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स्वाइन फ्लू के साथ कई वायरस एक्टिव:बुखार में स्वाद-गंध कम, तेज दर्द; डॉक्टर बोले- देर से इलाज अंगों पर डाल सकता है असर




‘पहले गले में हल्की खराश थी। अगली सुबह सर्दी और बुखार आ गया। दोपहर तक तेज बदन दर्द भी शुरू हो गया। डॉक्टर को दिखाया तो पता चला वायरल बुखार है। पहले ये लक्षण 3-4 दिन में ठीक हो जाते थे, लेकिन इस बार रिकवर होने में सात दिन लग गए।’
भोपाल के हमीदिया अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचे राहुल पंजवानी ने ये बातें कहीं। राहुल अकेले नहीं हैं जो ऐसी शिकायत कर रहे हैं।
इन दिनों बारिश थमने के बाद दिन में धूप और शाम को हल्की ठंडक है। मौसम बदलने के साथ सीजनल वायरस भी एक्टिव हैं। इस साल 22 सितंबर तक भोपाल में स्वाइन फ्लू के 72 मामले सामने आए हैं। सितंबर के पहले दो हफ्तों में ही 46 मरीज पॉजिटिव मिले। ज्यादातर मरीज ठीक हो चुके हैं, जबकि करीब आधा दर्जन निगरानी में हैं।
प्रदेश में अब तक 350 से ज्यादा केस सामने आने की जानकारी है। भोपाल में स्वाइन फ्लू से मौत की जानकारी नहीं है, जबकि इंदौर में एक महिला की मौत सामने आई है। एम्स भोपाल, हमीदिया और जेपी अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार, एक सप्ताह के अनुमान में मेडिसिन ओपीडी में आने वाले करीब 30% मरीज मौसमी बीमारियों से प्रभावित हैं। मंगलवार को एम्स की ओपीडी में 6136, हमीदिया में 3786 और जेपी अस्पताल में 2246 मरीज पहुंचे।
कई लोग ये आशंका भी जता रहे हैं कि कहीं कोरोना के केस फिर से तो नहीं बढ़ रहे। वहीं सीजन में टायफाइड, डेंगू, मलेरिया के केस भी हैं।
ऐसे में कैसे पहचानें कि आपकी बीमारी क्या है और क्या एहतियात बरतें…इस रिपोर्ट में पढ़िए- एम्स के डीन (एकेडमिक्स) प्रो. (डॉ.) रजनीश जोशी के अनुसार, इस समय कई तरह के वायरल एजेंट एक्टिव हैं। इनमें रेस्पिरेटरी और इंफ्लुएंजा वायरस शामिल हैं।
कुछ मरीजों में स्वाद और गंध कम होने की शिकायत भी है। यह लक्षण सिर्फ कोरोना तक सीमित नहीं है, दूसरे रेस्पिरेटरी संक्रमणों में भी हो सकता है। केवल लक्षण देखकर किसी एक वायरस की पुष्टि नहीं की जा सकती। जीएमसी के मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. अनिल सेजवार के अनुसार, मौसम बदलने के साथ सामान्य से गंभीर लक्षण वाले मरीज आ रहे हैं। कई मरीजों में बुखार, खांसी और कमजोरी एक सप्ताह से ज्यादा समय तक बनी रही है। स्वाइन फ्लू: फेफड़ों तक पहुंचा तो निमोनिया H1N1 यानी स्वाइन फ्लू इंफ्लुएंजा वायरस से होने वाला संक्रमण है। इसमें अचानक बुखार, लगातार खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, बदन दर्द और तेज थकान हो सकती है।
भोपाल में 22 सितंबर तक स्वाइन फ्लू के 72 पॉजिटिव केस मिले हैं। सितंबर के पहले दो हफ्तों में 46 केस सामने आए।
सीएमएचओ कार्यालय के अनुसार, ज्यादातर मरीज ठीक हो चुके हैं और करीब आधा दर्जन मरीज फिलहाल निगरानी में हैं। एम्स में जांच के लिए आने वाले सैंपल में करीब 20% पॉजिटिव मिलने की जानकारी है। इनमें दूसरे जिलों से रेफर होकर आए सैंपल भी शामिल हैं। सामान्य वायरल और रेस्पिरेटरी इंफेक्शन भी बढ़े मौसम बदलने पर फ्लू के अलावा राइनोवायरस, एडेनोवायरस, RSV समेत कई रेस्पिरेटरी वायरस सक्रिय हो सकते हैं। इनमें बुखार, सर्दी, खांसी, गले में खराश, नाक बहना, बदन दर्द और कमजोरी जैसे लक्षण होते हैं। कौन सा वायरस है, यह केवल लक्षणों से तय नहीं किया जा सकता। कब गंभीर हो सकता है: गंभीर संक्रमण में निमोनिया और ऑक्सीजन की कमी हो सकती है। कुछ मामलों में सेप्सिस, ब्लड प्रेशर गिरने और शॉक जैसी स्थिति बन सकती है। डेंगू: बुखार उतरने के बाद भी नजर जरूरी भोपाल में सितंबर में अब तक डेंगू के 13 केस सामने आए हैं। इस साल 5 हजार लोगों की जांच में 84 मरीज पॉजिटिव मिले हैं। इसके अलावा 27 चिकनगुनिया और 9 मलेरिया के मामले सामने आए हैं। डेंगू में तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, शरीर-जोड़ों में दर्द, मितली, उल्टी, कमजोरी और त्वचा पर दाने हो सकते हैं। डॉ. अनिल सेजवार के अनुसार, बुखार उतरने के बाद भी मरीज पर नजर रखना जरूरी है। कब गंभीर हो सकता है: बुखार कम होने के आसपास प्लाज्मा लीक होने से ब्लड प्रेशर गिर सकता है और शॉक हो सकता है। गंभीर ब्लीडिंग या लिवर, हृदय और दिमाग पर असर भी हो सकता है। तेज पेट दर्द, लगातार उल्टी, नाक-मसूड़ों से खून या अत्यधिक सुस्ती जैसे संकेतों में तुरंत चिकित्सा मदद लें। मलेरिया: देरी से किडनी और दिमाग पर असर भोपाल में इस साल अब तक मलेरिया के 9 मामले सामने आए हैं। इसमें बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द, कमजोरी, बदन दर्द, मितली और उल्टी हो सकती है। सीएमएचओ भोपाल डॉ. मनीष शर्मा के अनुसार, बुखार को सामान्य वायरल मानकर इलाज में देरी नहीं करनी चाहिए। कब गंभीर हो सकता है: गंभीर मलेरिया में एनीमिया, किडनी पर असर, पेशाब कम होना, फेफड़ों में पानी भरना, दिमाग पर असर, दौरे, भ्रम, कोमा और शॉक जैसी स्थिति हो सकती है। टाइफाइड: आंत में छेद से सेप्सिस का खतरा टाइफाइड वायरल बीमारी नहीं, बल्कि Salmonella Typhi बैक्टीरिया से होने वाला संक्रमण है। भोपाल का सरकारी स्थानीय आंकड़ा फिलहाल उपलब्ध नहीं है, हालांकि निजी अस्पतालों में मरीज देखे जा रहे हैं। दूषित पानी और भोजन इसके प्रमुख माध्यम हैं। इसमें लंबे समय तक बुखार, कमजोरी, सिरदर्द, पेट दर्द, भूख कम लगना, कब्ज या दस्त, मितली और उल्टी हो सकती है। कब गंभीर हो सकता है: इलाज में देरी होने पर आंतों से ब्लीडिंग, आंत में छेद और सेप्सिस जैसी जटिलताएं हो सकती हैं। कोरोना के समय की सावधानियां आज भी कारगर बीमारी में घर पर रहना, मास्क लगाना, हाथ साफ रखना, खांसते-छींकते समय मुंह-नाक ढंकना और कमरे में वेंटिलेशन रखना फ्लू व दूसरे रेस्पिरेटरी संक्रमणों का प्रसार कम कर सकता है। मच्छरों से बचने के लिए पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें, मच्छरदानी या रिपेलेंट का इस्तेमाल करें और घर के आसपास पानी जमा न होने दें।
टाइफाइड से बचने के लिए सुरक्षित पानी और साफ भोजन लें। लगातार बुखार या हालत बिगड़ने पर खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर से जांच कराएं। गंभीर संक्रमण में कई अंग प्रभावित हो सकते हैं सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा के अनुसार, हर वायरल या संक्रमण में अंग फेलियर नहीं होता। गंभीर स्थिति आमतौर पर संक्रमण बढ़ने या शरीर की प्रतिक्रिया अनियंत्रित होने पर बनती है।
गंभीर फ्लू में फेफड़े, डेंगू में ब्लीडिंग और शॉक, मलेरिया में किडनी, फेफड़े या दिमाग और टाइफाइड में आंत प्रभावित हो सकती है।



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