ट न होने पर जब महिला ने उसी दिन रेडनेट डायग्नोस्टिक्स में जांच कराई, तो गर्भाशय में 33×27 मिमी की गांठ (फाइब्रॉइड यूटेरस) और दोनों अंडाशयों में सिस्ट पाई गई। बाद में महिला को चंडीगढ़ विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श कर जटिल सर्जरी (लैप्रोस्कोपी, सिस्टेक्टॉमी आदि) करानी पड़ी। आयोग के समक्ष लैब ने दलील दी कि सामान्य और एडवांस अल्ट्रासाउंड में अंतर होता है। हालांकि, अध्यक्ष संजीव बत्रा और सदस्य मोनिका भगत की पीठ ने दलील को खारिज कर दिया। आयोग ने कहा कि किसी गंभीर बीमारी के बावजूद मरीज को ‘नॉर्मल’ रिपोर्ट देना बेहद खतरनाक है। गर्भाशय की इतनी बड़ी गांठ को बिल्कुल नकार देना तकनीकी सीमा नहीं, बल्कि सीधी लापरवाही है। तय सीमा में भुगतान न करने पर शिकायत दर्ज होने की तारीख से 8 प्रतिशत सालाना ब्याज भी चुकाना होगा।
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मेडिकल जांच में लापरवाही:लुधियाना में नॉर्मल रिपोर्ट देकर छिपाई महिला के गर्भाशय की गांठ
