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सुसाइड की कोशिश करने पर मोहाली कोर्ट ने सुनाई सजा:14 साल पहले जहर खाया था, बोला- गलती हो गई, जीवन कीमत समझ गया




मोहाली जिला अदालत ने सुसाइड का प्रयास करने पर मनप्रीत सिंह (34) को IPC की धारा 309 के तहत दोषी ठहराया। हालांकि, आरोपी के अपराध स्वीकार करने और पछतावा जताने के बाद कोर्ट ने उसे 3 महीने 19 दिन की कैद की सजा सुनाई। आरोपी इतनी अवधि पहले ही जेल में काट चुका था। इसके बाद कोर्ट ने उसे तुरंत रिहा करने के आदेश दिए। अब सारे मामले को 5 प्वाइंट में जानिए
26 दिसंबर 2012 को जहरीला पदार्थ खाया था मामला 26 दिसंबर 2012 की रात का है। लुधियाना जिले के समाना स्थित पट्टी सारा गांव के रहने वाले मनप्रीत सिंह ने रात करीब 12 बजे कोई विषैला पदार्थ खा लिया था। हालत बिगड़ने पर रिश्तेदार उसे सिविल अस्पताल समाना लेकर पहुंचे। वहां से गंभीर हालत के चलते उसे राजेंद्र अस्पताल पटियाला रेफर किया गया। मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर स्टेट क्राइम पुलिस स्टेशन, मोहाली ने 12 जनवरी 2013 को IPC की धारा 309 के तहत केस दर्ज किया था। 2016 में भगोड़ा घोषित हुआ मामले की सुनवाई के दौरान मनप्रीत सिंह 20 अक्टूबर 2016 को कोर्ट में पेश नहीं हुआ, जिसके बाद उसे भगोड़ा घोषित कर दिया गया। बाद में पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। कोर्ट में बोला- आवेश में उठाया था कदम जेल से कोर्ट में पेश किए गए मनप्रीत सिंह ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। उसने कहा कि 2012 में एक निजी समस्या के कारण उसने आवेश में आकर यह कदम उठाया था। हालांकि, बाद में उसे अपनी गलती का अहसास हो गया। उसने कोर्ट से कहा कि अब वह जीवन का मोल समझ चुका है और भविष्य में कभी ऐसा कदम नहीं उठाएगा। बचाव पक्ष ने नए कानून का हवाला दिया बचाव पक्ष ने दलील दी कि BNS 2023 में खुदकुशी के प्रयास को सामान्य अपराध नहीं माना गया है। साथ ही मेंटल हेल्थकेयर एक्ट, 2017 की धारा 115 का हवाला देते हुए कहा गया कि खुदकुशी का प्रयास करने वाले व्यक्ति को गंभीर मानसिक तनाव में माना जाता है और उसे मदद व पुनर्वास की जरूरत होती है। कोर्ट ने कहा- 2012 के मामले में IPC लागू होगा कोर्ट ने स्पष्ट किया कि घटना 2012 की है और उस समय IPC लागू था। इसलिए मामले में IPC की धारा 309 के तहत ही कार्रवाई होगी। हालांकि, सजा तय करते समय कोर्ट ने आरोपी के अपराध स्वीकार करने, पछतावा जताने और पहले ही 3 महीने 19 दिन की हिरासत काटने समेत मामले की परिस्थितियों को ध्यान में रखा। इसके बाद कोर्ट ने उतनी ही अवधि की साधारण कैद की सजा सुनाई, जितनी वह पहले ही काट चुका था। फैसले के बाद आरोपी को तुरंत रिहा करने के आदेश दिए गए।



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