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‘मेरी जिंदगी तो खराब है, बच्चों की नहीं होने दूंगी’:होमगार्ड बनने खाली पैर दौड़ी रामगढ़ की सविता, 6:45 मिनट में पूरी की 1600 मीटर




“मेरी जिंदगी तो खराब हो ही चुकी है। लेकिन मैं अपने बच्चों की जिंदगी खराब नहीं करना चाहती।” रामगढ़ के दुलमी प्रखंड के सोसो गांव की कविता देवी जब यह कहती हैं तो उनकी आवाज में संघर्ष साफ सुनाई देता है। पति की बीमारी से करीब तीन साल पहले मौत हो गई। इसके बाद दो बच्चों की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। बेटा सातवीं और बेटी आठवीं कक्षा में पढ़ रही है। घर में सास-ससुर भी हैं। खर्च चलाने के लिए कविता कभी ईंट भट्ठे में मजदूरी करती हैं, तो कभी दूसरे घरों में काम। लेकिन इसी जिंदगी के बीच उन्होंने होमगार्ड बनने का सपना देखा है। वह कहती हैं, “सुबह करीब 3 बजे उठती हूं। गांव के पास मैदान में जाकर दौड़ती हूं। फिर घर का काम करती हूं और काम पर निकल जाती हूं।” मैदान में पहुंची तो सबके पास जूते थे, मेरे पास कुछ नहीं था कविता को बचपन से खेलकूद का शौक रहा है। स्कूल में भी दौड़ना पसंद था। जब रामगढ़ में होमगार्ड भर्ती के लिए 1600 मीटर दौड़ की जानकारी मिली तो उन्होंने तय किया कि इस बार कोशिश जरूर करेंगी। पैसे की कमी रास्ते में थी। कविता बताती हैं, “मेरे पास अच्छे जूते खरीदने के पैसे नहीं हैं। ट्रैक सूट भी नहीं है। जब दौड़ के लिए मैदान में पहुंची तो बाकी लोगों को अच्छे जूते और ट्रैक सूट में देखा। मेरे पास कुछ नहीं था। लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी।” वह साड़ी पहनकर नंगे पांव ही दौड़ में उतर गईं। 1600 मीटर की दूरी करीब 6 मिनट 45 सेकेंड में पूरी की। ट्रायल में छठे स्थान पर रहीं। दौड़ खत्म हुई तो सांसें तेज थीं। पांव थके थे। लेकिन चेहरे पर संतोष था। बच्चों की पढ़ाई के लिए मजदूरी, अब वर्दी का है सपना कविता बताती हैं कि पति की मौत के बाद घर चलाना आसान नहीं रहा। उनके पति के बड़े भाई की भी मौत हो चुकी है। ऐसे में परिवार की मुश्किलें और बढ़ गईं। बच्चों की जरूरतें पूरी करने के लिए उन्हें मजदूरी करनी पड़ती है। वह कहती हैं, “बच्चों को वह सब नहीं दे पाती हूं, जो देना चाहती हूं। इसलिए चाहती हूं कि किसी तरह नौकरी मिल जाए।” गांव से ट्रेनिंग सेंटर दूर है। आने-जाने में खर्च और समय दोनों लगते हैं। इसलिए वह गांव के पास ही अभ्यास करती हैं। मौका मिलने पर ट्रेनिंग के लिए भी जाती हैं। रोज की दिनचर्या में बच्चों की देखभाल, घरेलू काम और मजदूरी के बाद बचा समय दौड़ के नाम है। 284 पदों पर होनी है बहाली, महिलाओं के लिए 50 % आरक्षित रामगढ़ जिला मैदान में होमगार्ड बहाली से पहले 1600 मीटर दौड़ का ट्रायल कराया गया था। महिला और पुरुष अभ्यर्थियों ने इसमें हिस्सा लिया। जिले में 24 अक्टूबर से 5 नवंबर तक 284 पदों पर बहाली की प्रक्रिया प्रस्तावित है। महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत सीटों का प्रावधान है। विधवा और तलाकशुदा महिलाओं के लिए 5 प्रतिशत अतिरिक्त आरक्षण का प्रावधान भी बताया गया है। इसी वजह से महिला अभ्यर्थियों में खासा उत्साह है। कविता की साड़ी में नंगे पांव दौड़ने का वीडियो वायरल हुआ तो उनकी कहानी लोगों तक पहुंची। लेकिन कविता के लिए यह सिर्फ वायरल वीडियो नहीं है। वह कहती हैं, “अगर होमगार्ड में भर्ती हो गई तो सबसे पहले घर की आर्थिक स्थिति ठीक करूंगी। बच्चों की पढ़ाई अच्छे से कराऊंगी।” मैदान में उनकी दौड़ अभी खत्म हुई है। मंजिल की दौड़ बाकी है।



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