रोडवेज के निजीकरण को लेकर कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन:रोहतक में सरकार के खिलाफ की नारेबाजी, 3648 परमिट देने का विरोध




रोहतक में हरियाणा सरकार द्वारा 362 रूटों पर 3648 परमिट देने के विरोध में हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन के सदस्यों ने प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और जीएम के माध्यम से सीएम के नाम ज्ञापन सौंपा। साथ ही चेतावनी दी कि अगर रोडवेज के निजीकरण का फैसला वापस नहीं लिया तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा। हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन के राज्य महासचिव सुमेर सिवाच ने कहा कि 16 जून को वार्ता में परिवहन मंत्री अनिल विज ने स्वयं घोषणा की थी कि रोडवेज के बेड़े में 500 बसे ओर खरीदी जाएंगी। कर्मचारियों की कई मांगों पर सहमति जताते हुए 40 दिन में दोबारा मीटिंग करने का आश्वासन दिया था, लेकिन सरकार ने रोडवेज बेड़े में सरकारी बसें ना बढ़ाकर प्राइवेट परमिट देने का काम किया। 62.37 रुपए प्रति किलोमीटर के हिसाब से दिया परमिट
सुमेर सिवाच ने कहा कि हरियाणा सरकार ने प्राइवेट परमिट व प्राइवेट इलैक्ट्रिक बसें 62.37 रुपए प्रति किलोमीटर के हिसाब से चलाने का निर्णय लिया है। इसके लिए 362 रूटों पर 3648 पर प्राइवेट परमिट मंजूर किए गए है, जिसके लिए आवेदन भी मांगे जा रहे है। ऐसा करके सरकार रोडवेज को निजी हाथों में सौंपना चाहती है। एक इलेक्ट्रिक बस के बदले आएंगी 6 रोडवेज
सुमेर सिवाच ने कहा कि सरकार इलेक्ट्रिक बस खरीदने की बात कर रही है। जबकि एक इलेक्ट्रॉनिक बस के बदले साधारण 6 बसें आती है। हरियाणा के सभी डिपो में 50-50 बसें लेने का जो निर्णय है, अगर उसकी जगह साधारण 300-300 बसें डिपो के बेड़े में शामिल की जाए तो प्रदेश में लगभग 7200 से अधिक बसें उपलब्ध होगी। साथ ही 43200 बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा। परमिट वाली बसों में नहीं मिलेगी 47 श्रेणियों को सब्सिडी
सुमेर सिवाच ने कहा कि सरकार जो 3648 परमिट प्राइवेट बसों को देने जा रही है, उनमें हरियाणा रोडवेज में 47 विभागों को मिलने वाली सब्सिडी नहीं दी जाएगी। साथ ही जनता को प्राइवेट संसाधनों में बैठकर अपनी जान गंवानी पड़ेगी। सरकार रोडवेज के निजीकरण की नीतियों को बंद करें और हरियाणा रोडवेज के बेड़े में नई बसों को शामिल करें।



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