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सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट अब पड़ेगी भारी:सरकारी कर्मचारियों के लिए सख्त आचार संहिता लागू




मध्यप्रदेश सरकार ने सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के सोशल मीडिया उपयोग को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने आदेश जारी कर कहा है कि कोई भी शासकीय सेवक सोशल मीडिया पर ऐसी पोस्ट, टिप्पणी, फोटो, वीडियो या अन्य सामग्री साझा नहीं करेगा, जिससे जातीय, धार्मिक, राजनीतिक या सामाजिक वैमनस्य फैलने की आशंका हो। सरकार ने इसे शासकीय सेवा आचरण का हिस्सा बताते हुए सभी विभागों को इन निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं। भड़काऊ पोस्ट और विवादित सामग्री पर रोक आदेश के अनुसार सरकारी कर्मचारी फेसबुक, एक्स (पूर्व ट्विटर), इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप, यूट्यूब या किसी भी अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऐसी सामग्री पोस्ट या साझा नहीं करेंगे, जो किसी धर्म, जाति, समुदाय या व्यक्ति के प्रति घृणा, विद्वेष या तनाव पैदा करती हो। किसी विवादित पोस्ट को लाइक, शेयर या फॉरवर्ड करना भी नियमों के उल्लंघन की श्रेणी में माना जाएगा। राजनीतिक गतिविधियों से दूरी रखने के निर्देश सरकार ने स्पष्ट किया है कि शासकीय सेवक सोशल मीडिया के माध्यम से किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध में प्रचार-प्रसार नहीं करेंगे। किसी राजनीतिक अभियान का समर्थन, विरोध या सार्वजनिक टिप्पणी करना मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। सोशल मीडिया बहस से भी रहें दूर आदेश में कर्मचारियों को सोशल मीडिया पर होने वाली बहस, क्रॉस-कमेंट और विवादित चर्चाओं से दूर रहने की सलाह दी गई है। सरकार का कहना है कि इंटरनेट पर की गई किसी भी सार्वजनिक टिप्पणी को शासन की छवि से जोड़कर देखा जाता है, इसलिए सभी कर्मचारियों को संयम और जिम्मेदारी के साथ सोशल मीडिया का उपयोग करना होगा। उल्लंघन पर होगी विभागीय और कानूनी कार्रवाई सामान्य प्रशासन विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी इन निर्देशों का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 सहित अन्य प्रासंगिक कानूनी प्रावधानों के तहत विभागीय एवं वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए गए हैं कि आदेश का तत्काल प्रभाव से पालन सुनिश्चित कराया जाए। आदेश की प्रमुख बातें



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