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रायपुर के मित्तल हॉस्पिटल में पिछले डेढ़ महीने में मल्टीपल मायलोमा से पीड़ित तीन मरीजों का सफलतापूर्वक ऑटोलॉगस स्टेम सेल ट्रांसप्लांट किया गया। खास बात यह है कि इनमें से दो मरीजों का इलाज मुख्यमंत्री विशेष सहायता योजना के तहत मिले सरकारी अनुदान से पूरी तरह मुफ्त किया गया। स्टेम सेल ट्रांसप्लांट महंगा और जटिल इलाज है, इसलिए जरूरतमंद मरीजों के लिए यह सुविधा काफी मददगार है। इन मरीजों के इलाज और निगरानी की जिम्मेदारी डॉ. निहार गुप्ता और डॉ. अभिनीत देशमुख के नेतृत्व में विशेषज्ञ टीम ने संभाली। अस्पताल में करीब तीन साल से बोन मैरो और स्टेम सेल ट्रांसप्लांट की सुविधा उपलब्ध है। इस दौरान कई मरीजों का सफल इलाज किया जा चुका है। क्या है मल्टीपल मायलोमा? मल्टीपल मायलोमा एक तरह का ब्लड कैंसर है। इसमें बोन मैरो में मौजूद प्लाज्मा कोशिकाएं असामान्य तरीके से बढ़ने लगती हैं। इससे शरीर में असामान्य प्रोटीन बनने लगता है। इसके कारण हड्डियों में दर्द या कमजोरी, खून की कमी, किडनी की परेशानी और बार-बार संक्रमण जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। आज के समय में उपलब्ध आधुनिक इलाज से इस बीमारी को लंबे समय तक नियंत्रित किया जा सकता है। अपने ही स्टेम सेल से होता है इलाज स्टेम सेल ट्रांसप्लांट में मरीज के अपने स्वस्थ स्टेम सेल पहले सुरक्षित किए जाते हैं। इसके बाद हाई डोज कीमोथेरेपी देने के बाद इन्हीं स्टेम सेल को वापस शरीर में डाला जाता है, जिससे स्वस्थ रक्त कोशिकाएं दोबारा बन सकें। बीमारी को लंबे समय तक नियंत्रित रखना लक्ष्य डॉक्टरों के मुताबिक, इस इलाज का उद्देश्य बीमारी को लंबे समय तक नियंत्रित रखना है। हालांकि ट्रांसप्लांट का फैसला मरीज की उम्र, स्वास्थ्य और बीमारी की स्थिति देखकर विशेषज्ञ करते हैं।
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रायपुर के मित्तल-हॉस्पिटल में मायलोमा के 3 मरीजों का ट्रांसप्लांट:2 का इलाज सरकारी मदद से मुफ्त, पेशेंट के स्टेम सेल से हुआ ट्रीटमेंट
