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हरियाणा में लोकायुक्त का पद खाली हो गया है। निवर्तमान लोकायुक्त और पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस हरिपाल वर्मा का 5 साल का कार्यकाल 10 सितंबर को समाप्त हो गया। उन्होंने 11 सितंबर 2021 को इस पद की शपथ ली थी। कानून के मुताबिक, पद खाली होने के तीन महीने के भीतर यानी 10 दिसंबर तक प्रदेश में नए लोकायुक्त की नियुक्ति की जानी है, जो कि प्रदेश के छठे लोकायुक्त होंगे। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट और कानूनी मामलों के जानकार हेमंत कुमार ने बताया कि ‘हरियाणा लोकायुक्त अधिनियम, 2002’ में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि नया लोकायुक्त बनने तक पुराना लोकायुक्त पद पर बना रहे। कानूनन सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज, हाईकोर्ट के रिटायर्ड चीफ जस्टिस या जज ही इस पद पर नियुक्त हो सकते हैं। लोकायुक्त नियुक्ति का नियम एडवोकेट हेमंत कुमार के अनुसार अधिनियम की धारा 3 के तहत नियुक्ति राज्यपाल द्वारा मुख्यमंत्री की सलाह पर होती है। नियम के तहत सीएम को विधानसभा अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) या पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से विचार-विमर्श करना होता है। कानून में साफ लिखा है कि यह परामर्श मुख्यमंत्री पर बाध्यकारी नहीं है। यानी विपक्ष या न्यायपालिका की राय कुछ भी हो, अंतिम फैसला मुख्यमंत्री का ही होगा। सरकार को केवल गजट नोटिफिकेशन जारी कर यह सूचित करना होता है कि परामर्श की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। हरियाणा में लोकायुक्त की स्थिति… 2017 से लंबित हैं एक्शन टेकन रिपोर्ट हरियाणा लोकायुक्त अधिनियम के तहत किसी भी सिफारिश पर संबंधित विभाग को 3 महीने के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) भेजनी होती है। लेकिन रिपोर्ट के अनुसार 2017 से 2025 तक की करीब 170 सिफारिशों पर सरकार कुंडली मारकर बैठी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने भी माना है कि विभाग समय पर रिपोर्ट नहीं भेजते। उन्होंने सभी विभागाध्यक्षों और उपायुक्तों को 8 जुलाई को नया सर्कुलर जारी कर लोकायुक्त की सिफारिशों पर तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।
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हरियाणा में लोकायुक्त का पद हुआ खाली:जस्टिस हरिपाल वर्मा का कार्यकाल पूरा; सीएम की सलाह पर राज्यपाल करेंगे नियुक्ति
