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बिहार में फरक्का जल संधि को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद सुधाकर सिंह ने जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद संजय झा पर निशाना साधा है। सुधाकर सिंह ने फरक्का जल संधि पर संजय झा के हालिया बयानों पर सवाल उठाए हैं। दरअसल, संजय झा ने केंद्र सरकार से फरक्का जल संधि को मौजूदा स्वरूप में नवीनीकृत न करने की मांग की है। उनका तर्क है कि 1996 में जब यह समझौता हुआ था, तब बिहार के हितों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया था। पिछले 30 वर्षों के अनुभव में बिहार को बाढ़ और सूखे की दोहरी मार झेलनी पड़ी है। सोशल मीडिया पर सुधाकर सिंह ने संजय झा पर किया पलटवार संजय झा ने यह भी कहा है कि संधि की अवधि समाप्त होने के बाद वर्ष 2050 तक बिहार सहित गंगा बेसिन के सभी राज्यों की जल जरूरतों का वैज्ञानिक आकलन कर एक नई व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि जब यह संधि 1996 में हुई थी, तब बिहार के मुख्यमंत्री कौन थे और उस समय राज्य के हितों की रक्षा के लिए क्या कदम उठाए गए थे। झा ने स्पष्ट किया कि वह इस मुद्दे पर राजनीति नहीं कर रहे, बल्कि बिहार की दीर्घकालिक जल सुरक्षा का सवाल उठा रहे हैं। इसी बयान को लेकर सुधाकर सिंह ने सोशल मीडिया पर संजय झा पर पलटवार किया। उन्होंने लिखा, “संजय झा जी, अब अपने ही राजनीतिक पुरोधा जॉर्ज फर्नांडिस जी को भी सुन लीजिए।” बिहार की जनता को गुमराह किया जा रहा – सुधाकर सिंह सुधाकर सिंह ने समता पार्टी के संस्थापक जॉर्ज फर्नांडिस के पुराने लोकसभा भाषण का वीडियो साझा करते हुए कहा कि फरक्का बांध और भारत-बांग्लादेश जल संधि को लेकर फर्नांडिस का रुख इतिहास में दर्ज है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब उनके राजनीतिक पुरोधा इस संधि की तारीफ कर रहे थे, तो आज उसी संधि को लेकर बिहार की जनता को गुमराह किया जा रहा है। सुधाकर सिंह ने यह भी सवाल किया कि यदि संधि में हर पांच साल में समीक्षा का प्रावधान था और बिहार के हितों की इतनी चिंता थी, तो केंद्र में लंबे समय तक राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की सरकार रहने के बावजूद इसे पहले क्यों नहीं बदलवाया गया। उन्होंने पूछा कि सत्ता में साझेदार रहते हुए बिहार के हित में आवाज उस समय कहां थी। NDA से समर्थन वापस लेने की अपील राजद सांसद ने आगे कहा कि यदि संजय झा और जदयू वास्तव में बिहार, गंगा और किसानों के हित में गंभीर हैं तो केवल बयान देने के बजाय एनडीए से समर्थन वापस लेने और भारत-बांग्लादेश जल संधि समाप्त कराने की मांग रखनी चाहिए। सुधाकर सिंह ने आरोप लगाया कि दिल्ली की राजनीति में बिहार के किसानों और गंगा के अधिकार से ज्यादा दूसरी प्राथमिकताओं को महत्व दिया जा रहा है। उन्होंने अडानी की हिफाजत को लेकर भी संजय झा पर गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए हैं। फरक्का मुद्दे पर जदयू और राजद के बीच यह राजनीतिक टकराव ऐसे समय तेज हुआ है, जब वर्ष 1996 की भारत-बांग्लादेश गंगा जल संधि की 30 साल की अवधि 12 दिसंबर 2026 को समाप्त होने वाली है।
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'राजनीतिक पुरोधा जॉर्ज फर्नांडिस जी को भी सुन लीजिए':बक्सर में फरक्का संधि पर सुधाकर सिंह बोले- जनता को गुमराह किया जा रहा
