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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने बानेड़िया गांव की करीब 1,501 बीघा जमीन और बानेड़िया टैंक से जुड़ी लगभग छह दशक पुरानी सीलिंग कार्रवाई को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने पाया कि जमीन के मूल भू-स्वामी सरदार माधव राव किबे की मृत्यु के करीब नौ महीने बाद उनके नाम पर सीलिंग एक्ट का नोटिस जारी किया गया था। बुधवार को कोर्ट ने इसी आधार पर पूरी कार्रवाई को अवैध मानते हुए निरस्त कर दिया। जस्टिस संदीप एन. भट्ट की सिंगल बेंच ने यह आदेश राजत बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड की याचिका पर दिया। कंपनी ने इस जमीन का बोनाफाइड खरीदार होने का दावा करते हुए सीलिंग की कार्रवाई को चुनौती दी थी। मृत्यु के बाद जारी हुआ नोटिस मामले में सबसे अहम तथ्य यह रहा कि सरदार माधव राव किबे का निधन 12 अक्टूबर 1963 को हो चुका था। इसके बावजूद उनके नाम पर 15 जुलाई 1964 को सीलिंग एक्ट का नोटिस जारी किया गया। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि मृत व्यक्ति के नाम जारी किया गया नोटिस कानून की नजर में शून्य है। हाईकोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए माना कि जब कार्रवाई की मूल प्रक्रिया ही वैध नहीं थी, तो उसके आधार पर आगे की कार्यवाही को भी कायम नहीं रखा जा सकता। 1960 में सरकार ने लिया था कब्जा बानेड़िया की इस जमीन का विवाद करीब छह दशक से चला आ रहा है। वर्ष 1960 में राज्य सरकार ने जमीन पर कब्जा लिया था। इसके बाद 1966 में सिविल कोर्ट ने डिक्री पारित कर जमीन का कब्जा वारिसों को वापस सौंपने का आदेश दिया। राज्य सरकार ने इस आदेश को चुनौती दी, लेकिन उसकी अपीलें वर्ष 1982 तक विभिन्न न्यायिक स्तरों पर खारिज होती रहीं। 1989 में लैप्स हुई कार्रवाई, 1999 में फिर शुरू मामले में सीलिंग की कार्रवाई वर्ष 1989 में लैप्स हो गई थी। इसके बावजूद वर्ष 1999 में कलेक्टर ने इस कार्रवाई को फिर से जीवित कर दिया। इसके बाद जमीन का विवाद लंबे समय तक प्रशासनिक और न्यायिक प्रक्रियाओं में उलझा रहा। अब हाईकोर्ट के ताजा आदेश से करीब 60 साल पुरानी सीलिंग कार्यवाही को रद्द कर दिया गया है।
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मौत के 9 महीने बाद मृत व्यक्ति को नोटिस:60 साल पुरानी सीलिंग कार्रवाई हाईकोर्ट ने की रद्द; कहा- नोटिस ही वैध नहीं तो कार्रवाई कैसे टिकेगी
