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हिमाचल प्रदेश में इस सेब सीजन में अडानी समेत दूसरे कॉर्पोरेट घरानों ने भी पिछले साल की तुलना में 25 से 33 फीसदी तक ज्यादा रेट ओपन किए हैं। बावजूद इसके राज्य के सेब बागवान खुश नहीं हैं। इसके पीछे की वजह उत्पादन में बड़ी गिरावट मानी जा रही है। राज्य में इस बार सेब उत्पादन 1.75 करोड़ से दो करोड़ पेटी के बीच सिमट सकता है, जबकि पिछले साल 3.49 करोड़ पेटी सेब हुआ था। उत्पादन कम होने के कारण इस बार बागवानों को ओपन मार्केट में अच्छे रेट मिल रहे हैं। इससे बागवान सीए (वातानुकूलित) स्टोर चला रहे कॉर्पोरेट घरानों को कम सेब दे रहे हैं। खुले बाजार (मंडियों) में ऊंचे दाम के बावजूद अडानी और दूसरे कॉर्पोरेट घरानों द्वारा ओपन किए गए रेट से बागवानों में रोष है। ओपन मार्केट में बागवानों का अच्छी क्वालिटी का सेब 2100 से 2800 रुपए प्रति पेटी (20 से 22 किलो) बिक रहा है। इससे 95 से 127 रुपए प्रति किलो तक औसत आ रही है, जबकि कॉर्पोरेट घरानों के रेट की औसत मुश्किल से 70 से 95 रुपए प्रति किलो की बैठ रही है। एक-दो दिन में सेब के रेट बढ़ा सकता है अडानी समूह हालांकि, अडानी बीते रविवार को ही सेब के रेट में इजाफा किया है। फिर भी ओपन मार्केट की तुलना में रेट इनके कम हैं। इस वजह से बहुत कम बागवान ही इस बार कॉर्पोरेट घरानों को सेब दे रहे हैं। सूत्रों के अनुसार- अडानी समूह एक-दो दिन के भीतर सेब के रेट रिवाइज कर सकता है। इसके बाद दूसरे निजी घरानों पर भी रेट बढ़ाने का दबाव बढ़ेगा। इन वजह से कॉर्पोरेट घरानों को सेब देना पसंद करते हैं बागवान राज्य का बागवान अडानी और दूसरे कॉर्पोरेट घरानों को पेमेंट की वजह और पैकिंग सामग्री पर आने वाली लागत से बचने के लिए सेब देना पसंद करते हैं, क्योंकि सीए स्टोर संचालक अपनी क्रेट में सेब खरीदते हैं। इससे सेब की पेटी खरीदने और पैकिंग पर होने वाले लगभग 150 से 200 रुपए की बचत हो जाती है। इसी तरह निजी घराने बागवानों को पेमेंट का भुगतान भी टाइम पर दे देते हैं, जबकि ओपन मार्केट में बहुत से बागवानों को एक-एक साल तक पेमेंट का इंतजार करना पड़ता है। बहुत से बागवानों की पेमेंट हड़पकर आढ़ती और लदानी फरार हो जाते हैं। पितू सेब के रेट से बागवान ज्यादा मायूस वहीं कॉर्पोरेट घरानों ने पितू सेब (सबसे छोटे साइज) के रेट बहुत कम ओपन किए हैं। ओपन मार्केट में जब बागवानों का सेब औसत 95 से 127 रुपए प्रति किलो बिक रहा है। ऐसे वक्त में अडानी ने पितू सेब का रेट 60 रुपए प्रति किलो ओपन किया है, जबकि इस बार खराब मौसम के कारण ज्यादातर सेब पितू ही है। ठियोग के मत्याना निवासी बागवान अनिल ठाकुर ने बताया कि अच्छे रेट होने के बावजूद निजी घरानों ने इस पर कम दाम ओपन किए हैं। यह सेब के बाजार को गिराने की साजिश लग रही है। उन्होंने निजी घरानों के पितू सेब के रेट को बागवानों के साथ धोखा बताया। पितू सेब का रेट 60 रुपए उचित नहीं: बिष्ट रोहड़ू के प्रोग्रेसिव बागवान लोकिंदर बिष्ट का कहना है कि इस बार उत्पादन कम होने के बावजूद पितू के लिए करीब 60 रुपए किलो का रेट उचित नहीं है। उनके अनुसार सीजन में बड़ी मात्रा में यही क्वालिटी बाजार में आने वाली है और खुले बाजार में इसके बेहतर दाम मिल रहे हैं। बागवानों का सवाल- कम फसल में दाम ज्यादा क्यों नहीं? HPMC के पूर्व वाइस चेयरमैन प्रकाश ठाकुर का कहना है कि जब उत्पादन कम है तो मांग और आपूर्ति के सामान्य नियम के मुताबिक किसानों को इसका फायदा मिलना चाहिए। उनका सवाल है कि जब किसानों के पक्ष में बाजार की परिस्थितियां बनती हैं, तब यह नियम क्यों काम नहीं करता। उनका कहना है कि कृषि उत्पादों में मांग और आपूर्ति का फायदा अक्सर उत्पादक तक नहीं पहुंच पाता और बाजार की ताकतें ही कीमत तय करती हैं।
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हिमाचल- आडानी के रेट से सेब बागवान नाराज:मंडी में ₹2800 पेटी; CA स्टोर में पिट्टू सिर्फ ₹60 प्रति किलो, बागवानों ने रोष
